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पेशावर में तीन चीनी नागरिकों की हत्या | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पाकिस्तान के पेशावर शहर में हुए एक हमले में तीन चीनी नागरिकों की मौत हो गई है और एक अन्य चीनी व्यक्ति घायल हो गया है. एक पाकिस्तानी अधिकारी ने आशंका व्यक्त की है कि चीनी मूल के लोगों पर हुए इस हमले के तार लाल मस्जिद पर हो रही सैनिक कार्रवाई से जुड़े हो सकते हैं. दरअसल, लाल मस्जिद पर सैन्य कार्रवाई की शुरुआत से पहले 22 जून को लाल मस्जिद से जुड़े मदरसों के छात्रों ने एक चीनी ब्यूटी और मसाज सेंटर पर छापा मार कर वहाँ मौजूद नौ लोगों को अगवा कर लिया था. अगवा किए गए चीनी लोगों में से छह चीनी लड़कियाँ थी. इन चीनी लोगों को 23 जून को छात्रों के कब्ज़े से छुड़वा लिया गया था. इसके बाद ही प्रशासन ने लाल मस्जिद पर सख्ती करना शुरू किया था और प्रशासन की यह कार्रवाई अगले कुछ दिनों में सैन्य कार्रवाई में बदल गई. अब माना जा रहा है कि पेशावर में हुई यह ताज़ा घटना इसी पिछले घटनाक्रम से जुड़ी हो सकती है. ग़ौरतलब है कि पिछले सात दिनों से सेना ने लाल मस्जिद की घेराबंदी कर रखी है और अभी तक मस्जिद में छिपे लोगों और पाकिस्तानी सेना के बीच हुए संघर्ष में कम से कम 21 लोगों की मौत हो चुकी है. जुड़े हैं तार..? हमले के शिकार चारों चीनी लोग एक कारखाने में काम करते थे. चश्मदीदों का कहना है कि रविवार रात कुछ बंदूकधारियों ने उनपर हमला किया जिसमें तीन लोगों की मौत हो गई और एक अन्य चीनी व्यक्ति घायल हो गया. चश्मदीद यह भी बताते हैं कि इन हमलावरों के चेहरों पर दाढ़ी थी.
माना जाता है कि पाकिस्तान में रह रहे चीनी नागरिकों का सांप्रदायिक गतिविधियों में ध्यान कम ही रहता है और वे धार्मिक मसलों में न के बराबर दखल देते हैं. जैसे-जैसे लाल मस्जिद पर सैन्य कार्रवाई में देर हो रही है, पाकिस्तान सरकार की छवि पर उसका ग़लत असर पड़ रहा है. हालांकि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शौकत अज़ीज़ भी आशंका व्यक्त कर चुके हैं कि लाल मस्जिद में कुछ प्रशिक्षित चरमपंथी भी मौजूद हैं. शौकत अज़ीज़ ने कहा, "सही तौर पर तो यह किसी को नहीं पता है कि मस्जिद में चरमपंथी हैं पर जिस तरह की कार्रवाई उनकी तरफ से हो रही है उससे साफ है कि अंदर कुछ प्रशिक्षित चरमपंथी मौजूद हैं." लगभग एक सप्ताह से लाल मस्जिद और उससे संबंधित मदरसे में रहने वाले कट्टरपंथी छात्रों और सेना के बीच संघर्ष चल रहा है जिसके कारण अबतक कम से कम 21 लोग मारे जा चुके हैं. बीबीसी संवाददाता का कहना है कि ऐसी ख़बरें भी हैं कि मस्जिद के अंदर प्रतिबंधित जैशे मोहम्मद जैसे संगठनों का नियंत्रण है. दूसरी ओर मस्जिद के मौलवी अब्दुल रशीद ग़ाज़ी कह चुके हैं कि वो और उनके समर्थक आत्मसमर्पण करने के बजाए आत्महत्या करना पसंद करेंगे. |
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