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गुरुवार, 11 जनवरी, 2007 को 13:02 GMT तक के समाचार
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'मारकर लाश तेज़ाब में डाल देता था'
जावेद इक़बाल
जावेद पर आरोप था कि उसने लगभग 100 बच्चों की हत्या करके शव तेज़ाब में गला दिए
पाकिस्तान के पंजाब प्रांत की राजधानी लाहौर में एक ऐसा सनसनीख़ेज मामला सामने आया जिसमें एक व्यक्ति ने 100 बच्चों को मारने का दावा किया.

इतना ही नहीं, उसका दावा था कि उसने सभी बच्चों को मारकर उनके शवों को तेज़ाब में गलाकर नाले में बहा दिया और कोई सबूत नहीं छोड़ा. जब पड़ोसियों ने नाले में बदबू आने की शिकायतें कीं तो उसने रावी नदी में बहाना शुरू कर दिया.

हालाँकि जावेद इक़बाल नामक इस व्यक्ति ने कहा कि उसने कुछ बच्चों के कपड़े और जूते यादगार के लिए रखे. उसने यह भी दावा किया था कि 50 बच्चों को मारने के बाद उसने एक कैमरा ख़रीदा और बाद में जिन बच्चों को भी मारा, उनकी तस्वीरें भी खींचीं.

40 वर्षीय जावेद इक़बाल मुग़ल नामक इस व्यक्ति ने दिसंबर 1999 में पुलिस के सामने आत्मसमर्पण किया और बच्चों को मारने की बाद स्वीकार की. उससे पहले जावेद इक़बाल ने अपने जुर्म के बारे में पाकिस्तान के एक बड़े अख़बार दैनिक जंग को भी जानकारी भेजी थी.

जावेद इक़बाल ने दावा किया था कि एक बच्चे को मारकर उसके शव को तेज़ाब में गलाकर सबूत मिटाने के लिए क़रीब 120 रुपए का ख़र्च आता था. उसका कहना था कि उसने अपने साथ हुई पुलिस की बदसलूकी का बदला लेने के लिए ऐसा किया.

पाकिस्तान की एक अदालत ने मार्च 2000 में जावेद इक़बाल को 100 बच्चों की हत्या का दोषी क़रार देते हुए मौत की सज़ा सुनाई थी. जावेद के अलावा एक अन्य व्यक्ति को भी मौत की सज़ा सुनाने के अलावा दो लोगों को जेल भेजा था.

जज अल्लाह बख़्श रांझा ने इस्लामी क़ानून के तहत सज़ा सुनाते हुए कहा कि जावेद इक़बाल और अन्य अभियुक्तों के जीवन का अंत भी इसी तरह होना चाहिए जिस तरह उन्होंने 100 बच्चों की ज़िंदगी ख़त्म की.

जज अल्लाह बख़्श रांझा ने कहा था, "तुम लोगों को उन माता-पिताओं के सामने फाँसी पर लटकाया जाएगा जिनके बच्चों को तुम लोगों ने मारा है."

हालाँकि सरकार ने इस फ़ैसले के ख़िलाफ़ अपील की बात कही थी क्योंकि देश के आम क़ानून में इस तरह की सज़ा का कोई प्रावधान नहीं है. आंतरिक सुरक्षा मंत्री ने यह भी कहा था कि अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार क़ानूनों के तहत इस तरह की सज़ा नहीं दी जा सकती.

जावेद इक़बाल और अन्य लोगों को सज़ा दिए जाने से पहले ही सात अक्तूबर 2001 को ख़बर मिली की जावेद इक़बाल ने जेल में ही ख़ुदकुशी कर ली हालाँकि उनकी ख़ुदकुशी के बारे में भी सवाल उठे थे क्या वह वाक़ई ख़ुदकुशी थी या फिर...

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