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'कश्मीर पर दावा छोड़ सकता है पाक' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पाकिस्तान के राष्ट्रपति जनरल परवेज़ मुशर्रफ़ ने कहा है अगर भारत उनके प्रस्तावों को मान ले तो उनका देश कश्मीर पर अपना दावा छोड़ने के लिए तैयार है. पाकिस्तान के राष्ट्रपति जनरल परवेज़ मुशर्रफ़ ने कश्मीर समस्या के समाधान के लिए चारसूत्रीय फार्मूला सुझाया है. वहीं भारत के विदेश राज्य मंत्री आनंद शर्मा ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है, "भारतीय प्रधानमंत्री ने कहा है कि नक्शे को फिर से नहीं बनाया जा सकता लेकिन सीमाओं को बेमानी किया जा सकता है. मुझे लगता है कि यही भारत का पक्ष है." विदेश राज्य मंत्री ने कहा कि ये पूरे क्षेत्र के हित में होगा कि ये विवाद ख़त्म हो जाए ताकि आर्थिक विकास के फल लोगों तक पहुँच सकें. एक निजी भारतीय टेलीविज़न चैनल को दिए इंटरव्यू में उन्होंने पहली बार कहा कि पाकिस्तान कश्मीर पर अपना दावा छोड़ने के लिए तैयार है. जनरल मुशर्रफ़ ने कहा कि चारसूत्रीय फार्मूले के तहत पाकिस्तान कश्मीर में जनमत संग्रह की पुरानी माँग छोड़ देगा और इससे संबंधित संयुक्त राष्ट्र के सभी प्रस्तावों को भी भूलने के लिए तैयार है. उन्होंने कश्मीर पर पाकिस्तान और भारत के रुख़ का ज़िक्र करते हुए कहा, "हम दोनों अभी उसी रुख़ पर हैं जहाँ 1948 में थे. लेकिन मैं कहता हूँ कि दोनों को वो सभी बातें छोड़ने के लिए तैयार होना चाहिए जो हम कहते आए हैं." चार सूत्रीय फार्मूला मुशर्ऱफ़ ने कश्मीर मामले के समाधान के लिए जो चार सूत्रीय फार्मूला सुझाया है उसमें पहला है कश्मीर की सीमा में कोई परिवर्तन नहीं करना. उन्होंने कहा, सीमाएँ वही होंगी लेकिन लोगों को इस क्षेत्र में आने-जाने की अनुमति होगी. उनका दूसरा सुझाव है कि पूरे क्षेत्र को स्वायत्तता दी जाए या ‘स्वशासन’ हो लेकिन आजादी नहीं.
कश्मीर की आजादी के सवाल पर उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ही नहीं बल्कि भारत भी इसके ख़िलाफ़ है. तीसरे चरण में धीरे धीरे इस क्षेत्र से सेना हटा ली जाए. मुशर्रफ़ ने चौथे सुझाव के तहत साझा निगरानी प्रणाली बनाने की बात कही जिसमें भारत, पाकिस्तान और कश्मीर का प्रतिनिधित्व होगा. जनमत संग्रह और संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों को पीछे छोड़ने के सवाल पर उन्होंने कहा, “सुनिए, मैं मानता हूँ कि जब आप बात कर रहे होते हैं और शांति के लिए आगे बढ़ते हैं तो इसका क्या मतलब है. इसका मतलब है समझौता. इसके बिना आप किसी समस्या के समाधान के लिए आगे नहीं आ सकते.” वो कहते हैं, “समझौते से आपका क्या मतलब है? समझौता तब तक नहीं हो सकता जब तक कि आप पीछे नहीं हटते. अग़र भारत इस सुझाव को मान ले तो हम पीछे हट जाएँगे.” सामरिक मामलों के जानकार सी राजा मोहन ने इन प्रस्तावों का स्वागत किया. उन्होंने कहा, "ये प्रस्ताव कश्मीर पर भारत के रुख़ के क़रीब है. भारत को इसका स्वागत करना चाहिए." भारतीय संसद पर दिसंबर 2001 में हुए हमले के बाद दोनों देशों के रिश्ते बिगड़ गए थे और इसके अगले ही साल सीमा पर सैनिकों की संख्या बढ़ा दी गई थी. हालाँकि जनवरी 2004 में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और राष्ट्रपति जनरल मुशर्रफ़ के बीच हुई शिखर बैठक के बाद बातचीत का सिलसिला फिर शुरू हुआ. पिछले महीने दोनों देशों के बीच आतंकवाद के ख़िलाफ़ साझा तंत्र बनाने पर भी सहमति बनी है. |
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