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मंगलवार, 10 अप्रैल, 2007 को 13:18 GMT तक के समाचार
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लिज़-अरूण की शादी क़ानूनी पचड़े में

लिज़ और अरुण
लिज़ हर्ले ने देशी-विदेशी मीडिया के भारी जमावड़े के बीच विवाह रचाया था
हॉलीवुड अभिनेत्री लिज़ हर्ली और भारतीय मूल के व्यवसायी अरुण नायर के पिछले दिनों जोधपुर में हुए विवाह समारोह पर क़ानूनी विवाद खड़ा हो गया है.

जोधपुर के कुछ लोगों ने इस आयोजन को हिंदू धर्म का मज़ाक बताते हुए अदालत में मुक़दमा पेश किया है.

इस बहुचर्चित शादी की कहानी में उस वक्त एक और मोड़ आ गया जब अरुण नायर के पिता विनोद नायर ने मुक़दमा पेश करने वाले वकील को समर्थन का भरोसा दिलाया.

जोधपुर की एक अदालत में विष्णु खंडेलवाल ने शिकायत दर्ज कराते हुए कहा है कि लिज़ और अरुण ब्रिटेन में पहले ही ईसाई धर्म के तहत शादी कर चुके थे और इसके बाद जोधपुर में हिंदू विधि से विवाह रचाना हिंदू धर्म का अपमान था.

याचिका दायर करने वाले का कहना है कि इससे करोड़ों हिंदुओं की भावनाएँ आहत हुई हैं.

इस मामले में लिज़ और अरुण को भी वादी बनाया गया है.

इसी मामले में मंगलवार को पंडित जसराज व्यास ने अदालत में बयान दर्ज कराया. उन्होंने कहा कि जिस तरह हर्ले और नायर ने शादी का आयोजन किया वह हिंदू मान्यताओं का उल्लंघन है.

अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 12 अप्रैल की तिथि तय की है.

पिता भी आहत

खंडेलवाल के वकील एचएस सारस्वत ने बीबीसी से बातचीत में दावा किया कि उनकी विनोद नायर से फ़ोन पर बात हुई है और वे भी अपने पुत्र की भूमिका से खिन्न थे.

सारस्वत कहते हैं, "विनोद नायर ने मुझे बताया कि विवाह अनुष्ठान के वक्त लिज़ चमड़े के जूते पहने रही और आग्रह के बावजूद उन्होंने जूते उतारने से इनकार कर दिया."

 विनोद नायर ने मुझे बताया कि विवाह अनुष्ठान के वक्त लिज़ चमड़े के जूते पहने रही और आग्रह के बावजूद उन्होंने जूते उतारने से इनकार कर दिया
एचएस सारस्वत, वकील

उन्होंने कहा कि विनोद ने उन्हें आश्वस्त किया है कि ज़रूरत पड़ने पर वे अपना बयान लिखित में भेज सकते हैं.

सारस्वत ने कहा कि हिंदू मान्यता में विवाह अत्यंत पवित्र संस्कार है. इसे दिखावे, मनोरंजन या रोमांस के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता.

अपराध

इस मामले में भारतीय दंड संहिता की धारा 295 ए का उल्लेख किया गया है. जिसके तहत किसी धर्म की भावना को आहत करने पर सज़ा हो सकती है.

सोमवार को अदालत के समक्ष एक सेवानिवृत अधिकारी यतींद्र मिश्रा ने साक्ष्य पेश करते हुए कहा कि लिज़ और अरुण ने इस समारोह से पहले ही वैवाहिक जीवन शुरू कर दिया था और जोधपुर में विवाह अनुष्ठान सिर्फ़ इसलिए किया गया ताकि हिंदू धर्म की हँसी उड़ाई जा सके.

वकीलों ने इस विवाद के साथ समारोह की दस तस्वीरें भी पेश की हैं, जिनमें लिज़ और अरुण को चुंबन लेते हुए दिखाया गया है.

हालाँकि अभी अदालत ने मुक़दमा चलाने के बारे में कोई फ़ैसला नहीं दिया है.

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