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'वेश्यालय की मालकिन' को रिहा किया | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में उन तीन महिलाओं को रिहा कर दिया गया है जिन्हें एक मदरसे की कुछ छात्राओं ने एक कथित वेश्यालय चलाने के आरोप में मंगलवार को अगवा कर लिया था. इस्लामाबाद का जामिया हफ़्सा मदरसा दुनिया के सबसे बड़े महिला मदरसा है और इसकी कुछ छात्राओं ने एक कथित वेश्यालय की मालकिन और कुछ अन्य महिलाओं का मंगलवार को अपहरण कर लिया था. इन छात्राओं ने धमकी दी थी कि अगर उनकी माँगें नहीं मानी गईं तो जेहाद शुरू किया जाएगा और जिन महिलाओं को वेश्यावृत्ति के आरोप में उन्होंने अगवा कर रखा था, उन्हें पत्थर मारकर मौत की सज़ा दी जाएगी. इन महिलाओं में कथित वेश्यालय की मालकिन शमीम अकता और दो अन्य महिलाएँ शामिल थीं. इन महिलाओं की रिहाई से पहले कथित वेश्यालय मालकिन शमीम अकता ने एक बयान पढ़कर सुनाया जिसमें उसने स्वीकार किया कि उसने "अनैतिक कार्य" किया है. समाचार एजेंसी एपी के अनुसार शमीम अकता ने कहा, "अतीत में मुझसे जो ग़लतियाँ हुई हैं, मैं उनके लिए माफ़ी माँगती हूँ और मैं अल्लाह की क़सम खाकर कहती हूँ कि भविष्य में एक मज़हबी औरत के रूप में जीवन बिताएगी." हालाँकि शमीम अकता ने यह स्वीकार करने से इनकार कर दिया कि वह कोई वेश्यालय चलाती थी. इस्लामाबाद में मौजूद बीबीसी संवाददाता का कहना है कि ऐसा लगता है कि शमीम अकता ने वह बयान बहुत दबाव में पढ़ा था. मदरसे की छात्राओं ने इसे अपनी जीत बताते हुए कहा है कि शहर के उदार प्रशासन पर उनकी जीत हुई है. पुलिस ने इन तीन महिलाओं को अगवा किए जाने के मामले में चार लोगों को गिरफ़्तार किया था जिन्हें बाद में रिहा कर दिया गया था. इन छात्राओं ने वेश्यालय से जिन महिलाओं का अपहरण किया था वे गुरूवार को भी उनके क़ब्ज़े में थीं और उनकी माँग थी कि राजधानी इस्लामाबाद में वेश्यालय और वीडियो दुकानें बंद की जाएँ. महिला मदरसे की कुछ छात्राओं ने मंगलवार को उस कथित वेश्यालय पर हमला करके तीन महिलाओं को अगवा कर लिया था. बीबीसी संवाददाता के अनुसार ऐसा लग रहा है कि पुलिस इस मामले में कोई कार्रवाई करने से हिचकिचा रही है. मदरसे की छात्राओं ने माँग रखी थी कि इस्लामाबाद में सभी वेश्यालय बंद किए जाएँ और चेतावनी दी थी कि जिन लोगों को उन्होंने हिरासत में रखा हुआ था वे अगर वेश्यावृत्ति छोड़ने और आम माफ़ी माँगने के लिए राज़ी नहीं होते तो उन्हें इस्लामी शरिया क़ानून के तहत सज़ा दी जाएगी जिसका मतलब था कि उन्हें पत्थर मारकर मौत की सज़ा दी जाएगी. पाकिस्तान के गृह मंत्रालय ने कहा था कि सरकार मदरसे की छात्राओं के हाथों अगवा की गई महिलाओं को रिहा कराने के लिए भरसक कोशिश करेगी. महिलाओं के अधिकारों के लिए काम करने वाले स्थानीय संगठनों ने मदरसे की छात्राओं की इस कार्रवाई की निंदा की है लेकिन छात्राओं के सख़्त रुख अपनाने को उदार प्रशासन और सरकार पर कट्टरपंथ की जीत के रूप में देखा जा रहा है. | इससे जुड़ी ख़बरें तालेबान की शैली की एक मुहिम28 मार्च, 2007 | भारत और पड़ोस मदरसों की कमान महिलाओं के हाथ01 सितंबर, 2006 | भारत और पड़ोस मदरसे से हमलावर के बारे में पूछताछ16 जुलाई, 2005 | भारत और पड़ोस पाकिस्तान में धार्मिक गुटों का प्रदर्शन22 जुलाई, 2005 | भारत और पड़ोस क्या है सच्चाई पाकिस्तानी मदरसों की?05 जुलाई, 2006 | पहला पन्ना | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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