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मैंने देखे जले हुए शव, मैंने देखे..... | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
मेरे चारों ओर अफ़रा-तफ़री का माहौल है. माहौल असमंजस का भी है. पिछले तीन मिनट में मैंने तीन बुरी तरह जले शव देखे हैं जिन्हें सरोजनी नगर बाज़ार से ले जाया जा रहा है. यह हमला, जी हाँ यह हमला ही लग रहा है क्योंकि एक के बाद एक हमलों में कहीं न कहीं समन्वय नज़र आ रहा है. यह हमला ऐसे समय हुआ है जब हिंदू दीपावली की तैयारी कर रहे हैं. तीन दिन बाद दीपावली का त्यौहार है. इस त्यौहार के मद्देनज़र दिल्ली के बाज़ार आम दिनों के मुक़ाबले कहीं ज़्यादा भरे हुए हैं. अभी यह स्पष्ट नहीं है कि मरने वालों की संख्या कितनी है. लेकिन घटनास्थल की स्थिति देखते हुए यही लग रहा है कि संख्या ज़्यदा हो सकती है. अभी भी कई इमारतों में लोगों की तलाश हो रही है और कई इमारतों में आग लगी हुई है. इन सबके बीच यह जान लेना आवश्यक है कि ये सिर्फ़ एक घटनास्थल की हालत है. | इससे जुड़ी ख़बरें लालक़िले पर हमले के लिए सात दोषी24 अक्तूबर, 2005 | भारत और पड़ोस दिल्ली धमाकों पर वीडियो रिपोर्ट29 अक्तूबर, 2005 | भारत और पड़ोस 'चरमपंथी गतिविधियों में कमी नहीं'15 अक्तूबर, 2005 | भारत और पड़ोस दिल्ली विस्फ़ोट मामले में दो गिरफ़्तार08 जून, 2005 | भारत और पड़ोस दिल्ली में हुए कई विस्फोट22 मई, 2005 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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