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अमरनाथ शिवलिंग को लेकर उठे सवाल | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरनाथ धाम बोर्ड ने इन ख़बरों का खंडन किया है जिनमें कहा गया था कि अमरनाथ यात्रा की पवित्र गुफ़ा मंदिर का शिवलिंग प्राकृतिक नहीं बल्कि मानव निर्मित है. हालांकि अमरनाथ धाम बोर्ड का कहना है कि पवित्र गुफ़ा में इस बार एक छोटा शिवलिंग ही बन पाया है. अमरनाथ बोर्ड ने सफ़ाई दी है कि वह कोई व्यापारिक संगठन नहीं है जिसका मकसद लाभ कमाना हो, वह तो यात्रा को आसान बनाने के लिए सुविधाएँ प्रदान करता है. इसके पहले एक प्रमुख हिंदू महंत दीपेंद्र गिरि ने इन ख़बरों पर चिंता व्यक्त की थी कि पवित्र गुफ़ा में इस बार शिवलिंग मानव निर्मित है. अमरनाथ धाम बोर्ड ने जारी एक बयान में कहा है कि 14 मई को सेना के एक दल ने वहाँ का निरीक्षण किया था और उस दौरान वहाँ बर्फ नहीं थी. लेकिन चार दिन पहले जो दल वहाँ गया था, उसने पाया कि वहाँ पानी की बूंदें जमा हो रही हैं. उसके बाद वहाँ बर्फ गिरने की ख़बरें आईं और शिवलिंग बनने लगा. ग़ौरतलब है कि हर वर्ष ग्लेशियर से बह कर आनेवाली बूंदें एक खास बिंदु पर गिर कर जमा हो जाती हैं और इस तरह प्राकृतिक रूप से शिवलिंग आकार ग्रहण करता है. इस शिवलिंग के दर्शन के लिए लाखों श्रद्धालु लगभग 14 हज़ार फीट की ऊंचाई पर अमरनाथ गुफ़ा पहुँचते हैं. बोर्ड का कहना है कि शिवलिंग का न बनना या फिर छोटे आकार का बनना कोई नई बात नहीं है और ऐसा पहले भी हो चुका है. इस बार ख़राब मौसम के कारण अमरनाथ यात्रा कई बार रोकनी पड़ी है. हर बार की तरह इस साल भी बड़े सुरक्षा बंदोबस्त के बीच यह यात्रा शुरू हुई है. यात्रियों को तंग रास्ते से होकर गहरी खाइयों के बगल से गुजरना पड़ता है. इस बार लगभग दो लाख यात्रियों के अमरनाथ गुफ़ा पहुँचने की संभावना है. | इससे जुड़ी ख़बरें ख़राब मौसम से अमरनाथ यात्रा बाधित11 जून, 2006 | भारत और पड़ोस अमरनाथ यात्रियों का पहला जत्था चला10 जून, 2006 | भारत और पड़ोस अमरनाथ यात्रा अब 40 दिनों तक चलेगी25 जून, 2004 | भारत और पड़ोस कश्मीर में बम धमाका | भारत और पड़ोस भारी भीड़ से यात्रा में मुश्किलें | भारत और पड़ोस सुरक्षा के बीच अमरनाथ यात्रा | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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