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मुशर्रफ़ ने मीडिया पर लगाम कसी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने देश में रेडियो और टेलीविज़न पर नियंत्रण के लिए कड़े नियमों को मंज़ूरी दी है. मीडिया संगठनों का कहना है कि राष्ट्रपति मुशर्रफ़ लगातार बढ़ते राजनीतिक संकट के बीच विरोधी स्वर को दबाना चाहते हैं. इसके विरोध में पत्रकारों ने प्रदर्शन भी किया है. पाकिस्तान में सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश इफ़्तिख़ार मोहम्मद चौधरी को निलंबित किए जाने के बाद से ही राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ विवादों में घिरे हैं. पाकिस्तान की सरकार पहले ही यह कह चुकी है कि वह किसी भी घटना के सीधे प्रसारण को रोकने के लिए क़ानून लाएगी. लेकिन अब राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने एक अध्यादेश को मंज़ूरी दी है जिसके तहत मीडिया पर नियंत्रण के लिए व्यापक अधिकार दिए गए हैं. इस अध्यादेश के मुताबिक़ पाकिस्तान इलेक्ट्रॉनिक मीडिया नियामक प्राधिकरण को और अधिकार मिल गए हैं. अब प्राधिकरण किसी भी मीडिया संगठन के उपकरण ज़ब्त कर सकता है, ऑफ़िस को सील करता है और यहाँ तक कि उसका लाइसेंस भी रद्द कर सकता है. नियम
ये नियम टेलीविज़न के अलावा इंटरनेट पर जारी वीडियो और मोबाइल फ़ोन पर भी लागू होंगे. सरकार की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि जब ज़रूरी समझा जाएगा, इसके आधार पर कार्रवाई होगी. प्रसारक और केबल डिस्ट्रीब्यूटरों पर भी इस क़ानून की गाज गिर सकती है. इस अध्यादेश में विदेशी ग़ैर सरकारी संगठनों को भी नियमों के दायरे में लाया गया है. लेकिन इस्लामाबाद से बीबीसी संवाददाता बारबारा प्लेट का कहना है कि यह स्पष्ट नहीं है कि व्यवहारिक रूप में इसका क्या मतलब होगा. उनका कहना है कि पाकिस्तान की सरकार निलंबित मुख्य न्यायाधीश इफ़्तिख़ार चौधरी के मामले में मीडिया कवरेज़ से नाराज़ थी और उसने इसे ग़ैर ज़िम्मेदार बताया था. सरकार ख़ासकर उन भाषणों और नारों से नाराज़ थी, जो सेना के ख़िलाफ़ हैं. कई प्राइवेट न्यूज़ चैनलों ने इफ़्तिख़ार चौधरी की रैलियों का सीधा प्रसारण दिखाया था. टेलीविज़न के अधिकारी पहले ही इसकी शिकायत कर चुके हैं कि उनके प्रसारणों को रोका जा रहा है. चिंता जानकारों का कहना है कि सरकार विरोधी स्वर को मिल रहे व्यापक कवरेज़ के कारण सरकार चिंतित है. आज टीवी के डायरेक्टर न्यूज़ तलत हुसैन ने बीबीसी को बताया कि सरकार हताश हो रही है.
उन्होंने राष्ट्रपति मुशर्रफ़ की इस बात के लिए आलोचना की कि संसद के सत्र में ना रहते हुए भी उन्होंने इस अध्यादेश को मंज़ूरी दी है. उन्होंने कहा, "ये प्रताड़ित करने वाला क़ानून है. ये स्पष्ट है कि सरकार उन तस्वीरों को टीवी पर नहीं देखना चाहती जो उसकी नीतियों के ख़िलाफ़ हैं." मार्च में राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने अपने पद के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए मुख्य न्यायाधीश इफ़्तिख़ार मोहम्मद चौधरी को निलंबित कर दिया था. इसके बाद से ही वे टीवी चैनलों की खुलेआम आलोचना कर रहे हैं. हाल ही में उन्होंने कहा था कि सरकार को बदनाम करने के लिए अभियान चलाया जा रहा है. जबकि शुक्रवार को दो टीवी चैनलों का प्रसारण रोक दिया गया क्योंकि कथित रूप से उन्होंने सेना और न्यायपालिका की आलोचना की थी. |
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