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शुक्रवार, 24 नवंबर, 2006 को 13:44 GMT तक के समाचार
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मध्य प्रदेश में 'त्याग' की राजनीति

हिम्मत कोठारी
हिम्मत कोठारी झुग्गीवासियों के लिए दो हज़ार मकान बनवाने तक नंगे पाँव रहेंगे
मध्य प्रदेश में आजकल 'त्याग' की राजनीति चल रही है और सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी के तीन नेता 'नेक काम' का बीड़ा उठाकर जूता-चप्पल त्यागे हुए हैं.

प्रदेश के वन और परिवहन मंत्री हिम्मत कोठारी आजकल नंगे पाँव घूम रहे हैं. अब वह चरण पादुका तभी ग्रहण करेंगे जब रतलाम के झुग्गीवासियों के लिए दो हज़ार मकान बनवाने में कामयाब हो जाएँगे.

वन और परिवहन मंत्री ने अपने प्रण की घोषणा कुछ दिनों पहले प्रेस कॉंफ़्रेंस बुलाकर की थी. हालाँकि उस समय उन्होंने इसका कारण बताने से इनकार कर दिया था.

 नंगे पाँव रहने से मुझे पैर में कंकड़, शीशे चुभने और अधिक सर्दी-गर्मी में तकलीफ़ होती है लेकिन ये कष्ट मुझे याद दिलाता है कि मैने एक नेक काम का बीड़ा उठाया है.
हिम्मत कोठारी

हिम्मत कोठारी के अनुसार, नंगे पाँव रहने से उन्हें पैर में कंकड़, शीशे चुभने और अधिक सर्दी-गर्मी में तकलीफ़ होती है लेकिन यह कष्ट उन्हें याद दिलाता है कि उन्होंने एक नेक काम का बीड़ा उठाया है.

ऐसे ही एक बड़े काम का बीड़ा वन मंत्री ने चरण पादुका त्याग कर 24 साल पहले भी उठाया था.

वैसे कोठारी साहब अकेले नहीं हैं. मध्य प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री का दर्जा पाए बीस सूत्री क्रियान्वयन समिति के उपाध्यक्ष जयभान सिंह पवैया ने पहले से ही चप्पल-जूते न पहनने की कसम खा रखी है.

जयभान सिंह पवैया का किस्सा तो कुछ अलग ही है और वो पिछले दस महीनों से नंगे पाँव घूम रहे हैं.

दरअसल पिछले दिनों टीवी कैमरे पर कुछ सांसदों को घूस लेते हुए दिखाया गया था और इनमें से एक ग्वालियर के सांसद थे.

‘प्रचार के लिए नौटंकी’

 ये प्रतिज्ञाएँ भारतीय जनता पार्टी के नेताओं की नौटंकी हैं और प्रचार का स्टंट है
मानक अग्रवाल

पवैया को लगा कि इस काँग्रेसी सांसद ने ग्वालियर की धरती का अपमान किया है. इसलिए भारतीय जनता पार्टी जब तक इस संसदीय क्षेत्र में काँग्रेस को हराने में सफल नहीं हो जाती वो न तो बिस्तर पर सोएंगे, न अन्न ग्रहण करेंगे और जूते-चप्पल भी नहीं पहनेंगे.

बजरंग दल के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष जयभान सिंह पवैया ने अपनी कसम भगवान हनुमान की मूर्ति के सामने ली थी.

दूसरी ओर काँग्रेस नेता मानक अग्रवाल ऐसी प्रतिज्ञाओं को भारतीय जनता पार्टी के नेताओं की नौटंकी करार देते हैं और कहते हैं यह सब प्रचार का स्टंट है.

जबकि जयभान सिंह पवैया कहते हैं, ''राजनीतिक जीवन में अंतर्मन से ली गई प्रतिज्ञाओं पर ऐसी टिप्पणी आना अस्वाभाविक नहीं है क्योंकि राजनीति ईर्ष्या और स्पर्धा का क्षेत्र है.''

लगता है जयभान सिंह पवैया की बातों औरों पर भी असर डाल रही हैं.

वामपंथी से निर्दलीय और फिर काँग्रेसी बने और हाल में ही भाजपा के टिकट पर बड़ा मलहेरा से चुनाव जीतने वाले कपूरचंद घुवारा भी जूता-चप्पल त्यागे हुए हैं.

उनका प्रण है कि जब तक उनके क्षेत्र का विकास नहीं, तब तक जूता-चप्पल नहीं.

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