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मंगलवार, 10 जुलाई, 2007 को 13:06 GMT तक के समाचार
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'इंसाफ़ क्या मिलेगा... बस बेटा ठीक हो जाए'

अमित सिंह
धमाके में अमित सिंह के सिर में चोट आई थी
उस दिन शाम दिनेश सिंह को उनके बेटे अमित का अंतिम बार फ़ोन आया था. अमित ने फ़ोन पर बताया कि उसके सर पर चोट आई है.

तब से आज तक अमित कोमा में है और अस्पताल में भर्ती है.

मुंबई के रेलवे विभाग में काम करने वाले दिनेश सिंह भी एक ऐसी ही ट्रेन पर सवार होने वाले थे जिसमें थोड़ी देर बाद विस्फोट हुआ.

लेकिन भीड़ होने की वजह से दिनेश उस पर सवार नहीं हुए.

दिनेश बताते हैं,"मैं उस वक़्त दादर स्टेशन पर था...और माहिम-माटुंगा वाली ट्रेन पर चढ़ा था जिसमें बाद में विस्फोट हुआ था. मैं भीड़ होने के की वजह से उतर गया और दूसरी ट्रेन पकड़ी. तभी शाम 6.20 बजे अमित का फ़ोन आ गया था."

विस्फोट को एक साल पूरा होने वाला है लेकिन दिनेश अपने बेटे को लेकर पूरी तरह से डॉक्टरों पर निर्भर हैं.

 मैं उस वक़्त दादर स्टेशन पर था...और माहिम-माटुंगा वाली ट्रेन पर चढ़ा था जिसमें बाद में विस्फोट हुआ था. मैं भीड़ होने के की वजह से उतर गया और दूसरी ट्रेन पकड़ी. तभी शाम 6.20 बजे अमित का फ़ोन आ गया था

वो कहते हैं, "हम तो डॉक्टरों के सहारे हैं...जो वो बोलेंगे, हम वहीं करेंगे. मुझे उम्मीद है कि मेरा बेटा ठीक है हो जाएगा."

दिनेश को उनके बेटे अमित के उपचार के लिए रेलवे विभाग ने ही पैसा दिया है. भारत सरकार और महाराष्ट्र सरकार ने उन्हें 50-50 हज़ार रुपए दिए हैं.

इस मामले में 30 जुलाई को उन लोगों पर चार्जशीट दाख़िल होने वाली है जिन्होंने विस्फोट किया.

उम्मीद

जब दिनेश सिंह से ये पूछा गया कि क्या उन्हें इस मामले में इंसाफ मिलेगा तो वो कहते हैं,"इंसाफ़ क्या मिलेगा? हम तो चाहते हैं कि बस हमारा लड़का खड़ा हो जाए. मुबई में हुए 1993 के विस्फोट मामले में क्या हुआ...कुछ नहीं. मैं तो यही चाहता हूँ कि मेरा बेटा ठीक हो जाए."

 इंसाफ़ क्या मिलेगा? हम तो चाहते हैं कि बस हमारा लड़का खड़ा हो जाए. मुबई में हुए 1993 के विस्फोट मामले में क्या हुआ...कुछ नहीं. मैं तो यही चाहता हूँ कि मेरा बेटा ठीक हो जाए

लेकिन उन्होंने आगे कहा,"जो भी इन धमाकों में शामिल हो उसे सख़्त से सख़्त सज़ा दी जानी चाहिए."

दिनेश को लगता है कि लोग अब मामले को भूल रहे हैं. अगर इस मामले में ज़ल्द ही कुछ फ़ैसला आता तो अच्छा होता.

दिनेश का बेटा एक साल से कोमा में पड़ा है. इस दौरान वो और उनका परिवार बहुत तकलीफ में रहे.

वो बताते हैं,"मैं काम पर भी जाता हूँ और बेटे के पास भी आकर रहता हूँ. बहुत समस्या होती है. मेरी पत्नी यहाँ दिन भर गुजारती है. मेरा बड़ा बेटा दिन में नौकरी करता है और रात में अपने भाई के पास अस्पताल में सोता है. पूरा परिवार बहुत परेशान है. पर क्या करें?"

दिनेश कहते हैं, "अगर कोई न्यूरो सर्जन बाहर से आकर देखता तो कुछ बात बन सकती थी.अमित को देखने भाजपा नेता लाल कृष्ण आडवाणी अस्पताल गए थे. उन्होंने जसलोक अस्पताल के डॉक्टरों से कहा कि इस मसले पर दूसरे डॉक्टरों से सलाह ली जाए लेकिन अभी तक कुछ नहीं हो सका है."

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