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मोक्ष की तलाश में जर्मन साधु | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत में सबसे बड़ा संत और सबसे बड़ा पाखंडी भी मिल सकता है और यही इस देश की ख़ूबसूरती है. सबसे दुखी आदमी और सबसे सुखी आदमी दोनों भारत में मिल सकते हैं. ये कहना है जर्मन साधु दत्त भारती का जो अब भारत को ही अपनी भूमि मानते हैं. मोक्ष की प्राप्ति के लिए तपस्या में लगे दत्त भारती को बचपन से ही भारत के साधु संतों और चमत्कारों में रुचि थी और जब किशोर वय के हुए तो भारत का रुख़ कर लिया. अल्मोड़ा में बौद्ध लामा से मंत्र लेकर संन्यास का रास्ता अपनाने के बाद दत्त भारती लगातार भारत में ही रहे हैं और अब भी अपनी तपस्या में लगे हुए हैं. यह पूछने पर कि क्या उन्हें ज्ञान प्राप्त हुआ तो वो मुस्कुराते हुए कहते हैं,'' हां मेरे भाई. मैंने जो मानदंड तय किए थे उन मानकों के अनुसार मुझे बहुत कुछ मिला है लेकिन अभी मोक्ष प्राप्ति नहीं हुई है.'' ईसाई धर्म में जन्मे दत्त भारती कहते हैं कि वो अब खुद को सनातन धर्मी मानते हैं. वो हिंदू शब्द के बारे में कहते हैं ये शब्द भारत में के लोगों के लिए पश्चिम ( यूरोप और अन्य देशों ) के लोगों का दिया हुआ शब्द है और भारत का असली धर्म सनातन धर्म है. सनातन धर्म के बारे में उनकी स्पष्ट राय है कि इसे कोई भी मान सकता है क्योंकि इसमें आस्तिक और नास्तिक, द्वैतवाद, अद्वैतवाद, शंकराचार्य और कबीर सभी के लिए जगह है. पूर्ण संन्यास दत्त भारती पिछले कुंभ में जूना अखाड़ा में शामिल हुए यानी पूर्ण रुप से संन्यासी हो गए. वो कहते हैं,'' छह साल पहले मेरा संस्कार हुआ. अब मैं संन्यासी हूं. मेरी मां का देहांत हो चुका है. शादी नहीं की है. मेरा कोई नहीं है बस गुरु हैं जिसके सहारे मोक्ष की कामना करता हूं.'' तो क्या गुरु मिलना इतना आसान है, भारती कहते हैं कि जीवन का यह सबसे मुश्किल कार्य है और इसके लिए हर व्यक्ति को अपने स्तर पर प्रयास करना पड़ता है. इलाहाबाद से जर्मनी तक साइकिल पर जाने का दावा करने वाले दत्त भारती की बढ़ी हुई दाढ़ी और जटाओं और फर्राटे से निकलती हिंदी सुनकर कोई नहीं कह सकता कि वो विदेशी हैं और अब तो शायद वो भी खुद को जर्मनी से अधिक भारत का मानते हैं. बीबीसी रेडियो सुनने के शौकीन दत्त भारती मोक्ष तो प्राप्त करना चाहते हैं लेकिन साथ ही उनकी एक छोटी सी ख्वाहिश है कि उन्हें कोई एक छोटा सा रेडियो दे दे ताकि वो उस पर ख़बरें सुन सकें. | इससे जुड़ी ख़बरें सदी का पहला अर्ध-कुंभ शुरु26 जनवरी, 2004 | भारत और पड़ोस पहले दिन का स्नान शांतिपूर्ण संपन्न03 जनवरी, 2007 | भारत और पड़ोस अर्ध कुंभ का पहला शाही स्नान संपन्न15 जनवरी, 2007 | भारत और पड़ोस अर्ध कुंभ के मद्देनज़र 80 कारखाने बंद15 जनवरी, 2007 | भारत और पड़ोस अर्धकुंभ में फ़ोटोग्राफरों पर कड़ी 'नज़र'16 जनवरी, 2007 | भारत और पड़ोस कुंभ मेले के लिए पानी छोड़ा गया15 दिसंबर, 2006 | भारत और पड़ोस शाही स्नान पर भ्रम की स्थिति14 जनवरी, 2007 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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