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दुर्लभ प्रजाति के हिरणों का शिकार | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
राजस्थान के बीकानेर ज़िले में शनिवार को एक संरक्षित दुर्लभ प्रजाति के सात हिरणों के शिकार का मामला सामने आया है. पुलिस ने इस पर कार्रवाई करते हुए शिकारियों के दल के एक सदस्य को मुठभेड़ में मार गिराया है. पुलिस को इन लोगों के बारे में बिश्नोई समाज के लोगों ने जानकारी दी जिनकी पहचान पर पुलिस ने इन लोगों के ठिकाने पर छापा मारा. इन लोगों पर आरोप लगाया गया है कि इन्होंने एक दुर्लभ प्रजाति के सात हिरणों का शिकार करके उनकी हत्या कर दी है. संरक्षित प्रजाति हिरण की यह प्रजाति वन्य जीव संरक्षण क़ानून के तहत संरक्षित घोषित है और इसका शिकार करने पर तीन से सात वर्ष की सज़ा भी हो सकती है. बीकानेर के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि इस मामले में शिकारियों के ख़िलाफ़ वन्य जीव संरक्षण क़ानून के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है. पुलिस अधिकारी ने बताया कि मुठभेड़ के दौरान शिकारियों में से एक व्यक्ति घायल हो गया था जिसे नज़दीक के अस्पताल में भर्ती करा दिया गया था. अब उसकी स्थिति स्थिर बताई जा रही है. जानकारी के मुताबिक़ शिकार करने वाले ये लोग बावरिया जाति के हैं. इस जाति को पारंपरिक रूप से वन्य जीवों का शिकार करने के लिए जाना जाता है. पुलिस ने बताया कि शिकारियों का यह गिरोह पिछले कुछ महीनों से इस इलाक़े में सक्रिय है. बीकानेर ज़िले से पिछले कुछ महीनों में संरक्षित वन्य जीवों के शिकार के मामले सामने आते रहे हैं. | इससे जुड़ी ख़बरें 'पचास साल में समुद्री मछलियाँ ख़त्म?03 नवंबर, 2006 | विज्ञान सलमान के ख़िलाफ़ आरोप तय 19 जून, 2006 | भारत और पड़ोस सलमान ख़ान को पाँच साल की जेल10 अप्रैल, 2006 | भारत और पड़ोस कछुए अंडे देने के लिए पहुँचे मगर...26 फ़रवरी, 2006 | विज्ञान बाघों को बचाने की प्रधानमंत्री की अपील25 मई, 2005 | भारत और पड़ोस भारत में घटते बाघों की चिंता13 अप्रैल, 2005 | भारत और पड़ोस सरिस्का से ग़ायब होता वनराज17 फ़रवरी, 2005 | भारत और पड़ोस उत्तरांचल में नरभक्षी तेंदुओं का बढ़ता आतंक12 जनवरी, 2004 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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