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'दलित बनकर' 33 साल तक अफ़सरी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
बिहार में अधिकारियों को यह साबित करने में ग्यारह वर्ष लग गए कि पशुपालन विभाग के एक क्षेत्रीय निदेशक दलित नहीं बल्कि उच्च जाति से ताल्लुक रखते हैं. क्षेत्रीय निदेशक के पद पर तैनात रहे कौशल किशोर सिन्हा को निलंबित कर दिया गया है और उन्हें बचाने वाले अधिकारियों की भी शामत आ गई है. सिन्हा ने 1974 में अनुसूचित जातियों में गिनी जाने वाली 'दुसाध' जाति का 'फर्ज़ी' प्रमाणपत्र पेश करके नौकरी हासिल की थी. कौशल किशोर इन आरोपों को ग़लत बताते हैं और उनका कहना है कि उन्होंने कोई ग़लत काम नहीं किया है. वे तैंतीस साल तक नौकरी करते रहे प्रमोशन भी पाते रहे, पिछले दिनों तक सिन्हा मुज़्फ़्फ़रपुर में पशुपालन विभाग में कार्यकारी क्षेत्रीय निदेशक के पद पर तैनात थे. उनकी मुसीबतें तब शुरू हुईं जब वह सेवानिवृत्त होने वाले थे. कोई ग्यारह वर्ष पहले कुछ लोगों ने सरकार से यह शिकायत की थी कि वह ‘दुसाध’ नहीं बल्कि उच्च ज़ाति के हैं. यह मामला लगातार दबाया जाता रहा और कभी कोई ठोस जाँच नहीं हुई और न ही कोई कार्रवाई की गई. लेकिन जहानाबाद के ज़िलाधिकारी संजय अग्रवाल ने उनकी असली जाति के बारे में जानकारी देते हुए उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी को दस्तावेज़ भेज दिए, मोदी पशुपालन विभाग के भी प्रभारी हैं. ज़िलाधिकारी संजय अग्रवाल कहते हैं, "हमने अपनी जाँच में पाया कि कौशल किशोर सिन्हा ‘दुसाध’ नहीं, ‘भूमिहार’ हैं जो सवर्णों में गिने जाते हैं, और इस बारे में हमने अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी है." कार्रवाई रिपोर्ट मिलने के बाद आनन-फानन में उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी ने कौशल किशोर सिन्हा को न सिर्फ़ निलंबित करने का हुक्म जारी कर दिया बल्कि उन अधिकारियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई करने की बात की है जो इस मामले पर लीपापोती करने में लगे थे. उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी कहते हैं, "हमारे समाज में जाति-व्यवस्था इतनी मज़बूत है कि कोई आदमी भले ही अपना धर्म बदल ले लेकिन वह जाति नहीं बदल सकता, इस सच्चाई के बावजूद अधिकारियों की एक जमात कौशल किशोर सिन्हा को बचाने में लगी थी. यह बहुत ही संगीन मामला है. अब उन्हें भी नहीं बख़्शा जाएगा". सुशील मोदी ने बताया, "हम कौशल किशोर की संपत्ति की भी जाँच कर रहे हैं और उन्हें नौकरी से निकाल देने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है". कौशल किशोर सिन्हा अपनी बात पर अब भी क़ायम हैं. वे कहते हैं, "हमारे ख़िलाफ़ यह साजिश है. हम उचित समय पर अपनी बात साबित कर देंगे". उनका कहना है कि अभी किसी के सामने अपना पक्ष रखने की उन्हें ज़रूरत नहीं है. | इससे जुड़ी ख़बरें एम्स के डॉक्टर भूख हड़ताल पर15 दिसंबर, 2006 | भारत और पड़ोस आरक्षण विधेयक लोकसभा से पारित 14 दिसंबर, 2006 | भारत और पड़ोस पिछड़े वर्ग के धनी लोगों को भी आरक्षण08 दिसंबर, 2006 | भारत और पड़ोस 'आरक्षण से समाज में विघटन बढ़ा है'05 दिसंबर, 2006 | भारत और पड़ोस 'धर्म के आधार पर आरक्षण नहीं'03 दिसंबर, 2006 | भारत और पड़ोस सरकारी नौकरियों में 'पिछड़े' मुसलमान10 नवंबर, 2006 | भारत और पड़ोस आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट का निर्देश16 अक्तूबर, 2006 | भारत और पड़ोस 'विदेशी विश्वविद्यालयों में भी आरक्षण'20 सितंबर, 2006 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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