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शुक्रवार, 15 दिसंबर, 2006 को 16:52 GMT तक के समाचार
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असम में मारा गया 'लादेन'
हाथी
असम में बहुत बड़ी तादाद में हाथी पाए जाते हैं
असम में वन विभाग के अधिकारियों के आदेशानुसार 'लादेन' को मार दिया गया है.

ये 'लादेन' अल क़ायदा के शीर्ष नेता नहीं बल्कि असम के जंगलों में पिछले कई महीनों से आतंक मचा रहा पागल हाथी था जिसने कई लोगों की जानें ले ली थी.

सोनितपुर ज़िले के बेहाली चाय बागान के निकट पेशेवर शिकारी द्विपेन फूकन ने पागल हाथी 'लादेन' पर छह गोलियाँ दागीं और मार गिराया.

असम के मुख्य वन्यजीव अधिकारी एमसी मालाकार ने बीबीसी को बताया कि गाँववालों ने नगाड़े बजाकर और आग जलाकर पागल हाथी लादेन को डरा दिया. इससे लादेन चाय बागान के कोने में आ गया जहाँ से उसे मारना आसान हो गया.

मालाकार ने कहा," गाँव वालों ने जब अपना काम कर दिया तो जंगल के सुरक्षाकर्मियों ने हवा में गोलियाँ दागकर लादेन को शिकारी फूकन की तरफ़ भेज दिया. लादेन को मारना आसान नहीं था क्योंकि पागल हाथी तेज़ी से हमला कर देता है. लेकिन फूकन लंबे समय से हाथी के पेशेवर शिकारी हैं."

शिकार

असम के वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार 'लादेन' पिछले छह महीनों में अब तक 14 लोगों को कुचल चुका था.

 लादेन को मारना आसान नहीं था क्योंकि पागल हाथी तेज़ी से हमला कर देता है. लेकिन फूकन लंबे समय से हाथी के पेशेवर शिकारी हैं
वन्यजीव अधिकारी मालाकार

इस नर हाथी ने पिछले दिनों एक महिला को कुचलकर मार डाला था जिसके बाद अधिकारियों ने उसे मार डालने के आदेश दिया था.

असम विधानसभा ने इस हाथी को मारने के लिए 31 दिसंबर तक का समय तय किया था.

पिछले कुछ समय से 'लादेन' को मारने की कोशिशें चलती रही हैं लेकिन वह शिकारियों को चकमा देता रहा है.

असम के सोनितपुर इलाक़े के ग्रामीणों में पिछली गर्मियों से ही 'लादेन' का ख़ासा आतंक था और लोगों ने वन विभाग से अपील की थी कि उन्हें इस हाथी से मुक्ति दिलाई जाए.

आतंक

पूर्वोत्तर भारतीय राज्य असम के जंगलों में बहुत बड़ी संख्या में हाथी पाए जाते हैं.

सोनितपुर इलाक़े में पहले भी पागल हाथियों का काफ़ी आतंक रहा है. 1992 में एक पागल हाथी ने एक ही दिन में 12 लोगों को मार डाला था.

असम के वन्यजीवों के विशेषज्ञ अनिरुद्ध चौधरी ने कहा कि जब अपने इलाकों में लोगों की घुसपैठ से जानवर नाराज़ हो जाते हैं तब इस तरह का संघर्ष देखने को मिलता है. वैसे असम में हाथियों की संख्या भी काफ़ी बढ़ गई है जिससे ये समस्याएँ सामने आती हैं.

इस समस्या के चलते वर्ष 2001 से अब तक असम में 239 लोगों और 265 हाथियों की जान जा चुकी है. गाँववालों ने इन हाथियों के आतंक से परेशान होकर जलस्रोतों में ज़हर मिला दिया था.

असम वन विभाग ने जंगली जानवरों को नियंत्रम में रखने के लिए कुंकी यानी पालतू हाथी पालना भी शुरू किया था लेकिन कोई कोशिश काम नहीं आई और अभी भी ये जंगली जानवर उत्पात मचाते हैं.

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