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श्रीलंका में बढ़ती हिंसा पर चेतावनी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
श्रीलंका को मदद देने वाले संगठनों और देशों ने वहाँ की सरकार और तमिल विद्रोहियों से हिंसा रोकने की अपील की है. श्रीलंकाई शहर गाले में हुई बैठक के बाद विश्व बैंक के उपाध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल ने कहा, "इस देश के बारे में जो भी चर्चा होती है उसमें हिंसा ही केंद्र में होता है." अमरीकी राजदूत रॉबर्ट ब्लैक का कहना था कि इस समस्या का कोई सैनिक समाधान नहीं है. श्रीलंका में सत्तर के दशक में शुरू हुई जातीय हिंसा में अब तक 65 हज़ार से ज़्यादा लोग मारे जा चुके हैं. श्रीलंका को लगभग साढ़े चार अरब डॉलर की विदेशी सहायता मिलनी है लेकिन ये शांति की दिशा में उठाए गए क़दमों पर निर्भर करेगा. बाधा प्रफुल्ल पटेल का कहना था, "बीता साल हिंसा की भेंट चढ़े साढ़े तीन हज़ार लोगों के परिवारों के लिए बेहद ख़राब रहा. न ही यह विस्थापित होने वाले दो लाख से ज़्यादा लोगों के लिए अच्छा रहा." उन्होंने साफ किया कि दो दिनों तक विकास की योजनाओं पर चर्चा करने का कोई फायदा नहीं होगा अगर ये बात दिमाग में न रखी जाए कि हिंसा ही सबसे बड़ी बाधा है. पटेल ने कहा, "श्रीलंका के पुनर्निमाण के रास्ते में बड़ी चुनौतियाँ हैं. सरकार को ऐसा माहौल बनाने की ज़रूरत है जिसमें हम काम कर सकें." वहीं, श्रीलंकाई राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे ने कहा कि उत्तरी और पूर्वी श्रीलंका में शांति के लिए विकास की ज़रूरत है. अमरीकी राजदूत रॉबर्ट ब्लैक ने बातचीत के ज़रिए समस्या का हल निकालने पर ज़ोर दिया. | इससे जुड़ी ख़बरें 'एलटीटीई की' तीन नौकाएँ नष्ट27 जनवरी, 2007 | भारत और पड़ोस श्रीलंका को जर्मनी से मदद रूकी25 दिसंबर, 2006 | भारत और पड़ोस श्रीलंका में सीधा हस्तक्षेप नहीं-प्रणव22 दिसंबर, 2006 | भारत और पड़ोस श्रीलंका की स्थिति से संयुक्त राष्ट्र चिंतित12 दिसंबर, 2006 | भारत और पड़ोस संघर्ष के कारण हज़ारों ने पलायन किया10 दिसंबर, 2006 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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