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मंगलवार, 01 मई, 2007 को 02:29 GMT तक के समाचार
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फ़र्ज़ी मुठभेड़ की सीबीआई जाँच की माँग
सुप्रीम कोर्ट
केंद्र सरकार ने पहली ही सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया था कि मामले की सीबीआई जाँच हो
कांग्रेस और वामपंथी दलों ने गुजरात के कथित फ़र्ज़ी मुठभेड़ के मामले की सीबीआई जाँच की माँग की है. लेकिन गुजरात सरकार ने इसका विरोध किया है.

सीबीआई जाँच की माँग फ़र्ज़ी मुठभेड़ के मामले में नए तथ्य आने के बाद की गई है.

गुजरात सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के सामने मान लिया है कि कथित फ़र्ज़ी मुठभेड़ में मारे गए सोहराबुद्दीन की पत्नी क़ौसर बी की हत्या हो चुकी है और उसके शव को जला दिया गया था.

केंद्र सरकार की ओर से पहले ही इस मामले की सीबीआई जाँच की मांग की जा चुकी है और सुप्रीम कोर्ट इस मामले में मंगलवार को फ़ैसला सुनाने वाला है.

उल्लेखनीय है कि सोहराबुद्दीन 26 नवंबर 2005 को गुजरात पुलिस के आतंकवाद निरोधी दस्ते (एटीएस) और राजस्थान पुलिस के संयुक्त अभियान में मारे गए थे.

तब पुलिस ने कहा था उनके संबंध चरमपंथियों से थे. लेकिन बाद में गुजरात सरकार की जाँच में पुलिस के दावा गलत साबित हुआ और इसी माह तीन आईपीएस अधिकारियों को इस मामले में गिरफ़्तार कर लिया गया.

प्रधानमंत्री को ज्ञापन

इस मामले की सीबीआई की जाँच की माँग करते हुए विभिन्न राजनीतिक दलों के सांसदों ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को एक ज्ञापन सौंपा है.

 दस्तावेजों से पता चलता है कि पुलिस अधिकारियों को बलि का बकरा बनाया जा रहा है, असल दोषी कोई और है
मधुसूदन मिस्त्री, मुख्य सचेतक, कांग्रेस

ज्ञापन पर कांग्रेस, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई), मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा), डीएमके और आरजेडी के कोई तीस सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं.

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार ज्ञापन सौंपने के बाद कांग्रेस के मुख्य सचेतक मधुसूदन मिस्त्री ने कहा, "दस्तावेजों से पता चलता है कि पुलिस अधिकारियों को बलि का बकरा बनाया जा रहा है, असल दोषी कोई और है."

जबकि सीपीएम के नेता सीताराम येचुरी ने कहा है कि दोषी पुलिस अधिकारियों की जाँच होनी ही चाहिए साथ ही सरकार की भूमिका की भी जाँच होनी चाहिए.

हालांकि भारतीय जनता पार्टी ने यह कहकर इस मामले पर कोई टिप्पणी नहीं की है कि यह मामला सुप्रीम कोर्ट में है.

लेकिन राज्य सरकार की ओर से सीबीआई जाँच का विरोध किया गया है.

गुजरात सरकार के वकील केटीएस तुलसी से जब बीबीसी ने पूछा कि वे क्यों सीबीआई जाँच का विरोध कर रहे हैं तो उन्होंने कहा कि क़ानून व्यवस्था राज्य का मामला है और इसे राज्य के अधिकार में ही रहने दिया जाना चाहिए.

तुलसी ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार की ओर से इस मामले में राजनीति करने की कोशिश की जा रही है.

सोमवार को गुजरात सरकार की ओर से दिए गए नए तथ्यों के बाद सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि वह मंगलवार को इस मामले में फ़ैसला देगी.

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