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नाराज़ योगी का भाजपा से विद्रोह | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारतीय जनता पार्टी के गोरखपुर के सांसद ने उत्तरप्रदेश चुनाव के बीच अपनी अलग पार्टी बनाकर विधानसभा चुनावों में उम्मीदवार उतारने की घोषणा कर दी है. उन्होंने कहा है कि अखिल भारतीय हिंदू महासभा की टिकट पर पूर्वी उत्तरप्रदेश के 14 ज़िलों में 70 से 75 उम्मीदवार चुनाव लड़ेंगे. योगी आदित्यनाथ टिकट वितरण में उनकी सलाह न लिए जाने को लेकर नाराज़ थे और पार्टी के बड़े नेताओं के मनाने के बाद भी उन्होंने अलग पार्टी बनाने की घोषणा कर दी है. हालांकि उन्होंने पार्टी छोड़ने जैसी कोई बात नहीं की है. ऐन चुनाव के बीच एक वरिष्ठ सांसद के इस क़दम से भाजपा को नुक़सान होने के आसार हैं. हालांकि भाजपा ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा है कि कोई व्यक्ति बड़ा नहीं होता और पार्टी बड़ी होती है, और लोगों की तरह योगी आदित्यनाथ को भी पार्टी से बाहर जाने का मतलब समझ में आ जाएगा. 'अपमानित किया गया' योगी आदित्यनाथ वही सांसद हैं जिनके समर्थकों ने गोरखपुर में उनकी गिरफ़्तारी के बाद हिंसा और तोड़फोड़ की थी. थोड़े दिन पहले उसी गिरफ़्तारी का विरोध करते हुए राज्य की मुलायम सिंह यादव सरकार पर आरोप लगाते हुए संसद के भीतर फफककर रो पड़े थे. इसके कुछ ही दिन बाद उत्तरप्रदेश में चुनाव की घोषणा हुई तो पार्टी की टिकट वितरण को लेकर वे नाराज़ हो गए. उनका आरोप है कि टिकटों के बँटवारे से पहले उनसे सलाह नहीं ली गई और उनके समर्थकों को टिकट नहीं दी गई. इसके बाद उन्होंने कार्यकारिणी से इस्तीफ़ा दे दिया था. हालांकि पार्टी प्रवक्ता प्रकाश जावड़ेकर का कहना है कि पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने उन्हें समझाया था और लालकृष्ण आडवाणी से भी उनकी मुलाक़ात हुई थी इसके बाद उन्होंने बयान दिया था कि सबकुछ ठीक है. लेकिन मंगलवार को उन्होंने अपनी पार्टी से अलग चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी. समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार उन्होंने भाजपा से अलग होकर चुनाव लड़ने की घोषणा करते हुए कहा, "मुझे भाजपा में अपमानित किया गया. हालांकि मैं पिछले छह महीने से इस षडयंत्र को छिपाकर रखने की कोशिश करता रहा." उन्होंने कहा है कि पूर्वी उत्तरप्रदेश के चार मंडलों आज़मगढ़, गोरखपुर, बस्ती और देवीपाटन के कोई 14 ज़िलों में अखिल भारतीय हिंदू महासभा के उम्मीदवार चुनाव लड़ेंगे. उनका कहना था कि उन्होंने पूरी कोशिश की थी कि हिंदू वोटों का विभाजन न हो लेकिन भाजपा ने उनकी बात नहीं मानी. 'अहंकार की अधिकता' पार्टी सांसद आदित्यनाथ के इस क़दम पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए भाजपा के प्रवक्ता प्रकाश जावड़ेकर ने बीबीसी से कहा कि इससे अधिक क्या कहा जा सकता है कि उन्हें सदबुद्धि आए. उन्होंने कहा कि चुनाव के समय सभी को उम्मीद होती है कि टिकट वितरण उनके हिसाब से हो लेकिन ऐसा संभव नहीं होता. यह पूछने पर कि क्या इससे भाजपा को नुक़सान नहीं होगा, उन्होंने कहा, "यह प्रयोग बहुत से लोगों ने करके देखा है. आख़िर कोई व्यक्ति बड़ा नहीं होता, पार्टी बड़ी होती है. व्यक्ति, व्यक्ति होता है और पार्टी, पार्टी." उन्होंने सांसद आदित्यनाथ के राजनीतिक प्रभाव के सवाल पर कहा, "बंद मुट्ठी लाख की और खुल गई तो ख़ाक की." पार्टी प्रवक्ता ने कहा कि उसी क्षेत्र में आदित्यनाथ के पिता चुनाव हारते भी रहे हैं और अब वे ख़ुद पार्टी के प्रभाव से जीतते हैं. उन्होंने इसे अनुशासनहीनता मानने से इनकार करते हुए कहा, "यह अनुशासनहीनता नहीं, अहंकार का बड़ा हो जाना है." | इससे जुड़ी ख़बरें आदित्यनाथ का कार्यकारिणी से इस्तीफ़ा15 मार्च, 2007 | भारत और पड़ोस फूट-फूटकर रो पड़े सांसद...12 मार्च, 2007 | भारत और पड़ोस योगी आदित्यनाथ को ज़मानत मिली07 फ़रवरी, 2007 | भारत और पड़ोस अदालत ने गिरफ़्तारी को अवैध ठहराया06 फ़रवरी, 2007 | भारत और पड़ोस पूर्वांचल में छिटपुट हिंसा, कर्फ़्यू जारी रहेगा31 जनवरी, 2007 | भारत और पड़ोस गोरखपुर में हिंसा के बाद कर्फ्यू29 जनवरी, 2007 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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