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'बुर्क़ा पहनकर भागते मौलवी को पकड़ा' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पाकिस्तान में अधिकारियों ने कहा है कि लाल मस्जिद के प्रमुख प्रंधबक मौलाना अब्दुल अज़ीज़ को गिरफ़्तार कर लिया गया है. अधिकारियों के मुताबिक वो बुर्क़ा पहनकर भागने की कोशिश कर रहे थे. इस्लामाबाद में पुलिस उप आयुक्त चौधरी मोहम्मद अली ने बीबीसी को बताया," मौलाना अब्दुल अज़ीज़ बुर्क़ा पहन कर भागने की कोशिश कर रहे थे ताकि वे अपने पहचान छिपा सकें. उसी दौरान महिला पुलिसकर्मियों ने उन्हें रोका." एक सुरक्षा अधिकारी ने एएफ़पी को बताया, "मौलाना अब्दुल अज़ीज़ सात लड़कियों के एक समूह में थे, सब ने एक जैसे कपड़े पहने हुए थे. अब्दुल अज़ीज़ ने भी बुर्क़ा पहना हुआ था और उनकी आँखें भी ढकी हुई थीं. हमें लगा कि वे कुछ अलग ही दिख रहे हैं. बाक़ी लड़कियाँ तो लड़कियों जैसी दिख रही थीं जबकि वे लंबे थे और उनका पेट निकला हुआ था." लाल मस्जिद में मदरसे के छात्रों को पहले ही बाहर निकलने का आदेश दिया जा चुका है और अब तक 700 से अधिक छात्र मदरसे से बाहर निकल चुके हैं. आत्मसमर्पण की समयसीमा बढ़ा दी गई है. लाउडस्पीकर पर ऐलान किया गया है कि बाहर निकलने वालों के ख़िलाफ़ कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी, इन छात्रों के अभिभावकों को भी इस्लामाबाद बुलवाया गया है ताकि वे अपने बेटे-बेटियों को घर ले जा सकें. कट्टरपंथियों का गढ़ मानी जाने वाली लाल मस्जिद के भीतर लड़कों और लड़कियों के दो मदरसे हैं. इस मस्जिद तक जाने वाले सभी रास्तों को अर्धसैनिक बलों ने बंद कर दिया है. एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि मस्जिद के परिसर में दो से पाँच हज़ार तक लोग हो सकते हैं जिनमें से कई लोग हथियारबंद भी हैं. अभी तक हथियारबंद लोगों के बाहर निकलने की इत्तला नहीं है, इन हथियारबंद लोगों और सैनिकों के बीच हुई झड़प में मंगलवार को 10 लोग मारे गए थे और 90 घायल हो गए थे. घेराबंदी मस्जिद के आसपास के पूरे इलाक़े में कर्फ़्यू लगा दिया गया है और वातावरण में बहुत तनाव है, बार-बार हथियारबंद लोगों से हथियार डालने को कहा जा रहा है.
पाकिस्तानी सरकार ने घोषणा की है कि स्वेच्छा से बाहर निकलने वालों के ख़िलाफ़ कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी और उनकी पढ़ाई का बेहतर बंदोबस्त किया जाएगा. बीबीसी संवाददाता का कहना है कि मदरसे के परिसर में बुरक़ा पहने कई लड़कियाँ और छात्र दिखाई दे रहे हैं जिनसे पुलिस अधिकारी क़ागज़ों पर अँगूठा लगवा रहे हैं. लाल मस्जिद के मौलाना अब्दुल रशीद ग़ाज़ी ने बीबीसी उर्दू से टेलीफ़ोन पर हुई बातचीत में कहा कि मस्जिद में कोई छात्र हथियारबंद नहीं है बल्कि वे मस्जिद के गार्ड थे. उन्होंने कहा, "मंगलवार की फ़ायरिंग सुरक्षा बलों ने शुरू की थी और अब वे मदरसे का नाम बदनाम कर रहे हैं, हमारी तरफ़ से बाद में गोलियाँ चलाई गईं थी अपनी हिफ़ाज़त में." उन्होंने इन आरोपों का खंडन किया कि बाहर निकलने की इच्छा रखने वाले छात्रों को जबरन रोका जा रहा है. कर्फ्यू तोड़ने वालों को देखते ही गोली मारने के आदेश दिए गए हैं लेकिन मदरसे के छात्रों को हथियार डालने के लिए कोई समय सीमा नहीं दी गई है. लाल मस्जिद के छात्रों के ख़िलाफ़ ग़ैर-क़ानूनी हथियार रखने और आतंकवाद के मुक़दमे दर्ज किए गए हैं. इसके पहले मंगलवार की रात मौलवियों ने दोनों पक्षों के बीच सुलह कराने की कोशिश की लेकिन कोई सहमति नहीं बन पाई. लाल मस्जिद और प्रशासन के बीच लंबे अरसे से टकराव चलता रहा है, इस कट्टरपंथी मस्जिद के छात्र और उसके प्रबंधन से जुड़े लोगों की माँग रही है कि इस्लामाबाद में शरिया का़नून को पूरी तरह लागू कराया जाए. |
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