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ख़राब मौसम से अमरनाथ यात्रा बाधित | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारतीय राज्य जम्मू-कश्मीर में अमरनाथ यात्रा पर निकला तीर्थ यात्रियों का पहला जत्था रविवार को ख़राब मौसम के कारण रोक दिया गया है. अमरनाथ यात्रा के लिए करीब 600 तीर्थ यात्रियों का यह जत्था शनिवार को जम्मू से रवाना हुआ था. यात्रियों को पहलगाम इलाक़े के पास नूनवान बेस कैंप पर रोक दिया गया है. यहाँ से यात्रियों को रविवार की सुबह चंदनवाड़ी ले जाना था जहाँ से आगे की चढ़ाई शुरू होती. करीब चार घंटे की प्रतीक्षा के बाद अधिकारियों ने यात्रियों को बताया कि रविवार को होने वाली यात्रा ख़राब मौसम के चलते टाल दी गई है. यात्रा की व्यवस्था में लगे एक अधिकारी जयपाल सिंह ने बीबीसी को बताया कि यात्रा के रास्ते में कई स्थानों पर बर्फ़बारी हुई है जिसके कारण रविवार की यात्रा को टालना पड़ रहा है. उन्होंने स्पष्ट तौर पर कहा कि रविवार शाम तक मौसम की यही स्थिति बने रहने की आशंका है और ऐसे में यात्रियों कि जिंदगी के साथ समझौता नहीं किया जा सकता है. चलो अमरनाथ... हिंदुओं के महत्वपूर्ण तीर्थ स्थानों में से एक, अमरनाथ गुफ़ा कश्मीर क्षेत्र के पहलगाम इलाक़े में पड़ती है. हर बार की तरह इस वर्ष भी काफ़ी बड़े सुरक्षा बंदोबस्त के बीच यह यात्रा शुरू हुई है. अमरनाथ की गुफ़ा तक के पूरे रास्ते पर सुरक्षा के व्यापक बंदोबस्त किए गए हैं. इस यात्रा का पहला चरण जम्मू से शुरु होकर पहलगाम में ख़त्म होगा. दूसरे चरण में 14500 फ़ुट की ऊंचाई पर स्थित अमरनाथ गुफ़ा तक पहुंचने में 45 किलोमीटर की दूरी तय करनी होगी. यात्रियों को क़ाफ़ी कम तापमान में तंग रास्ते से होकर गहरी खाईयों के बगल से गुजरना पड़ता है. इस बार लगभग दो लाख यात्रियों के अमरनाथ गुफ़ा पहुँचने की संभावना है. | इससे जुड़ी ख़बरें अमरनाथ यात्रियों का पहला जत्था चला10 जून, 2006 | भारत और पड़ोस अमरनाथ यात्रा अब 40 दिनों तक चलेगी25 जून, 2004 | भारत और पड़ोस कश्मीर में बम धमाका | भारत और पड़ोस भारी भीड़ से यात्रा में मुश्किलें | भारत और पड़ोस सुरक्षा के बीच अमरनाथ यात्रा | भारत और पड़ोस 'शांति प्रक्रिया पर असर' | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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