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सत्तर वर्ष की उम्र में 14वीं शादी की कोशिश | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
हरियाणा की मशहूर राग-रागनियों में हर तरह के किस्से में बयान किए जाते हैं लेकिन रामधारी की अनोखी कहानी अभी लिखी जानी है. ये कहानी है हरियाणा के करनाल के इंद्री इलाक़े के गाँव लवकेरी के सत्तर वर्षीय आशिक मिज़ाज निवासी की, जो स्थानीय लोगों के मुताबिक 1960 से लेकर अब तक 13 शादियाँ रचा चुके हैं और पिछले दिनों बीवी नंबर 14 लाने की तैयारी में जुटे थे. पति की मार के डर से खामोश रहने पर मजबूर रामधारी की पहली 12 पत्नियों ने कभी शिकायत नहीं की. तब भी नहीं जब उसने उन्हें एक-एक कर अपने घर से निकाल बाहर किया. मगर हरबंस कौर कुछ अलग ही मिट्टी की बनी थी. रामधारी की तेरहवीं पत्नी को जब पता चला कि उसके बूढ़े शौहर की पहले भी कई बीवियाँ हैं तो उसने पहले तो लवकेरी की पंचायत से शिकायत की और इसके बाद इंद्री के पुलिस थाने जाकर पति के ख़िलाफ़ अर्ज़ी डाल दी. हरबंस कौर कहती हैं, ‘‘मैं उसकी तेरहवीं बीवी हूँ. सारे गाँववाले कहते हैं कि इसकी तेरह शादियाँ हो चुकी हैं. मुझे सबके के नाम और पते तो नहीं मालूम पर एक यमुनानगर से है, माली मजरे वाली तो ज़िंदा है. उससे तो मैं भी मिलकर आई थी और वो मेरे साथ थाने भी आई थी.’’ हरबंस अपने पति के ज़ुल्मों को बयान करती हुई कहती हैं, ‘‘रामधारी मुझे मारता था, कहता था कि यहाँ से निकल जाओ. तेरी जैसी तो मैं कितनी ले आया, सारी को मार-पीट कर भगा दिया. तू तो रोज खाती है और बच्चों को रोज-रोज नहलाती है.’’ मदद पीड़ित हरबंस कौर ने हरियाणा में काम कर रहे स्वयंसेवी संगठन शक्ति वाहिनी से संपर्क किया. शक्ति वाहिनी के कार्यकर्ता राज सिंह चौधरी ने निजी तौर पर सारे मामले की तहकीकात करवाई. राज सिंह कहते हैं, ‘‘जब हमारे पास तेरहवीं बीवी ने शिकायत की तो हमे पता चला कि एक व्यक्ति गाँव में किस प्रकार बार-बार शादियाँ कर रहा है. सरकार और समाज, दोनों को धोखा दे रहा है. तब हमने इस व्यक्ति के ख़िलाफ़ कदम उठाने और उसे गिरफ़्तार करवाने का फ़ैसला किया.’’ राज सिंह ने बताया कि रामधारी ने हर बार अदालत से तलाक़ लिए बिना पत्नी को छोड़ दिया. इस सारे प्रकरण में मजे की बात ये है कि बरसों से रामधारी की हरकतों पर चुप्पी साधे हुए लवकेरीवासी संभवत: हरबंस कौर की हिम्मत से कुछ सीख लेकर अब खुल कर बोलने लगे हैं. गाँवों के पुराने सरपंच सुखदर्शन ने माना कि नामधारी ने कई शादियाँ की और हर मर्तबा कुछ समय के बाद पत्नी को घर से बाहर निकाल दिया. मगर उनका मानना था कि ज़्यादातर महिलाएँ रामधारी की आठ एकड़ जमीन के लालच में ही शादी के लिए राजी हुई थीं. सुखदर्शन कहते हैं, ‘‘शादियाँ तो ज़रूर हुई हैं इसकी. मेरे ख़याल में 14 के क़रीब हुई. बस शादी कराई, छोड़ दी, चली गईं बेचारी. गाँव वालों की कौन माने है जी. समझाने से कोई भी नहीं मानता. समझाया तो बहुत था पर गाँव वाले उसकी पहरेदारी थोड़े किया करते थे.’’ गाँव की राय लगभग सभी गांव वाले मानते हैं कि रामधारी को उसके किए की सज़ा मिलनी चाहिए. उन्हें इस बात का रोष है कि उसने सारे गाँव की बदनामी करवा दी है.
गाँव की एक बुजुर्ग औरत कहती है, ‘‘ग़लत ही है. ये कोई अच्छा काम किया है क्या. जिसकी गलती है उसको सज़ा तो मिलनी चाहिए. हम उससे क्या डरते हैं. क्या वो हमें खाना देता है. ’’ हालाँकि शिकायत दर्ज होने के बाद पुलिस ने रामधारी को पकड़ने के इक्का-दुक्का प्रयास किए हैं मगर शक्ति वाहिनी के राज सिंह का कहना है कि पुलिस इस मामले में गंभीर नहीं है. राज सिंह कहते हैं, ‘‘पुलिस में शिकायत तो हुई है मगर पुलिस तफ़्तीश चल रही है कहकर मामले को टाल रही है. एक व्यक्ति जो 13 शादी कर चुका है और चौदहवीं की तैयारी कर रहा है, सरकार का फ़र्ज बनता है कि ऐसे व्यक्ति के ख़िलाफ़ कार्रवाई करे.’’ उधर इंद्री के थानेदार मानवीर सिंह का कहना है कि ये महज घरेलू लड़ाई का मामला है जिस पर वे देर-सवेर कार्रवाई कर लेंगे. इस बीच रामधारी के गाँव वाले घर में ताला लगा हुआ है और उसकी तेरहवीं पत्नी अपने बच्चों के साथ अनाथ आश्रम में रहने को मजबूर है. | इससे जुड़ी ख़बरें शादी का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य होना चाहिए?14 फ़रवरी, 2006 | आपकी राय ब्रिटेन में जबरन विवाह के ख़िलाफ़ अभियान16 मार्च, 2006 | पहला पन्ना सरकारी शादी में कर्मचारी दीवाने....05 मई, 2006 | भारत और पड़ोस राजस्थान में विवाह का पंजीकरण ज़रुरी24 मई, 2006 | भारत और पड़ोस समलैंगिक विवाह संबंधी विधेयक रुका07 जून, 2006 | पहला पन्ना भारत में बाल विवाह एक बड़ी चुनौती08 जून, 2006 | भारत और पड़ोस नक़ली शादी का कारोबार10 जुलाई, 2003 | पहला पन्ना | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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