|
'ईरान पर भारत के विकल्प खुले हैं' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत ने कहा है कि उसने किसी भी देश के साथ अपने ऊर्जा संबंधों के बारे में फ़ैसला लेने का विकल्प खुला रखा है और इस बारे में अमरीका को भी सूचित कर दिया गया है. भारत के विदेश मंत्री प्रणब मुखर्जी ने ईरान, पाकिस्तान और भारत के साथ बिछाई जाने वाली गैस पाइप लाइन के बारे में राज्य सभा में बुधवार को पूछे गए एक सवाल के जवाब में यह बात कही. प्रणब मुखर्जी ने कहा कि अमरीका के ऊर्जा मंत्री सैमुअल बोडमैन और भारत के तेल और प्राकृतिक गैस मंत्री के बीच मुलाक़ात में इस पाइपलाइन के मुद्दे पर भी बातचीत हुई. उन्होंने कहा कि इस बातचीत में बोडमैन को सूचित कर दिया गया कि भारत किसी भी देश के साथ अपने ऊर्जा संबंध बनाने और क़ायम रखने के बारे में फ़ैसला लेने के लिए स्वतंत्र है. इस तरह की ख़बरें आई थीं कि अमरीका ने ईरान-पाकिस्तान और भारत के बीच बिछने वाली गैस पाइपलाइन पर कुछ चिंता जताई थी क्योंकि ईरान के साथ भारत के ऊर्जा संबंधों से भारत-अमरीका के बीच परमाणु सहयोग सहमति पर भी असर पड़ सकता है. अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने परमाणु समझौते के संबंध में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से सोमवार शाम को टेलीफ़ोन पर बातचीत की थी जिसमें उन्होंने द्विपक्षीय सहयोग और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर विचार-विमर्श किया. राष्ट्रपति बुश ने मनमोहन सिंह को फिर अमरीका आने का न्योता दिया, जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया. लेकिन इस यात्रा की तारीख़ बाद में तय की जाएगी. उल्लेखनीय है कि परमाणु समझौते को लेकर पिछले कुछ दिनों से काफ़ी सरगर्मी चल रही है. कुछ अमरीकी सांसदों के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को इस संबंध में पत्र लिखने को लेकर संसद में भी तीखे सवाल उठे हैं. अमरीकी सांसदों ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को पत्र लिखकर आगाह किया है कि ईरान के साथ भारत के अच्छे संबंधों से अमरीका के साथ परमाणु सहयोग सहमति पर असर पड़ सकता है. यह पत्र इसलिए बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि इस पर जिन सांसदों ने हस्तक्षर किए हैं उनमें डेमोक्रेटिक और रिपब्लिकन दोनों ही पार्टियों के सदस्य हैं और कई महत्वपूर्ण पैनलों के नेता भी हैं जो परमाणु सहयोग समझौते से संबंधित हैं. | इससे जुड़ी ख़बरें बुश-मनमोहन की परमाणु मुद्दे पर बात07 मई, 2007 | भारत और पड़ोस 'परमाणु समझौते पर उल्लेखनीय प्रगति'02 मई, 2007 | भारत और पड़ोस परमाणु सौदे पर भारत के तेवर कड़े18 मार्च, 2007 | भारत और पड़ोस परमाणु करार पर बुश-मनमोहन की चर्चा21 दिसंबर, 2006 | भारत और पड़ोस परमाणु सहमति भारत के हित में?22 अगस्त, 2006 | भारत और पड़ोस 'नई शर्तें स्वीकार नहीं करेगा भारत'26 जुलाई, 2006 | भारत और पड़ोस 'सामरिक कार्यक्रम पर कोई अंकुश नहीं'07 मार्च, 2006 | भारत और पड़ोस भारत-अमरीका सहमति ऐतिहासिक क्यों?02 मार्च, 2006 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
| |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||