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लाल मस्जिद की घेराबंदी जारी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
गुरूवार की सुबह इस्लामाबाद की लाल मस्जिद पर पाकिस्तानी सेना ने कार्रवाई शुरू कर दी. बीबीसी संवाददाता का कहना है कि मस्जिद के ऊपर तीन लड़ाकू हेलिकॉप्टर उड़ते देखे गए, सेना ने मस्जिद के परिसर में बाहर से गैस के गोले भी फेंके हैं. इस बीच मस्जिद से गिरफ़्तार किए गए मौलाना अब्दुल अज़ीज़ का कहना है कि अंदर अभी भी ढाई सौ लोग मौजूद हैं, उनके मुताबिक़ उनके पास कम से कम 14 क्लाशनिकोव बंदूकें हैं. मौलाना अब्दुल अज़ीज़ को बुधवार को बुर्क़ा पहनकर भाग निकलने की कोशिश करते हुए गिरफ़्तार किया गया था. इस्लामाबाद में पुलिस उप आयुक्त चौधरी मोहम्मद अली ने बीबीसी को बताया," मौलाना अब्दुल अज़ीज़ बुर्क़ा पहन कर भागने की कोशिश कर रहे थे ताकि वे अपने पहचान छिपा सकें. उसी दौरान महिला पुलिसकर्मियों ने उन्हें रोका." अपनी गिरफ़्तारी के बाद पाकिस्तान के राष्ट्रीय टीवी चैनल पीटीवी पर दिए गए इंटरव्यू में मौलाना अज़ीज़ ने कहा है कि "छात्र मुक़ाबला करने की हालत में नहीं हैं इसलिए उन्हें या तो मस्जिद से निकल जाना चाहिए या फिर आत्मसमर्पण कर देना चाहिए." एक स्थानीय अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर समाचार एजेंसी रायटर्स से कहा है कि चेतावनी के तौर पर गोले अंदर फेंके गए हैं लेकिन सेना अभी मस्जिद के अंदर दाख़िल नहीं हुई है. लाल मस्जिद के हथियारबंद लोगों और सुरक्षा बलों के बीच हुई झड़प में अब तक 16 लोगों की मौत हो चुकी है, बाहर निकलने वाले कुछ छात्रों का कहना है कि अंदर कुछ और लाशें पड़ी हैं. पाकिस्तानी सेना ने मस्जिद के बाहर का पूरा इलाक़ा सील कर दिया है और वहाँ सड़कों पर टैंक तैनात किए गए हैं. प्रशासन का कहना है कि अब तक लगभग 1200 लोग आत्मसमर्पण कर चुके हैं. लेकिन अब भी बड़ी संख्या में लोगों के अंदर होने की आशंका जताई जा रही है. सरकारी अधिकारियों का कहना है कि हालांकि बहुत से छात्र- छात्राएँ बाहर निकल आए हैं लेकिन अब भी लगभग 1100 छात्र-छात्राएं इस मस्जिद और मदरसा परिसर में हो सकते हैं. बीबीसी संवाददाता हारून रशीद का कहना है कि सुरक्षाबलों ने गुरुवार की सुबह लगभग एक दर्जन धमाके किए जिससे पूरा इलाक़ा धुएं से भर गया. संवाददाता का कहना था कि इस इलाक़े में अब भी कर्फ़्यू जारी है और आसपास तनाव बना हुआ है. सुलझाने के प्रयास संवाददाता का कहना है कि प्रशासन अब भी इस गतिरोध को बातचीत के ज़रिए सुलझाने की कोशिश कर रहा है.
उसने मुस्लिम लीग के नेता शुजात हुसैन के माध्यम से बुधवार रात बातचीत की कोशिश की थी. इस बीच पाकिस्तानी संसद में विपक्ष के नेता मौलाना फ़ज़लुर्रहमान ने कहा है कि मौलाना अब्दुल अज़ीज़ की बुर्क़े में गिरफ़्तारी सभी मुस्लिम नेताओं के लिए शर्मिंदगी की वजह बन गई है. बीबीसी उर्दू सेवा से बातचीत करते हुए मुस्लिम धार्मिक संगठनों के गठबंधन (एमएमए) के नेता मौलाना फ़ज़ुलर्रहमान ने कहा, "मौलाना अब्दुल अज़ीज़ और उनके भाई अब्दुल रशीद गाज़ी को भरोसा दिलाया गया था कि अगर वे हथियार फेंककर बाहर आ जाएँ तो उन्हें इज़्ज़त से रखा जाएगा लेकिन वे इसके लिए तैयार नहीं हुए." हालांकि इसके पहले सुरक्षाबलों की ओर से कहा गया था अगर ज़रूरी हुआ तो मस्जिद के भीतर कार्रवाई की जाएगी. कट्टरपंथियों का गढ़ मानी जाने वाली लाल मस्जिद के भीतर लड़कों और लड़कियों के दो मदरसे हैं. इस मस्जिद तक जाने वाले सभी रास्तों को अर्धसैनिक बलों ने बंद कर दिया है. उल्लेखनीय है कि लाल मस्जिद और प्रशासन के बीच लंबे अरसे से टकराव चलता रहा है, इस कट्टरपंथी मस्जिद के छात्र और उसके प्रबंधन से जुड़े लोगों की माँग रही है कि इस्लामाबाद में शरिया का़नून को पूरी तरह लागू कराया जाए. पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ की इस बात को लेकर निंदा होती रही है कि वे लाल मस्जिद के प्रशासन पर अंकुश नहीं लगा पा रहे हैं. |
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