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पाकिस्तान केंद्रीय भूमिका में:मुशर्रफ़ | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने ज़ोर देकर कहा है कि उनका देश आतंकवाद से पैदा हुए ख़तरों से रक्षा करने में पश्चिमी देशों की महत्वपूर्ण मदद कर रहा है. बीबीसी के टुडे कार्यक्रम में एक इंटरव्यू में परवेज़ मुशर्रफ़ ने उन्हीं तर्कों को और मज़बूती से पेश किया जो वे हाल के दिनों में राष्ट्रपति जॉर्ज बुश और ब्रितानी प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर से मुलाक़ातों के दौरान पेश करते रहे हैं. बीबीसी के विश्व मामलों के संवाददाता माइक वुलरिज का कहना है कि जनरल मुशर्रफ़ ने इम अमरीकी संदेहों को ख़ारिज कर दिया कि ऐसा लगता है कि पाकिस्तानी ख़ुफ़िया एजेंसी आईएसआई अफ़ग़ानिस्तान में सक्रिय तालेबान की मदद कर रही है. पाकिस्तानी राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने बार-बार ज़ोर देकर कहा है कि अफ़ग़ानिस्तान और पाकिस्तान क्षेत्र में चरमपंथी गतिविधियों को दस साल के उस काल से अलग करके नहीं देखा जा सकता जो 1979 में अफ़ग़ानिस्तान में सोवियत सेनाओं के घुसने के साथ शुरू हुआ था. शनिवार को बीबीसी के टुडे कार्यक्रम में दिए इंटरव्यू में परवेज़ मुशर्रफ़ ने इसी मुद्दे पर ज़्यादा ज़ोर दिया. मुशर्रफ़ का कहना था कि उस समय में पाकिस्तान ने पश्चिमी देशों से समर्थित उन लड़ाकों (तालेबान) को पनाह दी थी जिन्होंने सोवियत संघ की लाल सेना से लड़ाई की थी. मुशर्रफ़ का कहना है कि पाकिस्तान ने शीत युद्ध जीतने में पश्चिमी देशों की मदद की और उनका दावा है कि उसके बाद पाकिस्तान को उसके हाल पर छोड़ दिया गया. परवेज़ मुशर्रफ़ का यह भी दावा है कि आज के दौर में चल रहे 'आतंकवाद के ख़िलाफ़ युद्ध' में पाकिस्तान की केंद्रीय भूमिका है, ख़ासतौर से उसकी ख़ुफ़िया एजेंसी आईएसआई महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है. ग़ौरतलब है कि परवेज़ मुशर्रफ़ पाकिस्तान सरकार के प्रति आईएसआई की वफ़ादारी की जमकर हिमायत कर चुके हैं. राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने कहा, "अगर पाकिस्तान आपके साथ सहयोग नहीं करेगा तो आप घुटनों के बल गिर पड़ेंगे. बस मैं यही कहना चाहता हूँ. पाकिस्तान मुख्य सहयोगी देश है. अगर हम आपके साथ नहीं होते तो आप कुछ भी नहीं कर पाते. यह बहुत साफ़ तरीके से समझ लिया जाना चाहिए." "अगर आईएसआई आपके साथ नहीं होती तो आप नाकाम हो जाएंगे." राष्ट्रपति मुशर्रफ़ का तर्क है कि पाकिस्तान ने उत्तरी वज़ीरिस्तान इलाक़े में क़बायली नेताओं के साथ हाल ही में जो समझौता किया है उसका मक़सद तालेबान को अलग-थलग करना है और वह इस बहुत महत्वपूर्ण है. परवेज़ मुशर्रफ़ ने ब्रिटेन और उसके सहयोगी देशों से अनुरोध किया है कि वे भी अफ़ग़ानिस्तान में इसी तरह की रणनीति पर काम करें. | इससे जुड़ी ख़बरें 'क़ानूनी दायरे से बाहर कार्रवाई'29 सितंबर, 2006 | भारत और पड़ोस 'पाकिस्तान को समझने की ज़रुरत'29 सितंबर, 2006 | भारत और पड़ोस करज़ई-मुशर्रफ़ एकजुट रहें-अमरीका28 सितंबर, 2006 | भारत और पड़ोस मुशर्रफ़ ने आईएसआई की हिमायत की28 सितंबर, 2006 | भारत और पड़ोस विमोचन से पहले ही मुशर्रफ़ की किताब पर बहस25 सितंबर, 2006 | भारत और पड़ोस मुशर्रफ़ के बयान पर बुश हैरान22 सितंबर, 2006 | भारत और पड़ोस 'अमरीका ने बमबारी की धमकी दी थी'21 सितंबर, 2006 | भारत और पड़ोस नाकाम राष्ट्रों की सूची में पाकिस्तान ऊपर02 मई, 2006 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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