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ऐसा सेंटर जहाँ कॉल करते हैं 'नेत्रहीन' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत के मुंबई शहर में एक कॉल सेंटर ऐसा है, जहाँ सभी कर्मचारी नेत्रहीन हैं, लेकिन उनकी बातों से ये आभास तक नहीं मिलता कि वो दुनिया देख नहीं सकते. नेशनल एसोसिएशन फ़ॉर ब्लाइंड (एनएबी) के प्रयासों से खुले 'दृष्टि' नामक कॉल सेंटर में कुल 10 नेत्रहीन काम करते हैं, जिसमें छह पुरुष और चार महिलाएँ हैं. दरअसल, आउटसोर्सिंग उद्योग ने भारत की अर्थव्यवस्था में उछाल में अहम भूमिका निभाई है. देश के युवाओं के पास अब नौकरी के कई विकल्प हैं और उनकी जेब पहले से अधिक भरी हुई है. अर्थव्यवस्था की रफ़्तार बढ़ाने में नेत्रहीन भी पीछे नहीं रहना चाहते और ख़ास उनके लिए मुंबई में एक कॉल सेंटर खोला गया है. मुंबई का यह ‘अनोखा’ कॉल सेंटर एक निजी टेलीफोन कंपनी संचालित करती है. पहला प्रयास एसोसिएशन ने बेंगलौर में पहला ऐसा कॉल सेंटर शुरू किया था और इसकी सफलता के बाद मुंबई में यह प्रयास किया गया है. यहाँ काम करने वाले कर्मचारियों को हर कॉल के तीन रुपए मिलते हैं और हर कर्मचारी दिन भर में औसतन 100 कॉल करता है. इस कॉल सेंटर में काम करने वाली 23 वर्षीय निकिता पाटिल भी हर दिन लगभग 100 लोगों को फोन करती हैं और घरेलू टेलीफोन कंपनी के उत्पाद और सेवाओं को उन्हें बेचने की कोशिश करती हैं. वह हर महीने लगभग नौ हज़ार रुपए कमा लेती हैं. हुनर ख़ास बात ये है कि जिन उपभोक्ताओं को वह फोन करती हैं उन्हें ये भनक भी नहीं लग पाती कि निकिता नेत्रहीन हैं. निकिता ने बीबीसी से कहा, “ये काम थोड़ा मुश्किल है, क्योंकि हर बार अलग उपभोक्ता होता है और हम वही. कुछ उपभोक्ता तो बहुत रुखे और उजड्ड होते हैं और अक्सर मुझे समझ में नहीं आता कि उनसे कैसे बात की जाए, लेकिन कुछ लोग बहुत अच्छे तरीक़े से बात करते हैं.” एनएबी के रोजगार विभाग की निदेशक पल्लवी कदम का कहना है कि आउटसोर्सिंग व्यवसाय ने नेत्रहीनों के लिए रोजगार के कई विकल्प खोले हैं. वो कहती हैं, “मैं कहूँगी कि नेत्रहीन लोगों की याददाश्त बहुत अच्छी होती है. उनकी सुनने और बोलने की क्षमता औरों के मुक़ाबले बेहतर होती है और इस बाज़ार के लिए ये खूबियाँ बेहद ज़रूरी हैं. नेत्रहीन पहले से ही मेडिकल ट्रांसक्रिप्शन, लीगल और बिज़नेस ट्रांसक्रिप्शन के काम कर रहे हैं.” मदद उनका कहना है कि एसोसिएशन बातचीत की शैली और उनका व्यक्तित्व सुधारने में मदद करती है, ताकि वे इस काम को बेहतर तरीक़े से कर सकें. दृष्टि कॉल सेंटर एनएबी दफ़्तर के एक बड़े कमरे में खोला गया है. वैसे कॉल सेंटर में काम करने वाला व्यक्ति कंप्यूटर स्क्रीन पर उपलब्ध सूचनाओं के माध्यम से उपभोक्ता से बात करता है, लेकिन दृष्टि कॉल सेंटर में इस मुश्किल का हल भी निकाल लिया गया है. बेंगलौर की एक कंपनी ने इस कॉल सेंटर के लिए ऐसा सॉफ्टवेयर तैयार किया है जो टैक्स्ट डेटा को वॉयस फ़ॉर्मेट में बदल देता है. | इससे जुड़ी ख़बरें साइबर अपराध पर बोले मनमोहन29 जून, 2005 | कारोबार विप्रो के आउटसोर्सिंग प्रमुख का इस्तीफ़ा30 जून, 2005 | कारोबार अवीवा 1000 नौकरियाँ भारत ले जाएगी14 सितंबर, 2006 | कारोबार 'आउटसोर्सिंग' की चमक अब छोटे शहरों में30 मार्च, 2007 | कारोबार बिहार में कॉल सेंटर से मिलेगी 'जानकारी'28 जनवरी, 2007 | भारत और पड़ोस भूखे को मिलेगा मुफ़्त खाना26 सितंबर, 2006 | भारत और पड़ोस बंगलौर में बढ़ रही है सुरक्षा की चिंता17 फ़रवरी, 2006 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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