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शुक्रवार, 16 मार्च, 2007 को 09:16 GMT तक के समाचार
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सेवानिवृत्ति की आयु पर विवाद

कश्मीरी युवा
युवाओं का कहना है कि सेवानिवृत्ति की आयु बढ़ने से बेरोज़गारी और बढ़ेगी
भारत प्रशासित जम्मू-कश्मीर में सरकारी कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति की आयु को लेकर विवाद खड़ा हो गया है.

कर्मचारी इसे 58 वर्ष से बढ़ाकर 60 करने की माँग कर रहे हैं. वहीं लाखों बेरोज़गार युवा इस प्रस्ताव का विरोध कर रहे हैं.

सरकारी कर्मचारी पिछले कई वर्षों से यह तर्क दे रहे हैं कि आम आदमी की औसत आयु बढ़ गई है इसलिए सेवानिवृत्ति की आयु 58 वर्ष से बढ़ाकर 60 की जानी चाहिए.

उनकी यह भी दलील है कि भारत के दूसरे राज्यों में सरकारी कर्मचारी 60 वर्ष में सेवानिवृत्त होते हैं.

राज्य के मुख्यमंत्री ग़ुलाम नबी आज़ाद ने पिछले दिनों कर्मचारियों की संयुक्त कार्य समिति के प्रतिनिधिमंडल को आश्वासन दिया था सरकार सेवानिवृत्ति की आयु बढ़ाने की उनकी माँग पर विचार कर रही है.

 अगर राज्य सरकार सेवानिवृत्ति की आयु बढ़ाती है तो हम जैसे युवा आत्महत्या करने को मजबूर हो जाएंगे
मंजूर अहमद

जाहिर है कि मुख्यमंत्री के आश्वासन से सरकारी कर्मचारी खुश हैं लेकिन बेरोज़गार युवाओं ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है.

राज्य में डेढ़ लाख युवाओं ने रोज़गार के लिए पंजीकरण करा रखा है लेकिन वास्तव में बेरोज़गार युवाओं की संख्या इसकी दोगुनी है.

सरकार ने बेरोज़गारी की समस्या को देखते हुए नियुक्ति की उम्र सीमा बढ़ाकर 37 वर्ष तक कर दी है लेकिन कई बेरोज़गार इस उम्र को पार कर चुके हैं और काफ़ी शीघ्र ही इसे पार कर जाएंगे.

विरोध

ऐसे ही एक युवा मंज़ूर अहमद कहते हैं,'' अगर राज्य सरकार सेवानिवृत्ति की आयु बढ़ाती है तो हम जैसे युवा आत्महत्या करने को मजबूर हो जाएंगे.''

 युवाओं की प्रतिक्रिया ग़लतफहमी पर आधारित है. हर साल ज़्यादा से ज़्यादा पाँच हज़ार सरकारी कर्मचारी सेवानिवृत्त होते हैं इससे लाखों बेरोज़गार युवाओं को कैसे नौकरी मिल सकती है
ख़ुर्शीद आलम, कर्मचारियों के नेता

वो कहते हैं,'' सरकार को बेकार युवाओं के लिए रोज़गार के अवसर पैदा करने चाहिए न कि वो ऐसे क़दम उठाए जिससे उनकी हिम्मत टूट जाए.''

मेडिसिन में पोस्ट ग्रेजुएट करने के बाद भी सरकारी नौकरी हासिल न कर सकने वाले डॉक्टर सरोश कहते हैं,'' सेवानिवृत्ति की आयु 58 वर्ष से घटाकर 55 की जानी चाहिए और सरकार को कर्मचारियों को पहले नौकरी छोड़ने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए.''

दूसरी ओर कर्मचारियों की संयुक्त कार्य समिति के ख़ुर्शीद आलम का कहना है,'' युवाओं की प्रतिक्रिया ग़लतफहमी पर आधारित है. हर साल ज़्यादा से ज़्यादा पाँच हज़ार सरकारी कर्मचारी सेवानिवृत्त होते हैं इससे लाखों बेरोज़गार युवाओं को कैसे नौकरी मिल सकती है.''

वे कहते हैं,''सरकारी विभागों में जो पद खाली हैं उसे भरने के लिए भी कुछ नहीं किया जा रहा है. पिछले चार वर्षों में फार्म दिए गए और नियुक्तियों के विज्ञापन निकाले गए पर साक्षात्कार नहीं हुआ.''

ख़ुर्शीद आलम का यह भी कहना है कि सेवानिवृत्ति की आयु बढ़ाने से अरबों रुपए की बचत होगी और इससे बेरोज़गारों के लिए अवसर पैदे किए जा सकेंगे.

खुर्शीद आलम की दलील अपनी ज़गह है लेकिन बहुत सारे ऐसे सरकारी कर्मचारी भी हैं जो सरकार के रुख से खुश नहीं है और अपने बेटे-बेटियों की बेरोज़गारी से परेशान हैं.

अभिलेखागार में सुपरिटेंडेंट हलीमा का कहना है,'' मेरे बच्चे बेकार हैं. अगर मेरी सेवानिवृत्ति से उनमें से किसी एक को नौकरी मिल जाती तो मेरे ख़याल से अच्छा होता.''

वे कहती हैं कि सेवानिवृत्ति की आयु बढ़ने से बेकार युवाओं के साथ अन्याय होगा.

कई सरकारी कर्मचारी सेवानिवृत्ति की उम्र बढ़ाने पर तो सैद्धांतिक रूप से सहमत हैं लेकिन बेरोज़गार युवाओं के बारे में चिंतित भी हैं.

गज़ेटियर विभाग में सहायक निदेशक मोहम्मद काज़िम वानी इस समस्या के समाधान के लिए उपाय सुझाते हैं,'' सेवानिवृत्ति के लिए 35 वर्ष की नौकरी अथवा 60 वर्ष की आयु मुकर्रर की जानी चाहिए.''

कुछ जानकार सूत्रों का कहना है कि सरकार भी इसी तर्ज पर सोच रही है. हालांकि अंतिम फ़ैसला क्या होगा इसकी सबको प्रतीक्षा है.

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