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सदी का पहला अर्ध-कुंभ शुरु
इस सदी का पहला अर्द्धकुंभ हरिद्वार में शुरू हो गया है. इस अवसर पर स्नान के लिए देश के कोने-कोने से बड़ी संख्या में लोग हरिद्वार आए हैं. बसंत पंचमी को इसका पहला महत्वपूर्ण स्नान था. हरिद्वार में हर की पैड़ी इन दिनों 'गंगा मैया की जय' और 'हर हर गंगे' के घोष से गूंज रही है. जगह जगह लोग गंगा की आरती पूजा और स्नान कर रहे हैं. खासकर ब्रह्मकुंड और गऊघाट में एक डुबकी लगाने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ रही है. महाराष्ट्र के नागपुर से आईं गायत्री देवी कहती हैं, “ब्रह्मकुंड में तो अमृत बरसता है, मैं तो नासिक के कुंभ में भी गई हूं लेकिन यहां का अलग ही महत्व है. हर की पैड़ी में इसलिए दुनिया मरती-खपती है क्योंकि यहां देवता भी नहाते हैं, साधू महात्मा भी नहाते हैं इसलिए पब्लिक भी यहीं नहाना चाहती है.” भारत में चार स्थानों हरिद्वार, नासिक उज्जैन और इलाहाबाद में कुंभ होता है. प्रदूषण की सच्चाई भी छोटी गंगा के प्रति इस आस्था के आगे लोगों को गंगा के पानी के प्रदूषण की सच्चाई भी छोटी लगती है. जब गुजरात के कच्छ से आए उदयसिंह कहते हैं, “गंगा ऊपर से भले ही मैली दिखती हो लेकिन जैसे फिल्टर पानी को साफ करता है गंगा भी आदमी के जनम-जनम के पाप धोकर उसे निर्मल बना देती है.” ऐसा नहीं है कि ये विचार सिर्फ भारतीयों के ही हैं. इटली से आई सिल्वाना और उनके मित्र मेले की भीड़भाड़ से अलग एक शांत से घाट पर बैठकर गंगा को निहार रहे हैं.
सिल्वाना कहती हैं, “गंगा की आवाज़ को सुनना और उसकी सुगंध को महसूस करना एक दिव्य अनुभव है. मैं अपने सभी दोस्तों-परिचितों को यहां आने की सलाह दूंगी. ये बात अनुभव और प्रयोग से ही समझी जा सकती है.” अर्द्घकुंभ मेले पर चूंकि अखाड़े, जमातें और नगा साधू नहीं होते हैं इसलिए इसे यात्री स्नान का मेला माना जाता है. पहला मेला मेलाक्षेत्र हरिद्वार से लेकर ऋषिकेश तक फैला है. 26 जनवरी से 5 मई तक चलने वाले इस मेले में एक करोड़ लोगों के आने की उम्मीद है.
इस दौरान स्नान के 12 महत्वपूर्ण दिन हैं. अलग राज्य बनने के बाद पहली बार उत्तरांचल सरकार इतने बड़े मेले का आयोजन कर रही है. मेला बजट की 135 करोड़ की राशि केंद्र ने दी है. मेला क्षेत्र में सुरक्षा के कड़े इंतज़ांम किए गए हैं. अपर मेला अधिकारी केसी पंत के अनुसार, “किसी भी दुर्घटना या आतंकवादी घटना की आशंका से निपटने के लिए रिवर पुलिस और बम स्कवायड को तैनात किया गया है.” समझा जा रहा है कि बसंत पंचमी की तुलना में महाशिवरात्रि और बैसाखी के पर्वों के दौरान हरिद्वार में ज़्यादा भीड़ होगी. |
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