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'फौजी वर्दी तो मेरी खाल का हिस्सा है' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ का कहना है कि वे फौजी वर्दी और राष्ट्रपति के पद में से एक चुनने के बारे में कोई फ़ैसला अपनी मर्ज़ी से करेंगे और पाकिस्तान में चुनाव होने के बाद इस मुद्दे पर सोचेंगे. बीबीसी उर्दू सेवा की नईमा अहमद से एक ख़ास मुलाक़ात में उनसे पूछा कि उनके पास दो विकल्प हैं, उनमें से किसे चुनेंगे, तो उन्होंने कहा, "विकल्प दो नहीं, बहुत सारे हैं, अभी चुनाव होने दीजिए, उसके बाद इन सवालों पर विचार करने का मौक़ा आएगा." वर्दी उतारने के सवाल पर उन्होंने कहा, "यूनिफॉर्म में कोई आदमी हमेशा नहीं रह सकता, इसमें मुझे कोई शक नहीं है लेकिन यह कब करना है इसके बारे में ज़रा सोचना है." उन्होंने कहा कि उनके राष्ट्रपति और सेना प्रमुख रहने के कई फ़ायदे देश के लिए हैं, उन्होंने उदाहरण दिया कि वज़ीरिस्तान में जो सैनिक कार्रवाई हो रही है या पाकिस्तान के तालिबानीकरण को रोकने के लिए जो कुछ किया जा रहा है वह सब नहीं हो पाता. जब उनसे पूछा गया कि वे किस पोशाक को अधिक पसंद करते हैं तो उन्होंने कहा, "फौजी वर्दी तो मेरी खाल का हिस्सा बन गई है, 40-45 साल में यह मेरे शरीर से जुड़ गया है, मैं जो भी इसी वर्दी की वजह से हूँ." उन्होंने कहा कि नेशनल एसेंबली और संविधान के मुताबिक़ वे इस वर्ष के अंत तक दोनों पदों पर रह सकते हैं, मुशर्रफ़ ने कहा, "मैंने नेशनल एसेंबली और संविधान का उल्लंघन नहीं करूँगा, अब सवाल है कि मेरे पास ऑप्शन क्या हैं, तो एक-दो नहीं, कई ऑप्शन हैं." विपक्ष देश में विपक्ष के एकजुट होने की उन्हें कोई परवाह नहीं है क्योंकि उनका विरोध करने वाले लोगों को जनता का समर्थन हासिल नहीं है. उन्होंने कहा कि निलंबित मुख्य न्यायाधीश इफ्तेख़ार चौधरी के मामले में वे सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले का सम्मान करेंगे. जब उनसे पूछा गया कि अगर फ़ैसला इफ़्तेख़ार चौधरी के पक्ष में हुआ तो क्या वे कोई क़दम नहीं उठाएँगे, इसके जवाब में उन्होंने कहा, "सुप्रीम कोर्ट सबसे बड़ी अथॉरिटी है और उसका फ़ैसला सबको मानना चाहिए, मैं भी मानूँगा." जब उनसे पूछा गया कि क्या वे लोकतंत्र में विश्वास रखते हैं तो उन्होंने कहा, "बिल्कुल रखता हूँ. ये जम्हूरियत ही तो है न जो यह सब क्रिएट कर रही है." अगर वे लोकतंत्र में विश्वास करते हैं तो फिर नवाज़ शरीफ़ और बेनज़ीर भुट्टो को देश में क्यों नहीं आने दे रहे, इसके जवाब में उन्होंने कहा कि "ऑपोज़ीशन एक बंदे या एक बंदी से नहीं होता, उनकी पूरी पॉलिटिकल पार्टी है, पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज़) भी है और पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी भी, वे तो राजनीति कर ही रहे हैं, दिन रात कर रहे हैं. वही तो माहौल ख़राब कर रहे हैं." परवेज़ मुशर्रफ़ ने दोहराया कि बेनज़ीर भुट्टो और नवाज़ शरीफ़ के बारे में उनकी नीति बहुत स्पष्ट है. वे पहले ही घोषणा कर चुके हैं कि दोनों पूर्व प्रधानमंत्रियों को पाकिस्तान लौटने की अनुमति नहीं दी जाएगी. पाकिस्तानी राष्ट्रपति ने कहा है कि "यह चुनाव का साल है और इस साल चुनाव होंगे और देश की जनता फ़ैसला करेगी." | इससे जुड़ी ख़बरें पाकिस्तान में हिंसा के विरोध में हड़ताल14 मई, 2007 | भारत और पड़ोस इफ़्तिख़ार मामले में 'अहम गवाह' की हत्या14 मई, 2007 | भारत और पड़ोस कराची में 34 मारे गए, चौधरी लौटे12 मई, 2007 | भारत और पड़ोस बेनज़ीर का स्वदेश वापसी का इरादा28 अप्रैल, 2007 | भारत और पड़ोस बेनज़ीर-नवाज़ भी इफ़्तिख़ार के समर्थन में22 मार्च, 2007 | भारत और पड़ोस बेनज़ीर और नवाज़ साझा मोर्चे पर सहमत14 मई, 2006 | भारत और पड़ोस 'मुशर्रफ़ 31 जुलाई तक सत्ता छोड़ दें'02 जुलाई, 2006 | भारत और पड़ोस बेनज़ीर भ्रष्टाचार के मामले में बरी30 नवंबर, 2005 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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