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रविवार, 01 अप्रैल, 2007 को 13:09 GMT तक के समाचार
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यूपी चुनावी जंग के मुख्य सूत्रधार
मुलायम सिंह यादव
मुलायम सिंह यादव चौथी बार मुख्यमंत्री बनने के लिए जोरशोर से चुनाव प्रचार में जुटे हैं
उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के कल्याण सिंह, समाजवादी पार्टी के मुलायम सिंह, बहुजन समाज पार्टी की मायावती और काँग्रेस के राहुल गाँधी मुख्य सूत्रधार होंगे.

मुलायम सिंह यादव

चौधरी चरण सिंह के चेले रहे मुलायम सिंह यादव के लिए इस बार की चुनावी राह बहुत कठिन नज़र आ रही है.

22 नवंबर, 1939 को किसान परिवार में जन्मे मुलायम सिंह 1967 में पहली बार जसवंत नगर क्षेत्र से विधानसभा के लिए चुने गए थे.

यादव-मुसलमान समीकरण पर अपनी राजनीति करने वाले मुलायम 1989 में पहली बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने थे.

अयोध्या आंदोलन में अपनी भूमिका की वजह से इन्हें मुसलमानों का भारी समर्थन मिला.

उन्होंने दलितों और पिछड़ों में एकता स्थापित करने की कोशिश की और बसपा से गठबंधन किया.

इसी गठबधंन के नेता के रूप में मुलायम 1993 में दूसरी बार मुख्यमंत्री बने थे.

अगस्त, 2003 में तीसरी बार मुख्यमंत्री बने मुलायम सिंह केंद्र में रक्षा मंत्री भी रह चुके हैं.

कल्याण सिंह

सन् 1991 की राम-लहर में भाजपा को मिले बहुमत के बाद कल्याण सिंह पहली बार मुख्यमंत्री बने थे.

कल्याण सिंह
भाजपा ने कल्याण सिंह को मुख्यमंत्री के रूप में पेश किया है

1990-92 में हुए अयोध्या आंदोलन के प्रमुख नेता रहे कल्याण सिंह इस चुनाव में भाजपा की ओर से मुख्यमंत्री पद के दावेदार हैं.

उत्तर प्रदेश की एक पिछड़ी जाति लोध से ताल्लुक़ रखने वाले कल्याण की अपनी बिरादरी पर ख़ासी पकड़ है.

इसी के दम पर पिछले विधानसभा चुनावों में कल्याण ने भाजपा को नुक़सान पहुँचाने में कामयाबी हासिल की थी.

मायावती

स्कूल अध्यापिका से मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुँची मायावती उत्तरप्रदेश की तीन बार कमान संभाल चुकी हैं.

मायावती
बसपा सुप्रीमो मायावती ने इस बार बड़ी संख्या में ब्राह्मणों को टिकट बांटे हैं

1995 में पहली बार भाजपा के सहयोग से मुख्यमंत्री बननेवाली मायावती देश की पहली दलित महिला मुख्यमंत्री थीं.

कांशीराम की बनाई बहुजन समाज पार्टी की मुखिया मायावती ने इस बार के विधानसभा चुनाव में ब्राह्मणों को अपने साथ खड़ा करने की कोशिश की है और उन्हें 87 टिकट दी हैं.

मायावती पहली बार 1995 में भाजपा के सहयोग से राज्य की मुख्यमंत्री बनी थी.

इसके बाद उन्होंने सपा का दामन थामा और 1997 में दूसरी बार मुख्यमंत्री की कुर्सी सँभाली.

पाँच साल बाद 2002 में उन्हें एक बार फिर मुख्यमंत्री बनने का मौक़ा हासिल हुआ. हालाँकि उनकी यह पारी भी लंबी नहीं रही.

राहुल गाँधी

नेहरू-गाँधी परिवार की पाँचवी पीढ़ी के नेता राहुल गाँधी ने ये बात अच्छी तरह समझ ली है कि दिल्ली फ़तह की कवायद उत्तर प्रदेश से ही शुरू होती है.

राहुल गाँधी
कांग्रेस ने राहुल गाँधी को स्टार प्रचारक के रूप में चुनावी मैदान में उतारा है

इसीलिए उन्होंने पिछले लोकसभा चुनावों में भी उत्तर प्रदेश में ख़ासी मेहनत की थी और इस बार भी रोड शो करने में लगे हुए हैं.

हर प्रत्याशी का बायोडाटा अपने लैपटॉप में रखने वाले राहुल 2004 में पहली बार अमेठी से लोक सभा के लिए चुने गए थे.

अनेक प्रयासों के बावजूद कांग्रेस उत्तर प्रदेश में बेहतर प्रदर्शन नहीं कर सकी थी और इस बार उसने चुनाव में प्रदेश की कमान राहुल के हाथों में सौंपी है.

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