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बुधवार, 08 नवंबर, 2006 को 06:03 GMT तक के समाचार
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हमले में 42 पाकिस्तानी सैनिक मारे गए
पाकिस्तानी सैनिक (फ़ाइल फोटो)
हमले में पाकिस्तानी सैनिकों को निशाना बनाया गया
अफ़ग़ानिस्तान से सटे पाकिस्तान के सरहदी सूबे में सेना के प्रशिक्षण केंद्र पर आत्मघाती हमला हुआ है. इसमें 42 सैनिक मारे गए और लगभग 20 घायल हुए हैं.

सीमावर्ती इलाक़ों में तालेबान और अल क़ायदा समर्थकों के ख़िलाफ़ पाकिस्तानी सेना की कार्रवाई शुरू होने के बाद यह चरमपंथियों का सबसे बड़ा हमला है.

अभी तक किसी संगठन ने इस हमले की ज़िम्मेदारी नहीं ली है.

 बाजौड़ की घटना के बाद यह संभावित था लेकिन हम आतंकवाद के ख़िलाफ़ लड़ाई जारी रखेंगे. हम इसकी निंदा करते हैं क्योंकि इसमें निर्दोष लोगों की जानें गई हैं
आफ़ताब शेरपाओ

ये हमला दरगई शहर में हुआ जो पेशावर का एक पहाड़ी इलाक़ा है.

यहाँ के लोगों का मानना है कि ये हमला बाजौड़ क्षेत्र के एक मदरसे पर हुई सैनिक कार्रवाई के विरोध में किया गया लगता है.

इस कार्रवाई में 80 लोग मारे गए थे और इसके विरोध में हज़ारों लोगों ने प्रदर्शन किया था.

हमला

पाकिस्तान के गृह मंत्री आफ़ताब शेरपाओ ने हमले की जानकारी देते हुए बताया, "एक व्यक्ति कार से उतरा. उसने चादर ओढ़ रखी थी. वह तेज़ी से परेड ग्राउंड की बढ़ा और अचानक विस्फ़ोट हो गया."

उन्होंने कहा, "बाजौड़ की घटना के बाद यह संभावित था लेकिन हम आतंकवाद के ख़िलाफ़ लड़ाई जारी रखेंगे. हम इसकी निंदा करते हैं क्योंकि इसमें निर्दोष लोगों की जानें गई हैं."

 घायल सैनिक दम तोड़ रहे थे और उनके जूते और टोपियाँ चारों ओर फैली हुईं थीं
प्रत्यक्षदर्शी औरंगज़ेब

एक प्रत्यक्षदर्शी औरंगज़ेब ने बीबीसी को बताया कि धमाके के बाद सैनिक घायलों और मृतकों को परेड मैदान से हटा रहे थे.

उनका कहना था,'' घायल सैनिक दम तोड़ रहे थे और उनके जूते और टोपियाँ चारों ओर फैली हुईं थीं. ''

ऐसा सूचनाएँ हैं कि मरने वालों में ज़्यादातर सेना के रंगरूट थे जो सुबह के अभ्यास के लिए परेड मैदान में थे.

सेना के प्रवक्ता मेजर जनरल शौकत सुल्तान का कहना था, '' यह चरमपंथी हमला है और आत्मघाती लगता है. हम इसकी जाँच कर रहे हैं.''

बीबीसी संवाददाता मोहम्मद इलियास ख़ान का कहना है कि इस हमले से सीमावर्ती इलाक़ों में तालेबान समर्थक लड़ाकों और सेना के बीच हुआ समझौता खटाई में पड़ सकता है.

दरगई

दरगई तालेबान समर्थक प्रतिबंधित संगठन 'तहरीके निफ़ाज़े शरियत मोहम्मदी' का गढ़ माना जाता है.

इस संगठन ने वर्ष 2001 में हज़ारों क़बायली लड़ाकों के अमरीकी सेना से लड़ने के लिए अफ़ग़ानिस्तान भेजा था जिनमें से कई कभी वापस नहीं लौट पाए.

पिछले कुछ दिनों से स्थानीय क़बायली खुल कर इस बात की चेतावनी दे रहे थे कि वे बाजौड़ की घटना के विरोध में सेना के ख़िलाफ़ आत्मघाती हमले करेंगे.

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