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गुरुवार, 14 सितंबर, 2006 को 15:25 GMT तक के समाचार
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कर्मचारी बन सकेंगे आरएसएस सदस्य

आरएसएस की शाखा
आरएसएस ने समरसता और शाखाओं पर ध्यान देने का फ़ैसला किया है
मध्यप्रदेश की सरकार ने शासकीय कर्मचारियों पर लगे उस प्रतिबंध को समाप्त कर दिया है जिसके तहत वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सदस्य नहीं बन सकते थे.

प्रशासन ने अपने हाल के एक आदेश में शासकीय कर्मचारी सेवा आचरण नियमों के बारे में स्थिति स्पष्ट की है. प्रशासन का कहना है कि इसके अंर्तगत किसी सरकारी कर्मचारी के किसी राजनीतिक संगठन से संबंध, सदस्यता और सहायता पर लगी पाबंदी आरएसएस पर लागू नहीं है.

कांग्रेस की दिग्विजय सिंह सरकार के समय पारित एक आदेश में स्पष्ट किया गया था कि 'राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ एवं अन्य ऐसी संस्थाओं के कार्यकलापों में भाग लेना या उससे किसी रूप में सहयोग करना मध्यप्रदेश सिविल सेवा (आचरण) नियम का उल्लंघन माना जाएगा.'

 'राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ एवं अन्य ऐसी संस्थाओं के कार्यकलापों में भाग लेना या उससे किसी रूप में सहयोग करना मध्यप्रदेश सिविल सेवा (आचरण) नियम का उल्लंघन माना जाएगा
दिग्विजय सरकार के समय जारी आदेश

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि आरएसएस एक राष्ट्रवादी समाजिक-सांस्कृतिक संगठन है और उसकी तुलना किसी राजनीतिक संगठन से करने का कोई औचित्य नहीं इसलिए मध्यप्रदेश की सरकार ने इस प्रतिबंध को समाप्त कर दिया.

'ख़तरनाक फ़ैसला'

मध्यप्रदेश उन पाँच भारतीय राज्यों में से एक है जहाँ भारतीय जनता पार्टी की सरकार है.

मध्यप्रदेश में विपक्ष की नेता जमुना देवी ने सरकार के फ़ैसले को 'ख़तरनाक' बताते हुए कहा कि इस फ़ैसले से सरकारी कर्मचारियों के बीच भी सांप्रादायिक विभाजन पैदा हो जाएगा.

 आरएसएस भारतीय जनता पार्टी में संगठन महामंत्रियों और अन्य पदों पर अपने कार्यकर्त्ताओं को नियुक्त करती है. उनसे अपने एजेंडे पर काम करवाती है तो वह सांस्कृतिक और सामाजिक संगठन किस प्रकार हुआ?
विपक्ष की नेता जमुना देवी

उन्होंने ये भी कहा कि इससे उनके काम के निर्वहण में उनके द्वारा लिए गए फैसलों पर भी प्रश्न चिन्ह लगेंगे.

उन्होंने आरएसएस के सांस्कृतिक संगठन होने के दावे पर भी सवाल उठाए.

जमुना देवी ने पूछा, "आरएसएस भारतीय जनता पार्टी में संगठन महामंत्रियों और अन्य पदों पर अपने कार्यकर्त्ताओं को नियुक्त करती है. उनसे अपने एजेंडे पर काम करवाती है तो वह सांस्कृतिक और सामाजिक संगठन किस प्रकार हुआ?"

सरकारी कर्मचारियों के काम-काज में निष्पक्षता रखने की गरज से भारत जैसे बहु-सांस्कृतिक एवम् बहु-धार्मिक देश में यह व्यवस्था लागू की गई थी कि शासकीय अमला न तो किसी राजनीतिक दल का सदस्य होगा और न ही किसी तरह से उसके क्रियाकलापों में शामिल होगा.

हालांकि केंद्र और अन्य राज्यों के शासकीय कर्मचारी सेवा आचरण नियम में आरएसएस को विशेष तौर पर उल्लेखित नहीं किया गया है लेकिन ऐसा समझा जाता है कि सरकारी कर्मचारी उससे किसी प्रकार से नहीं जुड़ सकते.

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