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शनिवार, 21 अगस्त, 2004 को 20:41 GMT तक के समाचार
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राजगीर का मलमास मेला

राजगीर
ऐतिहासिक और धार्मिक नगरी है राजगीर
प्राचीन मगध साम्राज्य की राजधानी राजगृह का ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व है.

वसुमतिपुर, वृहद्रथपुर, गिरिब्रज और कुशग्रपुर के नाम से भी प्रसिद्ध रहे राजगृह को आजकल राजगीर के नाम से जाना जाता है.

पौराणिक साहित्य के अनुसार राजगीर बह्मा की पवित्र यज्ञ भूमि, संस्कृति और वैभव का केन्द्र तथा जैन तीर्थंकर महावीर और भगवान बुद्ध की साधनाभूमि रहा है.

इसका ज़िक्र ऋगवेद, अथर्ववेद, तैत्तिरीय पुराण, वायु पुराण, महाभारत, बाल्मीकि रामायण आदि में आता है.

जैनग्रंथ विविध तीर्थकल्प के अनुसार राजगीर जरासंध, श्रेणिक, बिम्बसार, कनिक आदि प्रसिद्ध शासकों का निवास स्थान था.

जरासंध ने यहीं श्रीकृष्ण को हराकर मथुरा से द्वारिका जाने को विवश किया था.

मलमास

बिहार के नालंदा ज़िले में स्थित राजगीर की पहचान मेलों के नगर के रूप में भी है. इनमें मकर और मलमास मेले प्रसिद्ध हैं.

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मेले के दौरान ब्रह्मकुंड में नहाने के लिए चार बजे सुबह से भीड़ जुट जाती है

शास्त्रों में मलमास तेरहवें मास के रूप में वर्णित है.

सनातन मत की ज्योतिषीय गणना के अनुसार तीन वर्ष में एक वर्ष 396 दिन का होता है. धार्मिक मान्यता है कि इस अतिरिक्त एक महीने को मलमास या अतिरिक्त मास या पुरूषोतम मास कहा जाता है.

ऐतरेय बह्मण के अनुसार यह मास अपवित्र माना गया है और अग्नि पुराण के अनुसार इस अवधि में मूर्ति पूजा–प्रतिष्ठा, यज्ञदान, व्रत, वेदपाठ, उपनयन, नामकरण आदि वर्जित है.

लेकिन इस अवधि में राजगीर सर्वाधिक पवित्र माना जाता है.

अग्नि पुराण एवं वायु पुराण आदि के अनुसार इस मलमास अवधि में सभी देवी देवता यहां आकर वास करते हैं.

राजगीर के मुख्य ब्रह्मकुंड के बारे में पौराणिक मान्यता है कि इसे ब्रह्माजी ने प्रकट किया था और मलमास में इस कुंड में स्नान का विशेष फल है.

ग्रामीण स्वरूप

राजगीर मलमास मेले में तीर्थयात्रियों के मनोरंजन के लिए तरह-तरह के झूले, सर्कस, आदि लगे होते हैं. थियेटरों में युवाओं की भीड देखते ही बनती है.

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मलमास मेले का स्वरूप पूरी तरह ग्रामीण है

लेकिन इसी सप्ताह संपन्न मलमास मेले के बारे में राजगीर बायपास निवासी केदार प्रसाद कहते हैं, "मेले में रोशनी, पेयजल, सुरक्षा और यात्रियों के ठहरने की पर्याप्त व्यवस्था नहीं की जाती है. यही कारण है मेले में भीड़ कम होते जाने का."

एक अन्य स्थानीय निवासी सुधीर कुमार कहते हैं, "मेले में लगे थियेटरों में अश्लीलता परोसी जाती है."

लेकिन नालंदा के जिलाधिकारी मिश्री प्रसाद पासवान इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहते हैं, "ऐसा प्रशासन से नाखुश लोगों का आरोप होगा. मेले में रोशनी, पेयजल, पंडाल, सुरक्षा आदि की पुख्ता व्यवस्था की जाती है. संभव है भीड़ के अनुपात में कुछ व्यवस्था प्रभावित हो."

थियेटरों में अश्लीलता प्रदर्शित के सवाल पर वे कहते हैं, "यह आरोप बिल्कुल ग़लत है. टीवी पर जो विज्ञापन और कार्यक्रम दिखाया जाते हैं उनसे हज़ार गुना अच्छा हैं ये थियेटर. इसके बावजूद मेले में तीनों थियेटरों के लिए एक-एक दंडाधिकारी नियुक्त किये गये हैं ताकि अश्लीलता न प्रदर्शित हो."

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