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सोमवार, 11 अप्रैल, 2005 को 07:56 GMT तक के समाचार
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सिक्किम भारत का हिस्सा:चीन
चीनी और भारतीय प्रधानमंत्री
दोनों नेताओं के बीच बंद कमरे में एक घंटे तक बातचीत हुई
चीन के प्रधानमंत्री वेन जियाबाओ की भारत यात्रा के समापन पर भारत के विदेश सचिव ने कहा है कि चीन ने सिक्किम को स्पष्ट रूप से भारत का अंग मान लिया है.

भारतीय विदेश सचिव श्याम सरन ने कहा,"एक महत्वपूर्ण पहलू की तरफ़ आपका ध्यान आकर्षित करना चाहूंगा कि चीन ने बहुत ही स्पष्ट शब्दों में सिक्किम को भारत का हिस्सा मान लिया है."

इसे भारत और चीन के बीच सिक्किम को लेकर लंबे समय चले आ रहे विवाद का अंत माना जा रहा है.

 एक महत्वपूर्ण पहलू की तरफ़ आपका ध्यान आकर्षित करना चाहूंगा कि चीन ने बहुत ही स्पष्ट शब्दों में सिक्किम को भारत का हिस्सा मान लिया है
श्याम सरन, भारतीय विदेश सचिव

भारत और चीन के प्रधानमंत्रियों के बीच बातचीत के बाद सीमा विवाद को सुलझाने के तरीक़ो पर भी सहमति हुई है.

भारतीय विदेश मंत्रालय ने चीनी प्रधानमंत्री वेन जियाबाओ की भारत यात्रा को 'बेहद सफल' बताया है, दोनों नेताओं की बातचीत के बाद एक साझा बयान भी जारी किया गया है जिसमें कहा गया है कि "भारत और चीन के रिश्ते एक नए दौर में प्रवेश कर गए हैं और दोस्ती एक नया अध्याय शुरू हुआ है."

दोनों देशों ने संतोष ज़ाहिर किया है कि सीमा विवाद को सुलझाने की दिशा में प्रगति हो रही है, साझा बयान में कहा गया है कि सीमा विवाद को उचित, समतापूर्ण और दोस्ताना बातचीत के ज़रिए सुलझाया जाएगा.

इस बात पर भी सहमति बनी कि जब तक सीमा विवाद का निबटारा नहीं हो जाता तब तक दोनों देश सीमा पर शांति बनाए रखेंगे, दोनों प्रधानमंत्रियों ने इस बात पर भी प्रसन्नता ज़ाहिर की कि सीमा विवाद को सुलझाने के तरीक़ों पर सहमति हो गई है.

बीबीसी संवाददाता संजीव श्रीवास्तव का कहना है कि दोनों देशों के रूख़ से लगता है कि वे दशकों पुराने सीमा विवाद को व्यापारिक साझीदारी पर हावी नहीं होने देना चाहते.

 भारत और चीन के रिश्ते एक नए दौर में प्रवेश कर गए हैं और दोस्ती एक नया अध्याय शुरू हुआ है
भारत चीन साझा बयान

भारत और चीन के बीच पिछले वर्ष 14 अरब डॉलर का व्यापार हुआ, इस तरह चीन अमरीका के बाद भारत का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझीदार है, और दोनों देश इसे अगले पाँच वर्षों में दोगुना करना चाहते हैं.

दोनों देशों के बीच लोगों की आवाजाही बढ़ाने, शिक्षा और विज्ञान के क्षेत्र में सहयोग करने और सांस्कृतिक संबंधों को प्रगाढ़ बनाने पर भी सहमति हुई.

इसी के तहत भारत और चीन के बीच सीधी विमान सेवाओं की संख्या बढ़ाने पर भी सहमति हुई, यह भी तय किया गया कि वर्ष 2006 को 'भारत-चीन मैत्री वर्ष' के रूप में मनाया जाएगा.

अंतरराष्ट्रीय राजनीति

दोनों देशों ने दुनिया के दो बड़े देशों के रूप में अपनी अंतरराष्ट्रीय भूमिका पर भी चर्चा की और साझा बयान में कहा गया कि भारत और चीन नई व्यवस्था बनाने में मिलकर महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं.

दोनों देशों ने कहा कि वे अंतरराष्ट्रीय विवादों के निबटारे के मामले में संयुक्त राष्ट्र को सर्वोच्च संस्था मानते हैं और उसे मज़बूत करने के लिए हरसंभव प्रयास करते रहेंगे.

भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता की दावेदारी की चर्चा भी की जिसके बारे में चीन की ओर कहा गया कि वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की अहमियत को समझता है और उसकी भूमिका की सराहना करता है.

लेकिन चीन के प्रधानमंत्री ने भारत को कोई स्पष्ट आश्वासन नहीं दिया कि वे भारतीय दावेदारी का समर्थन करेंगे.

भारत ने स्पष्ट किया है कि वह तिब्बत को चीन का अंग मानता है और भारत में रह रहे तिब्ब्ती लोगों को चीन के ख़िलाफ़ राजनीतिक अभियान चलाने की अनुमति नहीं दी गई है.

इसके अलावा भारत ने यह भी माना कि वह 'एक चीन' की नीति का हामी रहा है और उस नीति में कोई बदलाव नहीं किया गया है.

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