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मुख्यमंत्री शीला दीक्षित विवादों से घिरीं | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
दिल्ली पर बढ़ते दबाव के लिए उत्तर प्रदेश और बिहार से आकर बसनेवाले लोगों को ज़िम्मेदार ठहराए जाने संबंधी मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के कथित बयान को लेकर विवाद उत्पन्न हो गया है. शीला दीक्षित ने दिल्ली में आयोजित एक समारोह के दौरान कहा कि दिल्ली एक संपन्न राज्य है और यहाँ जीवनयापन के लिए बाहर से और विशेषकर उत्तर प्रदेश तथा बिहार से बड़ी संख्या में लोग आते है और यहीं बस जाते हैं. ख़बरों के अनुसार मुख्यमंत्री ने कहा था कि दिल्ली में हर वर्ष लगभग पांच लाख लोग अन्य राज्यों से आकर बसते हैं, जिसकी वजह से मूलभूत सुविधाओं को उपलब्ध कराना चुनौती बन गया है. उनके इस बयान पर राजनीति गर्मा गई है और उनकी पार्टी कांग्रेस के कुछ नेताओं सहित विपक्षी नेताओं ने उनके बयान की कड़ी आलोचना की है. बाद में शीला दीक्षित ने सफ़ाई दी और कहा कि उन्होंने उत्तर प्रदेश और बिहार लोगों के प्रति कुछ नहीं कहा है. शीला दीक्षित ने कहा है,'' मेरा इरादा किसी भी राज्य के लोगों की भावनाओं को आहत करना नहीं था, मैं तो स्वयं उत्तर प्रदेश की हूं और मैं ऐसा कैसे सोच सकती हूं.'' दिल्ली से कांग्रेस के विधायक महाबल मिश्रा ने बयान पर आपत्ति जताई और कहा कि पूर्वांचल के लोगों का दिल्ली के आर्थिक और सामाजिक विकास में ख़ासा योगदान हैं. भाजपा नेता विजय कुमार मल्होत्रा ने दिल्ली की मुख्यमंत्री की टिप्पणी को दुर्भाग्यपूर्ण बताया है. दिल्ली भाजपा अध्यक्ष हर्षवर्धन ने मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के कथित बयान पर कड़ी आपत्ति जताते हुए उनसे बयान वापस लेने और माफ़ी माँगने को कहा है. |
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