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पश्चिमी उत्तर प्रदेश में चुनाव प्रचार समाप्त | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण में दस ज़िलों में फैली 58 विधानसभा सीटों के लिए चुनाव प्रचार बुधवार शाम समाप्त हो गया. मतदान शुक्रवार को होगा. इन 58 सीटों में से पिछली बार 15 सीटें बहुजन समाज पार्टी को, दस भाजपा को, ग्यारह राष्ट्रीय लोकदल को, आठ समाजवादी पार्टी को और छह कांग्रेस को मिली थीं. दूसरे चरण में मथुरा, बुलंदशहर, ग़ाज़ियाबाद, बागपत, मुज़फ़्फ़रनगर, सहारनपुर और मेरठ में मतदान होगा. पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मेरठ डिविज़न, मथुरा और अलीगढ़ का ये क्षेत्र भाजपा नेता कल्याण सिंह और राष्ट्रीय लोकदल नेता अजीत सिंह का गढ़ माना जाता है. जनसंभाओं में तीख़े प्रहार कल्याण सिंह चुनाव नहीं लड़ रहे लेकिन उनके पुत्र राजबीर सिंह चुनाव मैदान में उतरे हैं. युनाइटेड डेमोक्रेटिक फ़्रंट यानि यूडीएफ़ नेता याक़ूब क़ुरैशी, जो मुलायम मंत्रिमंडल के सदस्य रह चुके हैं और अजीत सिंह के क़रीबी सहयोगी कोक्प हामिद भी चुनाव के इस चरण में अपना भाग्य आज़मा रहे हैं. चुनाव प्रचार के अंतिम दिन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने मुरादाबाद में कांग्रेस पर तीख़े प्रहार किए और दावा किया कि लोगों को उनकी सरकार के किए विकास कार्यों के बारे में पता है और वे चुनावी नतीजों को लेकर आश्वास्त हैं.
उधर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने चुनाव के अंतिम दिन यूपी में 'चौपट राज' का ज़िक्र किया और वर्तमान प्रशासन की तुलना उत्तर प्रदेश में पिछले समय में रही कांग्रेस सरकारों से की है. दूसरी ओर सोनिया गांधी के पुत्र, कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने अलीगढ़ की सड़कों और गलियों में अपना रोडशो किया और विकास की बात की है. प्रचार पहले जैसा नहीं इस बार उत्तर प्रदेश में चुनाव आयोग के दिशानिर्देश के अनुसार चुनाव प्रचार में वैसा बाजा-गाजा और शोर-शराबा नज़र नहीं आया जैसा कि आमतौर पर होता है. गिनी-चुनी ही गाड़ियाँ चुनाव प्रचार में नज़र आईं और उम्मीदवारों के सहयोगियों ने अपना समर्थन ज़ाहिर करने के लिए बिल्ले-टोपी और चुनाव प्रचार के लिए एसएमएस और कई जगह रिकॉर्ड किए गए फ़ोन संदेशों का सहारा लिया. पूरे क्षेत्र में व्यापक सुरक्षा प्रबंध हैं और अर्धसैनिक बल और सीआईपीएफ़ के जवान काफ़ी संख्या में दिखाई दे रहे हैं. महत्वपूर्ण है कि भारतीय चुनावों का एक अभिन्न अंग माने जाने बूथ-प्रबंधन में भी इस बार काफ़ी बदलाव नज़र आएँगे. शामियाना इत्यादि लगाने की इजाज़त नहीं दी गई है और हर उम्मीदवार के केवल दो एजंट ही मतदान केंद्र पर मौजूद हो सकेंगे. |
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