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बीमारी नहीं बन सकी बाधा | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
मुंबई के पनवेल में रहने वाले भूषण कुलकर्णी ने बारहवीं की बोर्ड परीक्षा में 83 प्रतिशत अंक लाकर अपनी मेहनत और लगन का परिचय दिया है. इससे पहले भी दसवीं की परीक्षा में 86 प्रतिशत अंक लाकर विकलांग वर्ग में दूसरा स्थान पाने वाले भूषण का आत्मविश्वास देखते ही बनता है. वैसे तो 85-90 प्रतिशत तक अंक लाना कोई ख़ास बात नहीं है लेकिन भूषण कुलकर्णी उन लोगों के लिए मिसाल हैं जो किसी तरह के शारीरिक विकलांगता के शिकार हैं. मस्कुलर डिस्ट्रॉफ़ी की लाइलाज बीमारी से पीड़ित भूषण आठवीं के बाद कभी स्कूल नहीं गए उसके बाद इतने अच्छे नंबर लाना वाक़ई कमाल की बात है जबकि उन्होंने कभी ट्यूशन का सहारा नहीं लिया. इतने अच्छे नंबर पाने की वजह बताते हुए भूषण कहते हैं, “मैं ज़्यादा पढ़ सकता हूँ पर एक साथ आधे घंटे से ज़्यादा नहीं लिख सकता. मेरे पापा और मम्मी ने मेरी बहुत मदद की है. इकोनॉमिक्स पापा पढ़ाते थे तो मैं अपनी पढ़ाई ख़त्म करके मम्मी को पढ़ा हुआ सुनाता था. मम्मी ने मुझे टीचर की तरह पढ़ाया और मेरी हर छोटी चीज़ का ख़याल रखा है.” आम तौर पर अपनी पढ़ाई का वे कोई टाइम-टेबल नहीं बनाते हैं लेकिन दिन में कम से कम सात घंटा पढ़ाई करना उनका मक़सद होता है. बारहवीं की परीक्षा उन्होंने एक राइटर की मदद से दी थी. छिन गया बचपन शुरू में सब कुछ ठीक-ठाक था और भूषण भी आम बच्चों की तरह ही रोज़ स्कूल जाता था. भूषण की माँ भावना कुलकर्णी कहती हैं, “एक दिन मैं रोज़ की तरह इसे स्कूल छोड़ने जा रही थी और ये अचानक ही सड़क पर गिर गया. चेकअप करवाने के बाद पता चला कि उसे मस्कुलर डिस्ट्रॉफी नामक की एक ऐसी बीमारी है जिसका इलाज़ नहीं है”. इसके साथ ही उन्हें डॉक्टर ने यह भी बताया कि इस बीमारी के कारण जैसे-जैसे भूषण की उम्र बढ़ेगी उसके शरीर की ताक़त कम होती जाएगी. भावना कहती हैं, “कभी-कभी मुश्किल तो बहुत होती है लेकिन इसकी हिम्मत और मेहनत देखकर मुझे बहुत अच्छा लगता है और सब भूल जाती हूँ. मैं ऐसे बच्चे के हर माँ-बाप से यही कहना चाहती हूँ कि इन्हें कभी बोझ न समझें, इन पर भरोसा करें और इनकी मदद करें फिर देखें कि ये कैसे निखरते हैं”. भावना सुबह उठकर भूषण के सारे काम करती हैं उन्हें नहलाने से लेकर नाश्ता कराने तक सब कुछ. इन सब में लगभग आधा दिन बीत जाता है. वे कहती हैं “वैसे ये ज़्यादा परेशान नहीं करता है लेकिन इसे व्यस्त रखने के लिए मुझे हमेशा इसे उलझाए रखना पड़ता है नहीं तो ये चिड़चिड़ा हो जाता है.” भविष्य आगे की पढ़ाई के बारे में भूषण कहते हैं, “मैं तो बहुत कुछ करना चाहता हूँ लेकिन शायद मैं करने लायक नहीं हूँ लेकिन अगर शरीर ने साथ दिया तो मैं मराठी में पीएचडी करने की सोच रहा हूँ.”
उम्र के साथ भूषण का शरीर कमज़ोर होता जा रहा है, भूषण कहते हैं, “जब मैं अपना आत्मविश्वास खोने लगता हूँ और ज़िंदगी से ऊब जाता हूँ तो मैं अपने फैमिली डॉक्टर से बात करता हूँ और वे मेरी बहुत मदद करते हैं.” बचपन से ही भूषण का पसंदीदा विषय मराठी साहित्य और इतिहास रहा है. इन्हें पढ़ने का बहुत शौक़ है. कोर्स की किताबों के अलावा जासूसी कहानियों की किताबें ख़ास तौर पर पसंद है. हैरी पॉटर की पूरी सीरिज़ ये पढ़ चुके हैं. पढ़ने के अलावा उन्हें क्रिकेट देखना, शतरंज खेलना और गाने सुनना पसंद है. समय मिलने पर कंप्यूटर पर गेम खेलना भूषण की ख़ास पसंद है और उन्हें रोड रेसर गेम बहुत अच्छा लगता है, वे कहते हैं, “मम्मी मुझे कंप्यूटर एडजस्ट करके दे देती हैं बस, बाकी सब मुझे पता है.” इस्पात कंपनी में एकाउंट ऑफिसर की नौकरी करने वाले भूषण के पिताजी भालचंद कुलकर्णी कहते हैं, “हम सिर्फ यही चाहते हैं कि ये जो भी करे अच्छे से करे और अपने मन से करे. ये जो भी फैसला लेता है बहुत सही लेता है. हमें इसकी काबिलियत पर पूरा भरोसा है. मैं रोज़ शाम को दफ़्तर से घर जल्दी आता हूँ ताकि मैं इसके साथ कुछ समय बिता सकूँ और पढ़ा सकूँ.” | इससे जुड़ी ख़बरें अखबार वाला वो लड़का!27 जुलाई, 2006 | भारत और पड़ोस विकलांग भी शामिल हैं दांडी यात्रा में 18 मार्च, 2005 | भारत और पड़ोस संगीत बना पढ़ाई का ज़रिया25 जुलाई, 2006 | भारत और पड़ोस मूक-बधिरों की भाषा में भी चलता है बैंक17 जून, 2006 | भारत और पड़ोस हौसले से चलती है अब्दुल की टैक्सी03 नवंबर, 2006 | भारत और पड़ोस गोवा पढ़ाई लिखाई में आगे | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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