|
माओवादियों ने हथियार डालने शुरू किए | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
नेपाल में माओवादियों ने संयुक्त राष्ट्र की निगरानी में बुधवार से हथियार डालने शुरु कर दिए हैं. एक दशक के संघर्ष विराम के बाद 2006 में माओवादियों और सरकार के बीच शांति समझौता हुआ था जिसमें माओवादियों का हथियार डालना एक प्रमुख शर्त थी. संयुक्त राष्ट्र के पर्यवेक्षकों ने माओवादी विद्रोहियों के हथियारों को जमा करना शुरु कर दिया है. पर्यवेक्षकों को इस काम में सेवानिवृत्त गोरखा सिपाही सहायता कर रहे हैं. ये नेपाली सिपाही भारतीय और ब्रितानी सेना में काम कर चुके हैं. इस काम के लिए सौ से अधिक पूर्व गोरखा सैनिकों का चयन किया गया है जो माओवादियों के हथियारों का पंजीकरण करेंगे और उन्हें जमा करेंगे. इसके बाद बराबर संख्या में नेपाल की सेना के हथियार भी लाकर यहाँ बंद कर दिए जाएँगे. संसद का हिस्सा
दूसरी ओर माओवादी विद्रोही नेपाल की अंतरिम संसद का हिस्सा हो गए हैं. नेपाल की 330 सदस्यों वाली संसद में 83 माओवादी नेताओं ने शपथ ले ली है. इससे पहले संसद ने ऐतिहासिक अंतरिम संविधान को मंज़ूरी दे दी थी जिसमें यह प्रावधान किया गया कि विद्रोही माओवादी भी संसद का हिस्सा होंगे. सात राजनीतिक दलों की अंतरिम सरकार और माओवादी विद्रोहियों के बीच साल 2006 में हुए समझौते के बाद विद्रोहियों ने हथियार छोड़कर सरकार में शामिल होना स्वीकार कर लिया था. यह इस साल होनेवाले आम चुनाव से पहले अंतरिम व्यवस्था है. | इससे जुड़ी ख़बरें नेपाल में अंतरिम संविधान पर सहमति16 दिसंबर, 2006 | भारत और पड़ोस सरकारी नियुक्तियों के विरोध में 'नेपाल बंद'19 दिसंबर, 2006 | भारत और पड़ोस पूर्व गोरखा सैनिक संभालेंगे ज़िम्मेदारी22 दिसंबर, 2006 | भारत और पड़ोस नेपाल में आज से काम संभालेंगे पर्यवेक्षक08 जनवरी, 2007 | भारत और पड़ोस नेपाल में हज़ारों माओवादी बीमार हुए12 दिसंबर, 2006 | भारत और पड़ोस नेपाल में निरस्त्रीकरण समझौता28 नवंबर, 2006 | भारत और पड़ोस नेपाल में ऐतिहासिक शांति समझौता21 नवंबर, 2006 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
| |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||