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रविवार, 08 जुलाई, 2007 को 02:42 GMT तक के समाचार
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लाल मस्जिद: गोलीबारी में कमांडो की मौत
पाकिस्तानी सेना
पिछले छह दिनों के दौरान सेना ने कोई सीधी कार्रवाई नहीं की है
पाकिस्तान में लाल मस्जिद पर एक सैन्य अभियान की देखरेख कर रहे लेफ़्टिनेंट कर्नल हारून इस्लाम मस्जिद में छिपे कट्टरपंथियों के साथ हुई गोलीबारी में मारे गए हैं.

बीबीसी उर्दू सेवा को सेना प्रवक्ता की ओर से मिली जानकारी के मुताबिक हारून इस्लाम मस्जिद में छिपे कट्टरपंथियों की गोलीबारी में घायल हो गए थे. उन्हें उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया जहाँ उन्हें मृत घोषित कर दिया गया.

शनिवार की रात हुई इस गोलीबारी में एक अन्य सैनिक के घायल होने की भी ख़बर है.

सेना की ओर से मिली जानकारी के मुताबिक मारे गए सेना कमांडो लाल मस्जिद से महिलाओं और बच्चों को निकालने के लिए एक विशेष अभियान की देखरेख कर रहे थे. इस अभियान के तहत मस्जिद की दीवारों में विस्फोट करके रास्ते बनाए जा रहे थे ताकि अंदर फंसे बच्चों और महिलाओं को बाहर निकाला जा सके.

राजधानी इस्लामाबाद में लाल मस्जिद पर पिछले छह दिनों से कट्टरपंथियों के ख़िलाफ़ जारी सैन्य कार्रवाई के दौरान मारे गए लोगों में हारून इस्लाम अबतक के सबसे बड़े सैन्य अधिकारी हैं.

ग़ौरतलब है कि इस्लामाबाद के बीचोंबीच स्थित लाल मस्जिद इलाक़े और उससे जुड़े मदरसे के आसपास पुलिस और कट्टरपंथियों के बीच पिछले छह दिनों से टकराव चल रहा है.

इससे पहले पुलिस ने मदरसे की इमारत पर अपना कब्ज़ा जमा लिया था. दोनो ओर से हुई अब तक की कार्रवाई में 21 लोग मारे जा चुके हैं.

अल्टीमेटम

उधर इस गोलीबारी से कुछ देर पहले पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने इस्लामाबाद की लाल मस्जिद के अंदर मौजूद कट्टरपंथी इस्लामी छात्रों को चेतावनी दी थी कि यदि वे आत्मसमर्पण नहीं करेंगे तो सैन्य कार्रवाई में मारे जाएँगे.

लाल मस्जिद
अभी तक हज़ार से भी ज़्यादा लोगों को बाहर निकाला जा चुका है

राष्ट्रपति मुशर्रफ़ ने सरकारी टीवी पर कहा कि यदि ये छात्र लाल मस्जिद को नहीं छोड़ते तो उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई होगी.

इसपर प्रतिक्रिया देते हुए मस्जिद के मौलवी अब्दुल रशीद ग़ाजी ने कहा है कि मस्जिद के अंदर स्थित लोग सेना के आगे घुटने टेकने के बजाए मरना पसंद करेंगे.

उन्होंने कहा कि वे इस मसले का शांतिपूर्ण हल चाहते हैं और वो नहीं चाहते हैं कि इस्लामाबाद के हालात भी बग़दाद जैसे हो जाएं.

मस्जिद की ओर से यह भी बताया गया कि अपने बचाव और सैन्य कार्रवाई से निपटने के लिए सबसे आगे युवा छात्रों को मोर्चे पर लगाया गया है. इसके पीछे कुछ छात्राओं का दस्ता है.

इस बीच लाल मस्जिद के आसपास हो रही गोलीबारी के कारण धार्मिक और संसदीय नेताओं का एक प्रतिनिधिमंडल लाल मस्जिद परिसर में दाख़िल नहीं हो पाया.

यह प्रतिनिधिमंडल छात्रों के नेता और मस्जिद के मौलवी अब्दुल रशीद ग़ाजी से बातचीत करने की उम्मीद से वहाँ गए थे.

चिंता

लाल मस्जिद
सेना की सीधी कार्रवाई हुई तो कई लोगों की मौत हो सकती है

मस्जिद के मौलवी अब्दुल रशीद ग़ाजी के मुताबिक मस्जिद में लगभग 1800 लोग मौजूद हैं. इनमें बच्चे भी शामिल हैं. हालांकि एक हज़ार से ज़्यादा लोग मस्जिद से बाहर आ चुके हैं.

मस्जिद की बिजली और पानी की सप्लाई काट दी गई है. बताया जा रहा है कि वहाँ खाने की भी कमी होने लगी है.

बीबीसी संवाददाता का कहना है कि सरकार लाल मस्जिद के अंदर मौजूद लोगों पर मानसिक दबाव बनाने की कोशिश कर रही है.

जानकारों का मानना है कि अभी तक कोई सीधी कार्रवाई न करके राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने देशभर में माहौल को अपने पक्ष में कर लिया है. वहीं इस बात को लेकर चिंता भी व्यक्त की जा रही है कि अगर सेना प्रभावी हमला करती है तो बड़ी तादाद में लोग मारे जा सकते हैं.

स्थानीय पत्रकारों का मानना है कि लोग भी अब राष्ट्रपति मुशर्रफ़ के पक्ष में नज़र आ रहे हैं और आम जनमानस का कहना है कि आसपास के लोग भी कर्फ्यू के चलते बहुत तकलीफ़ उठा रहे हैं इसलिए सेना को अब अंतिम फैसला ले लेना चाहिए.

लाल मस्जिद के छात्रलाल मस्जिद का महत्व
लाल मस्जिद का मुस्लिम कट्टरपंथ से नाता करीब एक दशक पुराना है.
लाल मस्जिदहमारे बच्चों को बचाओ
लाल मस्जिद के अंदर मौजूद बच्चों के माता पिता बेहद घबराए हुए हैं.
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