|
चेन्नई में अवैध निर्माण गिराने के निर्देश | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत के सर्वोच्च न्यायालय की नज़र अब दिल्ली के बाद दूसरे शहरों की ओर घूम रही है. शुक्रवार को न्यायालय ने चेन्नई शहर के 60 हज़ार से अधिक अवैध निर्माण को गिराने के निर्देश दिए हैं. न्यायालय ने कहा है कि इन अवैध निर्माण के चलते 'शहर रहने लायक नहीं बचा है.' सर्वोच्च न्यायालय ने यह फ़ैसला सुनाते हुए तमिलनाडु विधानसभा के उस क़ानून को अवैधानिक ठहराया है जिसके तहत राजधानी चेन्नई के इन अवैध निर्माणों के लिए ज़ुर्माना देकर उसे वैध करवा लेने का प्रावधान था. उल्लेखनीय है कि सर्वोच्च न्यायालय ने दिल्ली के रिहायशी इलाक़ों में चल रहे व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को लेकर कड़े तेवर अपना रखे हैं. चेन्नई शहर पहले से ही बदनाम रहा है कि बड़े बिल्डरों और निजी मकान मालिक निर्माण के क़ानून का पालन नहीं करते. वर्ष 1990 से 2005 के बीच तमिलनाडु सरकार ने हज़ारों ऐसी बिल्डिंगों को ज़ुर्माना वसूल करके टाउन-कंट्री प्लानिंग क़ानून के तहत नियमित कर दिया. शुक्रवार को सर्वोच्च न्यायालय के दो न्यायाधीशों के एक पीठ ने इस क़ानून को अवैधानिक क़रार दिया. सर्वोच्च न्यायालय को यह फ़ैसला इसलिए देना पड़ा क्योंकि इससे पहले न्यायालय के इसी तरह के फ़ैसले के ख़िलाफ़ सरकार ने अपील की थी. न्यायमूर्ति एचके सेमा और न्यायमूर्ति पीके बालासुब्रमण्यम ने तमिलनाडु सरकार को फटकार लगाते हुए कहा, "लोगों को शांति से रहने दें और इस देश को बचाएँ. आख़िर कोई तो अनुशासन हो." न्यायालय ने तमिलनाडु सरकार और स्थानीय प्रशासन से कहा है कि वो सभी अवैध निर्माण को गिराएँ. इसके अतिरिक्त न्यायालय ने सरकार से कहा है कि वह अब तक अवैध निर्माण को वैध करने के लिए वसूली गई राशि को लौटाए. एक अनुमान है कि सरकार ने इसके तहत अब तक कोई 300 करोड़ रुपयों से अधिक की राशि वसूल की है जो अब लौटानी होगी. तमिलनाडु सरकार ने अब तक इस फ़ैसले पर कोई प्रतिक्रिया व्यक्त नहीं की है. | इससे जुड़ी ख़बरें सीलिंग पर छोटे व्यापारियों को राहत23 नवंबर, 2006 | भारत और पड़ोस 'दुरुपयोग बंद करें, फिर राहत का सोचेंगे'15 नवंबर, 2006 | भारत और पड़ोस दिल्ली में दो नवंबर से सीलिंग के निर्देश31 अक्तूबर, 2006 | भारत और पड़ोस दिल्ली की हिंसा में चार लोग मारे गए20 सितंबर, 2006 | भारत और पड़ोस अवैध निर्माण मामले पर विधेयक पारित12 मई, 2006 | भारत और पड़ोस रिहायशी इलाकों में व्यवसाय बंद होंगे16 फ़रवरी, 2006 | भारत और पड़ोस दिल्ली में अतिक्रमण हटाओ अभियान19 दिसंबर, 2005 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
| |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||