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गुरुवार, 31 मई, 2007 को 18:11 GMT तक के समाचार
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पाकिस्तानी लेखिका के निशाने पर सेना
आयशा सिद्दीक़ा
आयशा सिद्दीक़ा ने सेना के कारोबार का विस्तृत ब्योरा दिया है
पाकिस्तानी लेखिका आयशा सिद्दीक़ा ने सेना और अर्थव्यवस्था पर लिखी अपनी किताब को जारी होने देने में बाधा डालने के लिए सरकार की आलोचना की है.

आयशा सिद्दीक़ा का कहना था कि सरकार की देखरेख में चलनेवाले एक क्लब में उनकी किताब के विमोचन का कार्यक्रम था लेकिन आख़िरी वक्त में उनकी बुकिंग रद्द कर दी गई.

उनका आरोप है कि गृह मंत्रालय ने इस्लामाबाद के होटलों से कहा कि उन्हें स्थान नहीं दिया जाए.

इसकी वजह से उन्हें अपनी किताब को अन्य स्थान पर जारी करना पड़ा.

अपनी किताब में आयशा ने कहा है कि सैनिक शासन करोड़ों डॉलर खर्च करता है लेकिन उसमें कोई पारदर्शिता और जवाबदेही नहीं है.

लेखिका का कहना है कि सेना के अधीन सैकड़ों छोटे बड़े उद्योग धंधे हैं और लाखों एकड़ जमीन है.

इस्लामाबाद स्थित बीबीसी संवाददाता का कहना है कि यह पहला मौक़ा है कि पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था में सेना की भूमिका का इतने विस्तार से विवरण दिया गया है.

यह किताब ऐसे समय में प्रकाशित हुई है जब पाकिस्तान में सैन्य शासन के लिए मुश्किलों का दौर चल रहा है.

राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ के मुख्य न्यायाधीश इफ़्तिख़ार चौधरी को निलंबित किए जाने के बाद से ग़ैर सैनिक शासन और लोकतंत्र के लिए आंदोलन ज़ोर पकड़ता जा रहा है.

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