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मुशर्रफ़ ने मस्जिद के छात्रों को चेताया | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने इस्लामाबाद की लाल मस्जिद के अंदर मौजूद कट्टरपंथी इस्लामी छात्रों को चेतावनी दी है कि यदि वे आत्मसमर्पण नहीं करेंगे तो वे कार्रवाई में मारे जाएँगे. राष्ट्रपति मुशर्रफ़ ने सरकारी टीवी पर कहा कि यदि ये छात्र लाल मस्जिद को नहीं छोड़ते तो उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई होगी. इस्लामाबाद के बीचोंबीच स्थित लाल मस्जिद इलाक़े और उससे जुड़े मदरसे के आसपास पुलिस और कट्टरपंथियों के बीच पिछले पाँच दिनों से टकराव चल रहा है. इससे पहले पुलिस ने मदरसे की इमारत पर अपना कब्ज़ा जमा लिया था. दोनो ओर से हुई अब तक की कार्रवाई में 21 लोग मारे गए हैं. 'मरना पसंद करुँगा' लाल मस्जिद के आसपास हो रही गोलीबारी के कारण धार्मिक और संसदीय नेताओं का एक प्रतिनिधिमंडल लाल मस्जिद परिसर में दाख़िल नहीं हो पाया. यह प्रतिनिधिमंडल छात्रों के नेता और मस्जिद के मौलवी अब्दुल रशीद ग़ाजी से बातचीत करने की उम्मीद से वहाँ गया था. गाज़ी का कहना है कि मस्जिद में लगभग 1800 लोग मौजूद हैं.
उन्होंने कहा है कि वे गिरफ़्तार होने की जगह मरना पसंद करेंगे. बिजली कटी, खाद्य पदार्थों की कमी शुक्रवार रात को भी लाल मस्जिद के बाहर गोलीबारी और धमाके हुए. शुक्रवार देर रात को दो बड़े धमाके हुए जो करीब आठ किलोमीटर तक सुने जा सकते थे. धमाके के बाद आस-पास मलबा पड़ा हुआ दिखाई दिया. मस्जिद में अभी भी सैकड़ों लोग मौजूद हैं जिसमें बच्चे भी शामिल हैं, चाहे एक हज़ार से ज़्यादा लोग मस्जिद से बाहर आ चुके हैं. मस्जिद की बिजली और पानी की सप्लाई काट दी गई है. बताया जा रहा है कि वहाँ खाने की भी कमी होने लगी है. शुक्रवार को कुछ छात्रों ने मस्जिद से बाहर निकलने की कोशिश की थी जिसके बाद करीब आधे घंटे तक सैन्य कार्रवाई चली. इसमें दो छात्रों की मौत हो गई और 10 लोग घायल हो गए. बीबीसी संवाददाता का कहना है कि सरकार लाल मस्जिद के अंदर मौजूद लोगों पर मानसिक दबाव बनाने की कोशिश कर रही है. |
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