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नंदीग्राम में चल रही है वर्चस्व की लड़ाई | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पश्चिम बंगाल के नंदीग्राम में प्रदर्शनकारियों पर पुलिस की गोलीबारी राज्य में वाम मोर्चा शासन के 30 वर्षों के दौरान कठोर कार्रवाई की पहली घटना नहीं है लेकिन निश्चित रूप से यह ऐसी पहली घटना है जब वामपंथी सरकार ने अपने समर्थक माने जाने वाले ग़रीब किसानों के ख़िलाफ़ ऐसी नृशंस कार्रवाई का आदेश दिया है. ग़ौरतलब है कि सरकार के भूमि सुधार और सत्ता के विकेंद्रीकरण का फ़ायदा इसी तबके को सबसे ज़्यादा मिला है. विश्लेषक रणबीर समतदार कहते हैं, ‘‘नंदीग्राम की घटना मार्क्सवादियों के लिए घातक साबित हो सकती है. नंदीग्राम की घटना के बाद मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य का रवैया वर्तमान संकट के लिए ज़िम्मेदार है." समतदार कहते हैं, ‘‘साधरणतः वामपंथी पार्टियों के कार्यकर्ता और प्रशिक्षित काडर सरकार के कार्यक्रमों को नीचे तक पहुँचाते हैं लेकिन इस बार सारी योजना अधिकारियों ने बनाई और एक सुबह ग्रामीणों को बताया कि उनकी ज़मीन का अधिग्रहण किया जा रहा है.’’ मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य ख़ुद स्वीकार करते हैं कि नंदीग्राम में ज़मीन अधिग्रहण की योजना में ख़ामियाँ हैं. बिगड़ती क़ानून व्यवस्था मुख्यमंत्री ने हाल ही में पत्रकारों से कहा, "मैं मानता हूँ हमने ग़लती की, इसलिए अगर नंदीग्राम के लोग केमिकल हब से होने वाले फ़ायदों से सहमत नहीं हैं तो हम उन पर ये परियोजना नहीं थोपेंगे. हम इसे कहीं और स्थानांतरित कर देंगे." लेकिन इस तरह के बयान के बाद भी मुख्यमंत्री ने नंदीग्राम में इतनी बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मियों को तैनात क्यों किया? भट्टाचार्य का विधानसभा में कहना था, "पुलिस वहाँ ज़मीन के अधिग्रहण के लिए नहीं बल्कि बिगड़ती क़ानून व्यवस्था को नियंत्रित करने के लिए गई थी." विश्लेषकों का कहना है कि नंदीग्राम में स्थानीय मार्क्सवादी नेताओं के कारण ही पुलिस को गोली चलानी पड़ी. वहाँ किसानों के विरोध की वजह से जनवरी 2007 से मार्क्सवादी पार्टी के लगभग तीन हज़ार समर्थक भागने पर मजबूर हुए हैं. माकपा सांसद लक्षमण सेठ कहते हैं, "यह नहीं चल सकता. हमे इन लोगों को घर वापस जाने लायक स्थिति बनानी होगी." दरअसल सेठ की अगुआई वाले हल्दिया विकास प्राधिकरण ने ही इंडोनेशिया के सलीम समूह के प्रस्तावित विशेष आर्थिक क्षेत्र यानी एसईज़ेड के लिए भू-अधिग्रहण का नोटिस दिया था. वामपंथी वर्चस्व पश्चिम बंगाल में बहुत कम ही ऐसे मौक़े आए हैं जब मार्क्सवादी राजनीतिक प्रणाली पर विपक्षी दल हावी हो गए हों. राजनीतिक मामलों के जानकार सव्यसाची बासु रॉय कहते हैं, "अगर मार्क्सवादियों को लगता है कि किसी भी इलाक़े में उनका नियंत्रण कमज़ोर पड़ रहा है तो वे पुरज़ोर विरोध शुरू करते हैं. पार्टी नेतृत्व और उनके हथियारबंद समर्थकों ने वर्ष 2001 के विधानसभा चुनावों के समय पांसकुरा, केसपुर और गारबेटा में ऐसा ही किया था." वो कहते हैं, "नंदीग्राम में पार्टी का समर्थन अब नहीं रहा और ऐसा एक साल के भीतर ही भू-अधिग्रहण मामले के बाद हुआ है इसलिए उन्होंने पुलिस को कार्रवाई करने के लिए मजबूर किया." | इससे जुड़ी ख़बरें नंदीग्राम में गोलीबारी पर संसद में हंगामा15 मार्च, 2007 | भारत और पड़ोस नंदीग्राम में फिर हिंसा, जाँच का आदेश15 मार्च, 2007 | भारत और पड़ोस पुलिस की गोली से 10 से अधिक मरे14 मार्च, 2007 | भारत और पड़ोस पश्चिम बंगाल में विपक्षी दलों का बंद08 जनवरी, 2007 | भारत और पड़ोस पश्चिम बंगाल बंद के दौरान हिंसा08 जनवरी, 2007 | भारत और पड़ोस नंदीग्राम में ज़मीन अधिग्रहण पर हिंसा07 जनवरी, 2007 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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