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बारहवीं शताब्दी में बुद्ध के भित्ति-चित्र | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
नेपाल में काठमांडू के उत्तर-पश्चिम में स्थित मुस्तांग की एक गुफ़ा से महात्मा बुद्ध के 12वीं शताब्दी के भित्ति-चित्र यानि दीवार पर की गई पेंटिंग्स मिली हैं. इन्हें बुद्ध से जुड़ी कलाकृतियों की श्रृखंला में काफ़ी महत्वपूर्ण माना जा रहा है. खोजकर्ताओं को इन भित्ति-चित्रों के बारे में एक स्थानीय गड़रिए से जानकारी मिली थी. इसके बाद उन्होंने एक दीवार के 55 पैनलों पर बने इन भित्ति-चित्रों को खोज निकाला जो बुद्ध की जीवनी बता रहे थे. इस दीवार को टीम ने मार्च में ही खोज निकाला था लेकिन उस तक पहुँचने के लिए उन्हें ख़ासी मेहनत करनी पड़ी. टीम को बर्फ़ काटकर गुफ़ा तक पहुँचने का रास्ता बनाना पड़ा. पांडुलिपियाँ भी मिलीं
अमरीकी लेखक ब्रॉटन कोबर्न ने समाचार एजेंसी एपी को बताया, ''हमें जो भित्ति-चित्र मिले हैं उनका सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत के रूप में काफ़ी महत्व है. ये चित्रकारी 12वीं शताब्दी या उससे पहले की है.'' इस खोज टीम में नेपाल, इटली और अमरीका के फ़िल्म निर्माता, पर्वतारोही और पुरातत्व के जानकार थे. एक स्थानीय गड़रिए ने बात-बात में ही उन्हें बताया कि बहुत साल पहले जब वह बारिश से बचने के लिए एक गुफ़ा में घुसा तो वहाँ उसने ये भित्ति-चित्र देखे थे. मुख्य दीवार के अलावा भी कुछ और जगहों पर भी चित्र मिले हैं जिन्हें उससे भी पुराना माना जा रहा है. एक नज़दीक की गुफ़ा में ही तिब्बती भाषा में लिखीं पांडुलिपियां भी मिली हैं. खोज टीम ने अनुवाद कराने के लिए इसके फ़ोटोग्राफ़ ले लिए हैं. | इससे जुड़ी ख़बरें साष्टांग करता तीर्थयात्री29 जनवरी, 2007 | भारत और पड़ोस बिना पानी पिए महीनों से समाधि01 दिसंबर, 2005 | भारत और पड़ोस राजगीर का मलमास मेला21 अगस्त, 2004 | भारत और पड़ोस महाबोधि मंदिर अब विश्व विरासत19 फ़रवरी, 2004 | भारत और पड़ोस बौद्ध भिक्षुणियों का संघर्ष29 जनवरी, 2004 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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