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फ़ैसले पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ
प्रदर्शन
कोर्ट ने अन्य पिछड़ा वर्ग के बारे में पूरी जानकारी जुटाए जाने का निर्देश दिया
अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए उच्च शिक्षा संस्थानों में आरक्षण दिए जाने के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर जहाँ कुछ राजनीतिक दलों के तीख़े तेवर दिखे वहीं अन्य दलों ने दबे शब्दों में अपनी प्रतिक्रिया जताई है.

अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को उच्च शिक्षण संस्थानों में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) को आरक्षण संबंधी क़ानूनी प्रावधान पर अंतरिम रोक लगा दी है.

केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री अर्जुन सिंह ने कहा है कि वे वही करेंगे जो क़ानूनी और संवैधानिक दृष्टि से सही होगा और सामाजिक ज़रूरतों के मुताबिक होगा.

उन्होंने पत्रकारों के बताया, "आख़िरी विचार सुप्रीम कोर्ट का होता है और उन्हीं का होगा. हम संविधान के मुताबिक काम करेंगे और उम्मीद करेंगे कि सुप्रीम कोर्ट भी सहमत हो कि जो विधेयक पारित हुआ है वह संविधानिक है."

कांग्रेस पार्टी के प्रवक्ता अभिषेक सिंघवी ने इसे तथ्यों के अभाव में दिया गया एक अंतरिम क़ानूनी आदेश बताया है वहीं वामदलों ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण फ़ैसला बताया है.

कांग्रेस पार्टी के प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि यह एक न्यायिक आदेश है जिसके तहत एक अंतरिम व्यवस्था कुछ समय के लिए लागू कर दी गई है.

 आख़िरी विचार सुप्रीम कोर्ट का होता है और उन्हीं का होगा. हम संविधान के मुताबिक काम करेंगे और उम्मीद करेंगे कि सुप्रीम कोर्ट भी सहमत हो कि जो विधेयक पारित हुआ है वह संविधानिक है
अर्जुन सिंह

उन्होंने कहा, "इस आदेश का यह मतलब नहीं है कि आदेश अन्य पिछड़ा वर्ग को आरक्षण देने की अवधारणा या सरकार की इस नीति के ख़िलाफ़ है."

वामदलों, डीएमके तीख़े तेवर

वहीं वामपंथी नेता और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव प्रकाश कारत ने कहा, "अन्य पिछड़ा वर्ग के लोगों को राज्यों के शिक्षण संस्थानों में और केंद्र सरकार की नौकरियों में पहले से ही आरक्षण प्राप्त है. ऐसे में जिस आधार पर यह आदेश जारी किया गया है वह दुर्भाग्यपूर्ण है."

उन्होंने कहा कि संसद ने ओबीसी आरक्षण के लिए जो विधेयक पारित किया था उसे प्रभावी बनाने के लिए केंद्र सरकार को सभी संभव प्रयास करने चाहिए.

यूपीए में शामिल डीएमके के नेताओं ने भी सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले को दुर्भाग्यपूर्ण बताया है मगर आरक्षण विधेयक के ख़िलाफ़ हड़ताल पर जाने वाले एम्स के डॉक्टर, छात्र और आयआयटी के कई छात्रों ने सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले का स्वागता किया है.

 अन्य पिछड़ा वर्ग के लोगों को राज्यों के शिक्षण संस्थानों में और केंद्र सरकार की नौकरियों में पहले से ही आरक्षण प्राप्त है. ऐसे में जिस आधार पर यह आदेश जारी किया गया है वह दुर्भाग्यपूर्ण है
प्रकाश कारत

डीएमके नेता और तमिलनाडु मुख्यमंत्री एम करुणानिधि ने कहा, "ये चौंकाने वाली बात है और सभी राजनीतिक दलों को इस मुद्दे पर एकजुट होना चाहिए."

भाजपा के प्रवक्ता प्रकाश जावडेकर का कहना था, "हम मानते हैं कि सामाजिक पिछड़ापन एक सच्चाई है इसको दूर करने के लिए कदम उठाए जाने चाहिए. लेकिन जब तक समग्र दृष्टिकोण सरकार नहीं अपनाती तब तक कोर्ट भी ऐसे आधे-अधूरे कदमों को नहीं मानेगा. ये सरकार की विफलता है."

उधर केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी नेता रामविलास पासवान ने इस दबे-कुचले वर्ग के लिए एक भारी धक्का बताया.

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