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'आसियान के साथ सहयोग की ज़रूरत' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा है कि भारत दक्षिण-पूर्वी एशिया के देशों के साथ गहरे आर्थिक संबंध बनाना चाहता है. प्रधानमंत्री ने ये बात रविवार को केबू, फिलीपींस में चल रहे पाँचवे भारत-आसियान सम्मेलन में कही. मनमोहन सिंह ने कहा कि अपनी लुक ईस्ट नीति के तहत भारत दक्षिण-पूर्वी एशियाई देशों के संगठन आसियान और उसके सदस्यों के साथ मुक्त व्यापार या व्यापक आर्थिक सहयोग समझौते की तरफ बढ़ना चाहता है. उन्होंने कहा कि आसियान के साथ भारत का व्यापार 1990 में क़रीब 2.4 अरब डॉलर रुपए था जो 2005 में बढ़कर लगभग 23 अरब डॉलर हो गया. उन्होंने कहा, “पिछले साल भारत के आसियान के साथ हो रहे व्यापार में 30 फ़ीसदी की वृद्धि दर्ज़ की गई और आशा है कि 2007 के अंत तक व्यापार लगभग 30 अरब डॉलर के आँकड़े को भी पार कर सकता है.” प्रधानमंत्री ने कहा कि क्षेत्रीय आर्थिक सहयोग के लिए भारत आसियान देशों के साथ बेहतर संपर्क के लिए खुले आकाश की नीति पर भी चर्चा करना चाहता है. भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि भारत और आसियान देश एक-दूसरे का कृषि, ऊर्जा, स्वास्थ्य, सूचना तकनीक, रक्षा, अंतरिक्ष विज्ञान और आतंकवाद के ख़िलाफ संघर्ष जैसे मुद्दों पर सहयोग करते हैं. भारत-चीन वार्ता
इससे पहले भारतीय प्रधानमंत्री चीन के प्रधानमंत्री वेन जियाबाओ से मुलाक़ात की. बारहवें आसियान सम्मेलन के लिए फ़िलीपिन्स पहुँचे दोनों नेताओं के बीच सीमा विवाद सहित कई विषयों पर चर्चा हुई. सीमा विवाद पर भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार एमके नारायणन और चीन के उपप्रधानमंत्री दाई बिंगुओ के बीच अगले हफ़्ते दिल्ली में होने वाली चर्चा से पहले इस मुलाक़ात को अहम माना जा रहा है. भारत की ओर से कहा गया है कि दोनों देशों के बीच बातचीत अप्रैल 2005 में हुए समझौते के अनुरुप ही आगे बढ़ेगी. समाचार एजेंसियों ने भारतीय अधिकारियों के हवाले से कहा है कि दोनों देशों ने कहा है कि विशेष प्रतिनिधियों को अपनी चर्चा में सीमा विवाद को तेज़ी से सुलझाने की कोशिश करनी चाहिए. उल्लेखनीय है कि पिछले साल नवंबर में चीनी राष्ट्रपति हू जिंताओ की दिल्ली यात्रा के दौरान दोनों देशों ने तय किया था कि सीमा विवाद को प्राथमिकता के आधार पर सुलझाना चाहिए और इस विवाद को दोनों देशों के संबंधों के बीच कोई रोड़ा नहीं बनने देना चाहिए. समाचार एजेंसी यूएनआई के अनुसार राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार एमके नारायणन ने कहा है कि दोनों देशों के बीच सीमा विवाद के विषय में काफ़ी बात हुई है. उनका कहना था कि चीन मानता है कि विवाद इतिहास में खींची गई सीमाओं को लेकर है जबकि भारत कहता है कि इतिहास में कोई सीमा थी ही नहीं. | इससे जुड़ी ख़बरें पाकिस्तान-चीनः कितने दूर कितने पास26 नवंबर, 2006 | भारत और पड़ोस चीन-पाकिस्तान के बीच अहम समझौते24 नवंबर, 2006 | भारत और पड़ोस भारत चीन सीमा विवाद सुलझाएँगे15 सितंबर, 2005 | भारत और पड़ोस सहयोगी हैं, प्रतिद्वंद्वी नहीं- जियाबाओ12 अप्रैल, 2005 | भारत और पड़ोस सिक्किम भारत का हिस्सा:चीन11 अप्रैल, 2005 | भारत और पड़ोस तिब्बती युवक ने गुस्सा ज़ाहिर किया10 अप्रैल, 2005 | भारत और पड़ोस उतार-चढ़ाव से गुज़रते भारत-चीन संबंध09 अप्रैल, 2005 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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