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कट्टरपंथियों की कोई शर्त मंज़ूर नहीं | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पाकिस्तान सरकार ने इस्लामाबाद की लाल मस्जिद के भीतर छिपे कट्टपंथी छात्रों की उन माँगों को मानने से इनकार कर दिया है जो उन्होंने आत्मसमर्पण के लिए रखी थीं. उन लोगों का कहना था कि वे आत्मसमर्पण के लिए तैयार हैं बशर्ते सरकार यह आश्वासन दे कि वह मस्जिद के भीतर घुसकर कोई कार्रवाई नहीं करेगी. कट्टरपंथियों के नेता अब्दुल राशिद ग़ाज़ी ने सरकार से अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा की गारंटी माँगी है. पाकिस्तान सरकार ने सभी माँगो को ठुकराते हुए कहा है कि कट्टरपंथी महिलाओं और बच्चों को मानव कवच के रुप में इस्तेमाल कर रहे हैं. इस बीच मस्जिद के चारों ओर सेना और सुरक्षाबलों की घेरेबंदी जारी है. गुरुवार की सुबह सुरक्षाबलों ने कार्रवाई शुरु कर दी थी. और तब से बीच-बीच में गोलाबारी की आवाज़ें सुनाई पड़ती हैं. दो बड़े विस्फोटों से मस्जिद परिसर की दीवारों को नुक़सान पहुँचा है और मस्जिद का बड़ा हिस्सा धुँए से ढँक गया है. मस्जिद के प्रमुख मौलाना अब्दुल अज़ीज़ को बुधवार को बुर्क़ा पहनकर भाग निकलने की कोशिश करते हुए गिरफ़्तार किया गया था. लाल मस्जिद के हथियारबंद लोगों और सुरक्षा बलों के बीच तीन दिनों से चल रही झड़पों में अब तक 19 लोगों की मौत हो चुकी है. पाकिस्तानी सेना ने मस्जिद के बाहर का पूरा इलाक़ा सील कर दिया है और वहाँ सड़कों पर टैंक तैनात किए गए हैं. इस बीच दिनभर सेना के हेलिकॉप्टर लाल मस्जिद के ऊपर निगरानी रखते हुए उड़ान भरते रहे. आसपास के इलाक़ों में कर्फ़्यू लगा दिया गया है. सैकड़ों हैं भीतर प्रशासन का कहना है कि अब तक लगभग 1200 लोग आत्मसमर्पण कर चुके हैं. पाकिस्तान के गृहमंत्री आफ़ताब शेरपाओ का कहना है कि मस्जिद के भीतर अब भी तीन चार सौ लोग मौजूद हैं.
उनका कहना है कि यदि मस्जिद के भीतर से अब्दुल राशिद ग़ाज़ी की ओर से बातचीत का कोई प्रस्ताव अब आता भी है तो वह सरकार को मंज़ूर नहीं होगा. उन्होंने कहा, "इन ख़बरों में कोई सच्चाई नहीं है कि सरकार इस मसले को अभी भी बातचीत से सुलझाने के प्रयास कर रही है." कट्टरपंथियों का गढ़ मानी जाने वाली लाल मस्जिद के भीतर लड़कों और लड़कियों के दो मदरसे हैं. इस मस्जिद तक जाने वाले सभी रास्तों को अर्धसैनिक बलों ने बंद कर दिया है. उल्लेखनीय है कि लाल मस्जिद और प्रशासन के बीच लंबे अरसे से टकराव चलता रहा है, इस कट्टरपंथी मस्जिद के छात्र और उसके प्रबंधन से जुड़े लोगों की माँग रही है कि इस्लामाबाद में शरिया का़नून को पूरी तरह लागू कराया जाए. पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ की इस बात को लेकर निंदा होती रही है कि वे लाल मस्जिद के प्रशासन पर अंकुश नहीं लगा पा रहे हैं. |
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