BBCHindi.com
अँग्रेज़ी- दक्षिण एशिया
उर्दू
बंगाली
नेपाली
तमिल
मंगलवार, 26 दिसंबर, 2006 को 07:34 GMT तक के समाचार
मित्र को भेजेंकहानी छापें
आज भी छत की आस में हैं सुनामी पीड़ित

सुनामी पीडित
कई लोगों को अभी भी स्थायी आवास नहीं मिल सका है
हिंद महासागर में 26 दिसंबर 2004 को उठी सूनामी की लहरों से बेघर हुए कितने ही लोग आज भी अपने सिर पर एक स्थायी छत की आस में भटक रहे हैं.

ख़ुद सरकारी आकड़ों की मानें तो क़रीब 65 प्रतिशत लोगों को आज भी स्थायी निवास की सुविधा नहीं मिल सकी है.

जनसंगठनों की मानें तो स्थायी आवास के लिए भटक रहे सुनामी पीड़ितों का यह आकड़ा और भी ज़्यादा है.

हालांकि आवासीय राहत की तुलना में जीविका से जुड़े राहत कार्यों की स्थिति बेहतर रही है और नावों से लेकर दोबारा काम शुरु करने जैसे मामलों में लोगों ने कुछ राहत महसूस की है.

मंगलवार को इस हादसे को दो वर्ष पूरे हो गए हैं और इस अवसर पर दक्षिण भारत के सुनामी प्रभावित राज्यों में लोगों ने धार्मिक सभाएँ कीं, श्रद्धांजलि सभाएँ की और मोमबत्तियाँ जलाकर इस आपदा में मारे गए लोगों को याद किया.

लेकिन मृतकों को याद कर रहे इन लोगों में कहीं-कहीं पर राहत कार्यों को लेकर रोष भी है और इसे वो व्यक्त भी कर रहे हैं.

लोगों का कहना है कि जिस गति से राहत कार्य चलाए जाने चाहिए थे और आपदा में बेघर हुए लोगों को स्थायी आवास दिए जाने चाहिए थे, वैसा नहीं हुआ है.

शिकायत

कुछ ऐसे मामले भी सामने आए जिसमें एक ही मुखिया वाले तीन परिवारों को उनके अलग-अलग निवास दिए जाने की जगह एक साथ रहने के लिए कहा गया है जिससे लोगों को कई तरह की दिक्कतें पैदा हो रही हैं.

सुनामी के बाद
सुनामी लहरों की तबाही में दो लाख लोग मारे गए थे

हालांकि तमिलनाडु के कुड्डालुर ज़िले की स्थिति ऐसी नहीं है और सुनामी राहत कार्यों का जायज़ा लेने के लिए पिछले दिनों वहाँ पहुँची पूर्व अमरीकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन की यात्रा का पूरा लाभ यहाँ के सुनामी पीड़ितों को मिला है.

इस ज़िले के सभी बेघर हुए सुनामी पीड़ितों को सरकार की ओर से स्थायी निवास मुहैया कराए जा चुके हैं.

हाँ, मगर इसी ज़िले से लगे नागपट्टनम की स्थिति यहाँ से भिन्ने हैं. वहाँ लगभग 70 प्रतिशत सुनामी पीड़ित आज भी स्थायी निवास की आस में राहत के लिए बनाए गए वैकल्पिक डेरों में रह रहे हैं.

ग़ौरतलब है कि दिसंबर, 2004 में आई इन सुनामी लहरों से क़रीब दो लाख लोगों को अपनी जान गँवानी पड़ी थी.

इससे जुड़ी ख़बरें
'सुनामी पीड़ित नए घर से नाख़ुश'
22 दिसंबर, 2006 | भारत और पड़ोस
'सुनामी प्रभावितों के साथ भेदभाव हुआ'
02 फ़रवरी, 2006 | भारत और पड़ोस
'सुनामी पीड़ितों के लिए मकान समय पर'
17 अगस्त, 2005 | भारत और पड़ोस
सूनामी के बाद आँखें आज भी नम हैं
04 जून, 2005 | भारत और पड़ोस
पुनर्वास में काफ़ी समय लगेगा:अय्यर
09 जनवरी, 2005 | भारत और पड़ोस
सुर्ख़ियो में
मित्र को भेजेंकहानी छापें
मौसम|हम कौन हैं|हमारा पता|गोपनीयता|मदद चाहिए
BBC Copyright Logo^^ वापस ऊपर चलें
पहला पन्ना|भारत और पड़ोस|खेल की दुनिया|मनोरंजन एक्सप्रेस|आपकी राय|कुछ और जानिए
BBC News >> | BBC Sport >> | BBC Weather >> | BBC World Service >> | BBC Languages >>