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दिल्ली धमाकों की बरसी पर श्रद्धांजलि | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
रविवार को दिल्ली में 29 अक्टूबर, 2005 को हुए बम धमाकों को एक वर्ष पूरा हो गया है. इन धमाकों में मारे गए लोगों के परिजनों ने इस अवसर पर दिल्ली में एक श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया. लोगों ने मृतकों को याद किया और सर्व-धर्म प्रार्थना सभा आयोजित की गई. पिछले वर्ष दिवाली से ठीक पहले हुए इन धमाकों में कम से कम 62 लोगों की मौत हो गई थी और क़रीब 200 लोग घायल हो गए थे. त्योहारों के मौसम में दिल्ली में हुए इन धमाकों ने पूरी दिल्ली को दहला कर रख दिया था. इन धमाकों की संयुक्त राष्ट्र महासचिव कोफ़ी अन्नान समेत दुनिया के कई देशों ने निंदा की थी. चरमपंथियों का यह हमला किसी राजनीतिक या धार्मिक महत्व की जगह या शख्सियत पर न होकर सीधे तौर पर आम लोगों पर था जिसका उनकी मानसिकता और सामान्य जनजीवन पर गहरा असर पड़ा था. धमाकों के कुछ दिनों बाद दिल्ली पुलिस ने दावा किया था कि उन्होंने इन धमाकों की गुत्थी सुलझा ली है और प्रमुख संदिग्ध व्यक्ति को गिरफ़्तार किए जाने का दावा भी किया गया था. पुलिस की कार्रवाई इन धमाकों के सिलसिले में कुछ और गिरफ़्तारियाँ भी हुई थीं. इस घटना के क़रीब 15 दिन बाद यानी 13 नवंबर, 2005 को दिल्ली पुलिस ने धमाकों के संबंध में अहम सुराग हाथ लगने और धमाके की गुत्थी सुलझाने का भी दावा किया था.
दिल्ली पुलिस आयुक्त केके पॉल ने बताया था कि 29 अक्तूबर को हुए धमाकों में 'चार आतंकवादियों' का हाथ था जिनमें से दो जम्मू-कश्मीर के थे जबकि अन्य दो के विदेशी होने की बात कही गई थी. उन्होंने इन धमाकों के लिए चरमपंथी संगठन लश्करे तैयबा को ज़िम्मेदार ठहराया था और इस सिलसिले में अबू-अलकामा और अबू-हज़ेफ़ा नाम के लश्कर-ए-तैयबा के दो साथियों का नाम भी उजागर किया था. दिल्ली पुलिस की विशेष सेल ने 10 नवंबर, 2005 को जम्मू-कश्मीर पुलिस की मदद से तारिक़ अहमद डार नाम के एक व्यक्ति को गिरफ़्तार किया था. पुलिस के मुताबिक़ इस व्यक्ति के तार लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े हुए थे और यह दिल्ली में चार से छह अक्तूबर के दौरान आया था जिसने यहाँ आतंकवादियों की इन धमाकों को अंजाम देने में मदद की. हालांकि इन धमाकों के लिए अभी तक किसी भी अभियुक्त को कोई सज़ा नहीं हो सकी है. 29 अक्टूबर, 2005 दिल्ली में पहला धमाका भीड़ भाड़ भरे पहाड़गंज इलाक़े में भारतीय समयानुसार साढे पाँच बजे हुआ था. प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार पहाड़गंज का विस्फोट ख़ासा शक्तिशाली था और इसमें अनेक लोग हताहत हुए थे.
पहाड़गंज नई दिल्ली स्टेशन के एकदम नज़दीक है और गली कूचों वाले इस इलाक़े में हमेशा भीड़ रहती है. दिवाली का पर्व क़रीब होने के कारण भीड़ और भी ज़्यादा थी. दूसरा विस्फोट आधे घंटे बाद शाम लगभग छह बजे सरोजनी नगर में हुआ था. विस्फोट के बाद बाज़ार में बिक्री के लिए सजी आतिशबाज़ी में आग लग गई. बीबीसी के पॉल डानहर के अनुसार इस इलाक़े में हुए विस्फोट में कम से कम तीन लोग मारे गए थे. तीसरा विस्फोट दक्षिण दिल्ली के गोविंदपुरी इलाक़े में एक बस में हुआ था. नाराज़गी भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने इन धमाकों पर नाराज़गी जाहिर करते हुए कहा था कि पाकिस्तान भारत के ख़िलाफ़ आतंकवादी गतिविधियों को रोकने की प्रतिबद्धता पूरी करे.
धमाकों के बाद भारत सरकार ने पहली बार ये संकेत दिया था कि दिल्ली धमाकों में शामिल लोगों के तार विदेशी चरमपंथी गुट से जुड़े हो सकते हैं. धमाके के दो दिन बाद पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से फ़ोन पर बातचीत की थी. बातचीत में पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से दिल्ली धमाके में मारे गए लोगों के प्रति संवेदना प्रकट की थी और भारत से सुबूत पेश करने के लिए कहा था. साथ ही उन्होंने दिल्ली धमाकों की जाँच में सहयोग करने की पेशकश भी की थी. |
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