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भारत में बाल कुपोषण अभियान 'विफल' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने चेतावनी दी है कि भारत में बच्चों के कुपोषण की दर दुनिया में सबसे अधिक हो गई है. विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों को भेजे एक पत्र में मनमोहन सिंह ने कहा कि स्वास्थ्य और पोषण की स्थिति में सुधार के लिए एक व्यापक कार्यक्रम चलाए जाने की ज़रूरत है. अपने पत्र में प्रधानमंत्री ने कहा है कि इस कार्यक्रम का 'क्रियान्वयन बेहद ख़राब तरीके' से किया जा रहा है. प्रधानमंत्री ने कहा कि देश की एकीकृत बाल विकास सेवा योजना कुपोषण के स्तर को कम करने में विफल रही है. प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा,'' इस बात के पर्याप्त प्रमाण हैं कि इस कार्यक्रम से छह साल से कम उम्र के बच्चों के पोषण की स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है.'' उन्होंने कहा कि हमारे यहाँ छह साल से कम उम्र के कुपोषित बच्चों की संख्या दुनिया में सबसे अधिक है. उनका कहना था,'' ये चौंकानवाले आँकड़े हैं और इस स्थिति से निबटने के लिए तत्काल कार्रवाई किए जाने की ज़रूरत है.'' ग़ौरतलब है कि इस योजना के तहत पाँच करोड़ बच्चे आते हैं. गंभीर स्थिति संयुक्त राष्ट्र बालकोष यानि यूनिसेफ़ ने मई में अपनी रिपोर्ट में कहा था कि कुपोषण के शिकार सबसे अधिक बच्चे दक्षिण एशिया में रहते हैं और इनकी सबसे बड़ी संख्या भारत में है.
यूनिसेफ़ की रिपोर्ट कहती है कि पांच साल से कम के 25 प्रतिशत बच्चों के पास खाने को पर्याप्त भोजन नहीं है और दुखद तथ्य ये है कि ऐसे बच्चों में से 50 प्रतिशत बच्चे सिर्फ़ तीन देशों भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश में रहते है. यूनिसेफ़ की रिपोर्ट में भारत और चीन की तुलना की गई थी. इसमें कहा गया था कि बच्चों को पर्याप्त भोजन मुहैया कराने की दिशा में पिछले 15 वर्षों में चीन में अभूतपूर्व सफलता प्राप्त की है जबकि भारत का प्रदर्शन अत्यंत ख़राब रहा है. रिपोर्ट के अनुसार भारत में पांच साल से कम के आधे से अधिक बच्चों को पर्याप्त भोजन नहीं मिलता है. | इससे जुड़ी ख़बरें महाराष्ट्र में कुपोषण से बड़ी संख्या में मौतें27 अगस्त, 2005 | भारत और पड़ोस श्योपुर में 58 फ़ीसदी बच्चे कुपोषित27 नवंबर, 2006 | भारत और पड़ोस ग़रीबी के ख़िलाफ़ सबसे बड़ा अभियान28 जनवरी, 2005 | पहला पन्ना भुखमरी से मौत की संख्या में बढ़ोत्तरी09 दिसंबर, 2004 | पहला पन्ना कुपोषण से बच्चों की बढ़ती मौत07 जुलाई, 2004 | भारत और पड़ोस 35 करोड़ बच्चे बेहद ग़रीब22 अगस्त, 2005 | पहला पन्ना 'विकास के फ़ायदे ग़रीबों तक नहीं'07 सितंबर, 2005 | भारत और पड़ोस ग़रीबी, विकास और संयुक्त राष्ट्र13 सितंबर, 2005 | पहला पन्ना | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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