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शनिवार, 20 जनवरी, 2007 को 12:40 GMT तक के समाचार
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दक्षिणी नेपाल में जातीय हिंसा, तनाव
नेपाल में अनेक लोगों के पास हथियार हैं
माओवादियों ने हथियार सौंप दिए हैं
नेपाल के दक्षिणी हिस्से में शुक्रवार को राजनीतिक हिंसा में दो लोगों के मारे जाने के बाद शनिवार को भी तनाव बरक़रार था.

इस हिंसा के बाद शनिवार को आम हड़ताल का आहवान किया गया था.

यह राजनीतिक हिंसा ऐसे माहौल में हुई है जब कुछ ही दिन पहले माओवादी विद्रोहियों ने अपने हथियार संयुक्त राष्ट्र की निगरानी में सौंप दिए और उन हथियारों को बक्सों में बंद कर दिया गया.

ये झड़पें नेपाल के दक्षिणी हिस्से में हुई जहाँ जातीय तनाव लगातार बढ़ता नज़र आ रहा है.

राजधानी काठमांडू में बीबीसी संवाददाता चार्ल्स हैवीलैंड का कहना है कि इस हिंसा से यह पता चलता है कि भारतीय सीमा के निकटवर्ती इलाक़े में लोगों के बीच नाराज़गी बढ़ती जा रही है. इस इलाक़े में रहने वाले लोगों को मधेसी भी कहा जाता है.

इस इलाक़े में रहने वाले लोगों में एक बड़ी संख्या भारतीय मूल के लोगों की है और यह मैदानी इलाक़ा है. इन लोगों को लंबे समय से शिकायतें रही हैं कि नेपाल सरकार ने उनकी अनदेखी रही है और उनकी समस्याओं और विकास पर ध्यान नहीं दिया गया है.

बहुत से लोगों को नेपाली राष्ट्रीयता भी देने से इनकार किया गया है हालाँकि वे लोग वहाँ दशकों से रह रहे हैं.

इस सप्ताह के आरंभ में कुछ नेपाली अधिकारियों ने राजधानी काठमांडू में कुछ मधेसी नेताओं को गिरफ़्तार कर लिया था जो देश के नए संविधान के ख़िलाफ़ प्रदर्शन कर रहे थे. उनका आरोप है कि नए संविधान में मधेसी समुदाय के लोगों के अधिकारों की अनदेखी की गई है.

मधेसी नेताओं की गिरफ़्तारियों के बाद शुक्रवार को दक्षिणी ज़िले सिराहा में प्रदर्शन और चक्का जाम शुरू हो गया. स्थानीय लोगों का कहना है कि छह साल के एक लड़के को माओवादियों के एक गुट ने गोली मार दी. माओवादी विद्रोही वहाँ से दो मिनी बसों में गुज़रने की कोशिश कर रहे थे.

एक अन्य चरमपंथी गुट ने एक व्यक्ति को बाहर निकालकर उसकी हत्या कर दी. यह गुट माओवादी विद्रोही संगठन से अलग होकर गठित हुआ है और इसने मधेसी समुदाय के अधिकारों की रक्षा के लिए हिंसक अभियान चलाना शुरू किया है.

इस संगठन का अभियान उन लोगों के भी ख़िलाफ़ है जो पहाड़ी इलाक़ों से आकर मैदानी इलाक़ों में बस गए हैं.

ख़बरों में कहा गया है कि इस व्यक्ति को मारने वाले बंदूकधारी ने ख़ुद को भी गोली मार ली.

इस हिंसा से पता चलता है कि हालाँकि माओवादी विद्रोहियों के हथियार बक्सों में बंद किए जा रहे हैं लेकिन अब भी बहुत से हथियार लोगों के पास मौजूद हैं.

नेपाल में जातीय हिंसा की घटनाएँ न के बराबर होती थीं लेकिन अब इस संतुलन में बदलाव हो रहा है.

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