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भारत में बाल विवाह एक बड़ी चुनौती | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
दो कमरों के घर में परिवार के सदस्यों के साथ चमकदार लाल पोशाक में बैठी मनेम्मा अपनी उम्र से भी छोटी नज़र आती है. मनेम्मा 11 वर्ष की है और विवाहित है. वो बताती है कि जब उसकी शादी हुई, उसे कुछ अंदाज़ा नहीं था कि उसके साथ क्या हो रहा है, "मैं केवल छह बरस की थी और बस इतना ही जानती थी कि मुझे घर छोड़ना होगा. मैं रोती रही और कहती रही कि मुझे नहीं जाना पर उन्होंने (परिवार के सदस्यों ने) मेरी एक नहीं सुनी." मैंने इस लड़की के पिता की ओर प्रश्नवाचक नज़रों से देखा कि वह अपनी ही बेटी के साथ ऐसा कैसे कर सकता है. इस पर वो लापरवाही से जवाब देता है, "यहाँ की तो यही परंपरा है. लड़कियों की शादी काफ़ी छोटी उम्र में हो जाती है. भले ही उनके पति की उम्र कितनी ही हो और उन्हें इन्हीं स्थितियों में अपने को ढालना होता है." यह कहानी केवल मनेम्मा की ही नहीं है. भारत में हर वर्ष हज़ारों की तादाद में बाल विवाह होते हैं और उनकी यौवनावस्था में क़दम रखते ही उनसे गर्भधारण की अपेक्षा रखी जाती है. कच्ची उम्र में... वर्ष 2001 के सरकारी सर्वेक्षण के मुताबिक क़रीब तीन लाख लड़कियों ने 15 वर्ष से भी कम उम्र में बच्चे को जन्म दिया. इनमें से कुछ ने तो दो-दो बार बच्चों को जन्म दिया है. ऐसा तब हो रहा है जबकि भारत में बाल विवाह क़ानूनन ज़ुर्म है. चिंता की बात तो ये है कि बसंत के मौसम में देशभर में बड़े पैमाने पर सार्वजनिक समारोहों में बाल विवाह होते हैं. इनमें कई बच्चों की उम्र तो महज़ छह वर्ष तक ही होती है. भारतीय राज्य राजस्थान में एक जगह हो रहे विवाह समारोह में जब हम पहुँचे तो पाया कि वहाँ कई बच्चियों की शादी हो रही थी. इनमें से एक की उम्र छह वर्ष है जो सजी-धजी अपने चारों ओर चल रहे समारोह से अंजान है. शादी पूरी होने के बाद उसे उसकी सास के पास भेज दिया जाएगा जहाँ यौवन की शुरुआत के साथ ही एक के बाद एक बच्चों को जन्म देने का सिलसिला शुरू हो जाएगा. हालांकि ऐसा तभी संभव होगा, जब वह पहले प्रसव के बाद भी बच पाएगी. भारत के कुछ राज्यों में यह क़ानून लागू है कि सभी शादियों का पंजीकरण अनिवार्य होगा जिसके साथ लड़की को अपना जन्म प्रमाण पत्र भी पेश करना होगा ताकि साबित हो सके कि उसकी उम्र 18 वर्ष है. यह बात और है कि क़ानून कड़ाई से लागू नहीं हो पा रहा है और इसकी अवहेलना की जा रही है. जान का जोखिम हैदराबाद के महात्मा गांधी अस्पताल का एक दृश्य देखिए. 15 वर्ष की एक लड़की प्रसव की तकलीफ़ से छटपटाती हुई यहाँ लाई जाती है. हमें डॉक्टर शैलजा ने बताया, "यह इस बात का एक सटीक उदाहरण है कि कम उम्र में माँ बनने से क्या तकलीफ़ होती है. इसका रक्तचाप बढ़ा हुआ है और इसके पेट में पल रहा बच्चा पूरी तरह से विकसित भी नहीं हुआ है." इस लड़की की क़िस्मत अच्छी थी कि 200 किलोमीटर की दूरी से उसे यहाँ तक लाया जा सका है पर ऐसा सभी के साथ नहीं होता. भारत में ऐसी कितनी ही महिलाएं हैं जो बच्चों को अपने घर में ही जन्म देती हैं. इस दौरान कई मामलों में जच्चा और बच्चा दोनों की ही मौत हो जाती है. दुनियाभर में ऐसे बच्चों की सबसे बड़ी तादाद भारत से है जो अपनी ज़िंदगी के एक वर्ष में ही मर जाते हैं और इसकी एक बड़ी वजह कम उम्र बच्चों को जन्म देना है. छोटी-सी आशा मगर इस पूरी स्थिति में कहीं-कहीं सकारात्मक संकेत भी देखने को मिलते हैं. मसलन 14 वर्ष की जैंग्री जो एक स्कूल में किशोरावस्था के छात्रों के एक समूह को संबोधित कर रही थी. जैंग्री जब 11 वर्ष की थी तभी उससे उम्र में 20 वर्ष से भी ज़्यादा बड़े एक ट्रक ड्राइवर से उसकी शादी कर दी गई थी. शादी के तीन दिन बाद ही उसकी एक सड़क दुर्घटना में मौत हो गई और 11 वर्ष की लड़की जैंग्री विधवा हो गई. उनकी शादी पंजीकृत नहीं थी इसलिए उसे कोई राहत भी नहीं मिली. जैंग्री को लगा कि उसका जीवन ख़त्म है पर उसने फ़ैसला लिया कि वह इस बारे में लोगों को जागरूक करने का काम करेगी. जैंग्री बताती हैं, "इस बारे में अभिभावकों को जागरूक करना मुश्किल काम है पर मैं उन्हें अपनी कहानी सुनाती हूँ और मुझे आशा है कि इससे उनकी मानसिकता बदलेगी." जैंग्री इतने बड़े देश में एक छोटी-सी आशा की तरह है पर यह एक बेहतर शुरुआत है. | इससे जुड़ी ख़बरें राजस्थान में विवाह का पंजीकरण ज़रुरी24 मई, 2006 | भारत और पड़ोस सरकारी शादी में कर्मचारी दीवाने....05 मई, 2006 | भारत और पड़ोस अब शादी का पंजीकरण होगा आवश्यक14 फ़रवरी, 2006 | भारत और पड़ोस बाल विवाह रोकने की 'सज़ा'11 मई, 2005 | भारत और पड़ोस छत्तीसगढ़ में परंपरा के नाम पर बाल विवाह24 अप्रैल, 2004 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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